राष्ट्रभक्ति के ‘काव्यकुंभ’ में कृतज्ञता की डुबकी

‘दोपहर का सामना’ आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में उमड़ी भीड़
२७वें साल में दमदार दस्तक
ढलती दोपहरी और पसरती शाम के साथ शब्दों ने अलख जगाया और `माणिक’ बनकर कविताएं फैल गईं। हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की वैचारिक क्रांति के रथ `दोपहर का सामना’ ने अपने सत्ताइसवें पड़ाव पर दस्तक दी है। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम `काव्यकुंभ’ देशप्रेम की प्रेरणा लेकर शुरू हुआ और हिंदुस्थान की वर्तमान स्थिति पर शब्दबाण की टंकार से वातावरण को जोश और देशप्रेम के जज्बे से भर दिया। इस कार्यक्रम में देश के ख्यातिनाम कवियों ने वीर रस, सामाजिक रीतियों, राजनीतिक बयार पर कभी तीक्ष्ण तो कभी चुटकी भरी रचनाओं से मानस को झकझोर दिया।


अपने रजत पर्व से कदम आगे बढ़ाते हुए `दोपहर का सामना’ ने २७वें पड़ाव पर दस्तक दी है। इस अवसर पर देश के प्रतिनिधि कवियों का एक `काव्यकुंभ’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना से हुई, जिसका पाठ किया वीर रस की शीर्षस्थ कवयित्री कविता तिवारी ने। उनकी मधुर वाणी और शब्दावली पर अप्रतिम पक़ड़ से माता के वंदन ने मानो मां सरस्वती को साक्षात `काव्यकुंभ’ में विराजित कर दिया। इसके साथ ही कार्यक्रम की भव्य शुरुआत हुई। वर्तमान दौर कविताओं से भी अछूता नहीं रहा।

देश को पुलवामा आतंकी हमले का दर्द अब भी टीस रहा है। ऐसी स्थिति में कमलेश पांडेय `तरुण’ ने `काव्यकुंभ’ में कविताओं की शुरुआत करते हुए अपने शब्द डंकों से पाकिस्तान और आतंक की लंका जला दी। कमलेश पांडेय ने हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख श्री बालासाहेब ठाकरे के विचारों पर एक कविता प्रस्तुत की जो देश, हिंदू समाज, वंचितों की आवाज और उनके अधिकारों के लिए लड़ने की जिस आस्था के साथ सामाजिक कार्य और पत्रकारिता शुरू हुई थी, उसकी एक प्रतिनिधि थी। `काव्यकुंभ’ का रथ इसके बाद निकला लखनऊ से आई कवयित्री सरला शर्मा की तरफ। सरला शर्मा `अस्मां’ ने अपनी मधुर वाणी से वीर रस की कविताओं का पठन किया। एक के बाद एक वीर रस के कवियों की प्रस्तुति से हॉल में बैठे श्रोताओं में रोमांच चरम पर था। कई बार यह सिर्फ तालियों तक ही सीमित न रहकर `भारत माता की जय’ और `वंदेमातरम’ के जयघोषों में परिवर्तित हो जाता। कविताओं की यह यात्रा बढ़ी तो पैरोडी किंग सुदीप भोला ने मंच पर अपने सुंदर पैरोडी से राजनीति, देशप्रेम और समाज की छोटी-छोटी बातों पर कटाक्ष किया, जिससे हॉल में उपस्थित श्रोता रोमांच, हंसी-खिलखिलाहट से झूम उठे। इस बीच अगले कवि महेश दुबे को आमंत्रित किया गया। महेश दुबे ने भी देश प्रेम और परिवार के बीच अपनी कविताओं का ताना-बाना बुनते हुए कभी तालियों की गड़गड़ाहट से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया तो कभी मां की ममतामयी छाया और बुजुर्गों के सम्मान पर कविता के जरिए आंखों में अश्रु ला दिए। `काव्यकुंभ’ की इस सरिता के बीच `सामना’ के कार्यकारी संपादक, शिवसेना नेता-सांसद संजय राऊत का आगमन हुआ। मंच से संचालक सुरेश मिश्र ने स्वागत की घोषणा की और तालियों के बीच फिर `काव्यकुंभ’ आगे बढ़ा। इसके बाद इंदौर से आए कवि जानी बैरागी ने अपनी बेहद छोटी-छोटी लेकिन आम बातों से लोगों के दिलों को कुरेदना शुरू किया। जानी बैरागी ने हनुमान जी को उल्लेखित करके जो अपने छंद पेश किए वो वर्तमान परिप्रेक्ष्य को भी दर्शा रहे थे। उनकी सामयिक विषयों पर चुटकियों ने लोगों के दिलों को छुआ और कारवां भी आगे बढ़ता गया। इस बीच मंच पर वीर रस की शीर्षस्थ कवयित्री कविता तिवारी को आमंत्रित किया गया। कविता की प्रखर राष्ट्रभक्ति की कविताओं से माहौल एक बार फिर देश प्रेम की गंगा में गोते लगाने लगा। रात को करीब दस बज रहे थे लेकिन कवियों ने शब्दों का ऐसा जाल बुना था कि उससे निकलना संभव नहीं था। इसके बाद कवि सम्मेलन में घनश्याम अग्रवाल और उनके बाद राजस्थान से आए अब्दुल गफ्फार ने मंच संभाला। अब्दुल्ल गफ्फार की ऊर्जा और वीर रस की कविताओं के संगम में  हॉल लगातार तालियों से गूंजता रहा। रात को करीब साढ़े दस बज चुके थे। काव्यकुंभ अपने अंतिम पड़ाव पर था। इस कार्यक्रम में मंच संचालन कर रहे कवि सुरेश मिश्र ने पूरे कार्यक्रम के दौरान अपनी कविताओं से लोगों को ओतप्रोत किया। वे मुंबई के अंतर्मन को समझते हुए अपने चुटीले अंदाज में मंच को चार घंटे से ज्यादा समय तक `काव्यकुंभ’ की गंगा में लोगों को रसपान कराते रहे। इस कार्यक्रम का अंतिम पड़ाव था पर `दोपहर का सामना’ में एक नई ऊर्जा थी। अगले वर्ष फिर २३ फरवरी को अपने २८वें वर्ष में पदार्पण पर `काव्यकुंभ’ की सरिता से फिर श्रोताओं को सराबोर करने का…।

गौरवपूर्ण कर्तव्य  निर्वहन का गौरव पत्र
‘दोपहर का सामना’ की २६वीं वर्षगांठ पर शिवसेना नेता व `सामना’ के कार्यकारी संपादक संजय राऊत और ‘दोपहर का सामना’ के निवासी संपादक अनिल तिवारी को ‘राजस्थानी जनजागरण सेवा संस्था’ के अध्यक्ष गजेंद्र भंडारी द्वारा गौरव पत्र देकर सम्मानित किया गया। माणिक
ऑडिटोरियम में आयोजित ‘काव्यकुंभ’ के अवसर पर `उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ’ के अध्यक्ष हेमंत तिवारी, रविंद्र द्विवेदी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित थे।