राम मंदिर के लिए कुंभ में हठ योग!

संत समाज है नाराज
– मौनी बाबा जमीन पर पलटते हुए पहुंचे कुंभ।
– राम मंदिर निर्माण में विलंब से हैं नाराज।
– विरोध में कर रहे हैं हठ योग।
– अ.भा.अ.प. के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि भी नाराज।
– बोले, जो मंदिर बनाने का वादा निभाएगा, उसे ही मिलेगा चुनाव में संतों का समर्थन।

सरकार और न्यायालय द्वारा अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि के मसले को बार-बार लटकाए जाने से संत समाज में काफी आक्रोश है। संतों की यह नाराजगी प्रयागराज में चल रहे कुंभ के दौरान भी देखने को मिल रही है। मौनी बाबा राम मंदिर निर्माण के लिए कुंभ में हठ योग कर रहे हैं। इसमें संकल्प लिया जाता है और शरीर को कष्ट दिया जाता है। मौनी बाबा ने संकल्प लिया है कि जब तक राम मंदिर का निर्माण नहीं किया जाता वे लेट कर ही आगे बढ़ेंगे। मौनी बाबा अपने इसी संकल्प के साथ जमीन पर लेटकर पलटते हुए आगे बढ़ते हुए कुंभ में पहुंच रहे हैं। खबर लिखे जाने तक वे प्रयागराज में दाखिल हो चुके थे और कुंभ क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे थे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि भी सरकार के टाल-मटोल वाले रवैए से काफी नाराज हैं। नाराज महंत का कहना है कि हमें श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में राम मंदिर चाहिए। यहां पर जो मंदिर बनाने का वादा निभाएगा, संत २०१९ के लोकसभा चुनाव में उसी को समर्थन देंगे। किसी दल या नेता विशेष को संतों का समर्थन नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि मंदिर का मामला लटकने से संतों व हिंदुओं का धैर्य जवाब दे रहा है।
महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि मंदिर का निर्माण संत ही करा सकते हैं, कोई संगठन नहीं। राजनीतिक दल स्वयं को इस मुद्दे से पीछे हटा लें तो मंदिर निर्माण का मार्ग स्वत: खुल जाएगा। मदरसे व पूर्वांचल की मस्जिदें आतंकवादी बनाने का केंद्र थीं, योगी सरकार ने वहां छापा मारकर बड़ी कार्रवाई कराने की हिम्मत की, जिससे आतंकी बनने में रोक लगी है।

कुंभ क्षेत्र में किसी वीआईपी के आने पर श्रद्धालुओं को रोकने पर नाराजगी जताते हुए महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि संतों की तरह श्रद्धालु भी मेला की शान हैं। अगर श्रद्धालुओं को दिक्कत हुई तो वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत करेंगे। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि नागा संन्यासियों के प्रति लोगों की धारणा है कि वे गुस्सैल होते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। सम्मान के साथ मिलने, ज्ञान की बातें करने पर नागा संन्यासी नाराज नहीं होते। वे पूरा सहयोग करते हैं। जब कोई अभद्रता करता है, तभी वे नाराज होते हैं।