राहुल को सुप्रीम कोर्ट का तो योगी, मायावती को आयोग का संवैधानिक सोंटा!

देश में चुनावी माहौल है और मतदाताओं को रिझाने के लिए राजनीतिक दलों के नेता कुछ भी बोल रहे हैं। यहां तक कि नियम-कानून और आचार-संहिता की भी उन्हें परवाह नहीं। देश में संविधान और संवैधानिक संस्थाएं सर्वोपरि हैं। मगर चुनावी होड़ में उन्हें भी नजरअंदाज किया जा रहा है और नेताओं की बदजुबानी बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में कल सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं अचानक सक्रिय हो उठीं। इसका शिकार बने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती। इन तीनों पर ही संवैधानिक सोंटा चला, जबकि सपा नेता आजम खान भी कतार में आ गए हैं।
राहुल गांधी ने चुनाव के दौरान भी ‘चौकीदार चोर है’ का राग छेड़ रखा है। गत सप्ताह जब कुछ नए दस्तावेजों के आधार पर जब सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन स्वीकार की तो राहुल गांधी ने कहा था कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया कि चौकीदार चोर है और उन्होंने अनिल अंबानी को ३०,००० करोड़ रुपए दिए हैं। इस मामले में कोर्ट की अवमानना के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया है, जिस पर अब राहुल को जवाब देना है।

कुछ देर से ही सही पर लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने अपने तेवर कड़े करने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत आचार संहिता के उल्लंघन मामले में आयोग ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती के चुनाव प्रचार करने पर पाबंदी लगा दी है। योगी पर यह पाबंदी ७२ घंटे के लिए है जबकि मायावती पर यह ४८ घंटे की है। ये रोक मंगलवार सुबह ६ बजे से शुरू होगी।
चुनाव आयोग का ये एक्शन काफी सख्त है। इस दौरान दोनों नेता कोई भी चुनावी रैली नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा न ही वे जनता के सामने वोट मांगने के लिए आ सकेंगे। इस रोक के तहत ये नेता कोई चुनावी सभा नहीं कर पाएंगे। कोई टीवी इंटरव्यू नहीं दे पाएंगे। कोई राजनीतिक ट्वीट नहीं कर पाएंगे। सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे और कोई रोड शो नहीं कर पाएंगे। बता दें कि दोनों ही नेता चुनावी रैलियों के अलावा सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहते हैं। योगी आदित्यनाथ तो भाजपा के स्टार प्रचारक हैं, जो यूपी के साथ-साथ पूरे देश में प्रचार कर रहे हैं। योगी न सिर्फ भाषण बल्कि ट्विटर के जरिए भी विपक्षियों पर वार कर रहे थे।

केरल के वायनाड में जब राहुल गांधी के रोड शो में मुस्लिम लीग के झंडे दिखाई दिए थे, तब योगी ने ट्विटर के जरिए ही मुस्लिम लीग के हरे झंडों को देश के लिए वायरस बताया था। बसपा प्रमुख मायावती भी अब सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं। मायावती भी चुनावी सभाओं के अलावा ट्विटर के जरिए केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधती हैं। मायावती के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहते हैं लेकिन अब अगले ७२ घंटे तक योगी आदित्यनाथ और ४८ घंटे तक मायावती चुनाव प्रचार नहीं कर पाएंगे।

ये थे नेताओं के बयान
बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के देवबंद में चुनावी सभा के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों से वोटों के लिए अपील की थी। मायावती ने अपने संबोधन में कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोग अपना वोट बंटने न दें और सिर्फ महागठबंधन के लिए वोट दें। मायावती का ये बयान धर्म के नाम पर वोट मांगने के नियम का उल्लंघन है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक संबोधन में मायावती पर हमला करते हुए कहा था कि अगर विपक्ष को अली पसंद है, तो हमें बजरंग बली पसंद हैं। दोनों नेताओं के इन बयानों पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया था और दोनों नेताओं को हिदायत दी थी।

चुनाव आयोग को लगी सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सोमवार सुबह ही सुप्रीम कोर्ट ने मायावती के देवबंद रैली में दिए गए भाषण पर आपत्ति जताई थी। अदालत की तरफ से चुनाव आयोग को फटकार लगाई गई थी कि आयोग ने अभी तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आयोग अभी तक सिर्फ नोटिस ही जारी कर रहा है, कोई सख्त एक्शन क्यों नहीं ले रहा है?

इससे पहले देवबंद की चुनावी जनसभा में उनके बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। इस बाबत शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को भी फटकार लगाई। मायावती ने देवबंद में अपने भाषण के दौरान मुस्लिम मतदाताओं को संदेश देते हुए कहा था कि कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं है, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडल में मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है, सभी जगहों पर गठबंधन और भाजपा के बीच ही लड़ाई है। भाजपा और कांग्रेस चाहती हैं कि मुस्लिम वोटों में बंटवारा हो जाए। इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों से केवल गठबंधन को वोट करने की अपील की थी।

मायावती के इस बयान को आपत्तिजनक मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई और पूछा कि उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है? देश की शीर्ष अदालत ने आयोग से यह पूछा कि कानून के मुताबिक वह मायावती के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकता है? इसके जवाब में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह मायावती के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है। मायावती के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए चुनाव आयोग से पूछा कि क्या उसे कोर्ट की शक्तियों के बारे में पता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग अब तक इस मामले में केवल एडवाइजरी और नोटिस जारी कर रहा है। नाराज कोर्ट ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही नहीं था। आगे सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आज मंगलवार को तलब किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक रैली में कहा था कि कांग्रेस और गठबंधन दलों के लिए अली हैं तो भाजपा के लिए बजरंग अली।

भाजपा ने भी की शिकायत
मायावती के बयान मामले में भाजपा ने भी चुनाव आयोग से शिकायत की है। भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर ने चुनाव आयोग में बसपा प्रमुख मायावती के देवबंद रैली में दिए गए बयान की शिकायत की। राठौर ने प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखित शिकायत में कहा है कि मायावती की ओर से मुसलमानों से एक राजनीतिक दल को वोट न देने की अपील करना धार्मिक उन्माद पैâलाने वाला है और निष्पक्ष चुनाव में बाधक और आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लघंन है। भाजपा ने मांग की कि चुनाव आयोग कार्रवाई करे ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के लगातार बढ़ रहे जहरीले बयानों पर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाई है। बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग ने इतना कठोर कदम उठाया हो। इसके पहले कई नेताओं पर आयोग चुनाव प्रचार पर रोक लगा चुका है।

आजम खान
अपने बयानों को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान पर भड़काऊ भाषण देने पर २०१४ में जनसभा, रोड शो और अन्य समारोह में भाग लेने पर रोक लगाई गई थी।

अमित शाह
इसी तरह चुनाव आयोग ने २०१४ में भड़काऊ भाषण देने के मामले में उस वक्त यूपी के भाजपा प्रभारी रहे अमित शाह के चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी थी। हालांकि, शाह के शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के वादे के बाद यह रोक हटा ली गई थी।

फिर घिरे आजम
समाजवादी पार्टी के दिग्गज और रामपुर से उम्मीदवार आजम खान के बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। भाजपा नेता जया प्रदा को लेकर उनके द्वारा की गई अमर्यादित टिप्पणी पर अब केस दर्ज हो गया है। आजम के बयान पर संज्ञान लेते हुए क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट ने उनके खिलाफ तहरीर दे मुकदमा दर्ज कराया। आजम खान के बयान की चारों तरफ भर्त्सना हो रही है। इस बीच चुनाव आयोग ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा अध्यक्ष मायावती के चुनाव प्रचार पर सीमित वक्त तक बैन लगा दिया है। इसके बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या आजम खान के खिलाफ भी चुनाव आयोग कोई बड़ा पैâसला लेता है या नहीं। आजम खान ने सारी हदों को लांघते हुए जयाप्रदा के खिलाफ बयान दिया, जो उनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी आजम खान को नोटिस भेजा है। राष्ट्रीय महिला आयोग चुनाव आयोग को भी चिट्ठी लिख उन पर कार्रवाई की अपील करेगा। महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए हैं।

राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ीं
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए दस्तावेजों के आधार पर राफेल डील पर पुनर्विचार याचिका स्वीकार किए जाने को ‘चौकीदार चोर है’ के रूप में पेश करने से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए २२ अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है। राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट के बयान को गलत तरह से पेश करने का आरोप है। भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने राहुल के खिलाफ आपराधिक अवमानना की याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा, ‘हम यह स्पष्ट करते हैं कि राहुल गांधी ने इस अदालत का नाम ले कर राफेल सौदे के बारे में मीडिया और जनता में जो कुछ कहा, उसे गलत तरीके से पेश किया। हम यह स्पष्ट करते हैं कि राफेल मामले में दस्तावेजों को स्वीकार करने के लिए उनकी वैधता पर सुनवाई करते हुए इस तरह की टिप्पणियां करने का मौका कभी नहीं आया।’
बता दें कि गत बुधवार (१० अप्रैल) को शीर्ष अदालत ने सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर नए दस्तावेज के आधार पर सुनवाई का पैâसला किया था। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली ३ सदस्यीय बेंच ने एक मत से दिए पैâसले में कहा था कि जो नए दस्तावेज डोमेन में आए हैं, उन आधारों पर मामले में रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई होगी। इसके बाद राहुल ने चैनलों से बातचीत करते हुए कहा था कि अब सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है कि चौकीदार चोर है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लीक दस्तावेजों के आधार पर रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई का विरोध किया था और कहा था कि ये दस्तावेज प्रिविलेज्ड (विशेषाधिकार वाला गोपनीय) दस्तावेज हैं और इस कारण रिव्यू पिटिशन खारिज किया जाना चाहिए।