राष्ट्रीय ध्वज फहराने जा रहे शिवसैनिकों को किया गिरफ्तार, वाह-रे-यूपी पुलिस

काशी के पंचगंगा घाट स्थित माधवराव धरहरा पर गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने जा रहे दर्जनों शिवसैनिकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
बता दें कि माधवराव का धरहरा काशी के अमूल्य धरोहरों में एक माना जाता है, इस प्रांगण में कभी बिंदु माधव का भव्य मंदिर हुआ करता था किंतु कालांतर में इस मंदिर को मुगल शासकों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था तभी से प्रांगण विवादित माना जाने लगा है। इस प्रांगण पर पिछले कई वर्षों से पूर्वांचल के फायर ब्रांड शिवसेना नेता अरुण पाठक द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रयास किया जाता है लेकिन उनके मंसूबे का हर बार यूपी पुलिस नाकाम कर देती है। यूपी में योगी सरकार बनने के बाद शिवसेना नेता अरुण पाठक को उम्मीद जगी थी कि अब इस धरहरा पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा सकेगा लेकिन हिदुत्व का दंभ भरनेवाली योगी सरकार इस मामले में पूर्व सरकार की ही भांति सख्त नजर आई। २६ जनवरी को बड़ी संख्या में शिवसैनिक अस्सी घाट पर इकट्ठा होकर अपने फायर ब्रांड नेता अरुण पाठक के नेतृत्व में जैसे पंचगंगा घाट के लिए हाथों में केशरिया ध्वज लेकर वंदेमातरम् व भारत माता की जय को गगन भेरी नारा लगाते हुए निकले थे, लगभग ५०० मीटर की दूरी पर मौजूद भारी पुलिस बल ने उन्हें भदैनी के पास रोक लिया लेकिन शिवसैनिक आगे बढ़ने की जिद पर अड़े रहे जिस पर पुलिस के साथ उनकी जबरदस्त धक्कामुकी हुई अंत में पुलिस शिवसेना नेता अरुण पाठक सहित दर्जनों शिवसैनिकों को गिरफ्ताए कर लिया गया। गिरफ्तार होनेवाले शिवसैनिको में राजकुमार सिंह, राजेश यादव, हरि नारायण, राकेश विश्वकर्मा, अमित उपाध्याय, राकेश, विपिन आदि शामिल थे। इस मौके पर शिवनेता अरुण पाठक ने कहा कि मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में स्थित माधवराव धरहरा पर राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा झंडा फहराने पर गिरफ्तार किया जाना अत्यंत दु:खद है। माधवराव धरहरा पर तिरंगा फहराने के जुर्म में सन् १९९५ और १९९७ में हमको जेल भी भेजा गया और उसके बाद निरंतर हर स्वंतत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय पर्वों पर हमें तिरंगा फहराने के जुर्म में गिरफ्तार किया जाता है। आजादी के ७१ साल बाद भी तिरंगा झंडा फहराने पर गिरफ्तार किया जाना गुलाम मानसिकता और तुष्टिकरण की राजनीति का परिचायक है।