" /> रिहाई!, सलाखों के पीछे छटपटा रहा है हत्यारा

रिहाई!, सलाखों के पीछे छटपटा रहा है हत्यारा

देश में हत्या, बलात्कार जैसे कई हाई-प्रोफाइल एवं सनसनीखेज मामले अब तक सामने आ चुके हैं। इन्हीं में एक था
मॉडल जेसिका लाल हत्याकांड। देश की न्याय व्यवस्था को झकझोरनेवाला तथा मीडिया ट्रायल के लिए मशहूर जेसिका लाल हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। मशहूर मॉडल जेसिका लाल की २९ अप्रैल, १९९९ की रात दिल्ली के टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी मनु शर्मा को बरी कर दिया था लेकिन मीडिया के हस्तक्षेप के कारण कोर्ट मनु शर्मा को दोषी मानने को मजबूर हुई। उम्र वैâद की सजा काट रहे जेसिका के हत्यारे सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा की जल्द रिहाई मामले की सुनवाई ७ सदस्यीय सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने पांचवीं बार स्थगित कर दी है। बोर्ड ने शर्मा के मामले को स्थगित करने का निर्णय लिया है क्योंकि ७ सदस्यों में से दो ने रिहाई की सिफारिश नहीं की थी।

अक्सर रसूखदार लोगों के खिलाफ पहले तो आपराधिक मामले दर्ज नहीं होते हैं और यदि दर्ज हो भी गए तो वे पैसे एवं पहुंच के बूते बाइज्जत बरी हो जाते हैं। रसूखदारों के प्रति आम लोगों के मन में हमेशा से यही धारणा रही है। पूरे देश को झकझोरनेवाले जेसिका लाल हत्याकांड में भी कुछ ऐसा ही दिखा था। मॉडल जेसिका लाल, दिल्ली में बीना रमानी द्वारा संचालित टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में काम करती थीं। २९ अप्रैल, १९९९ की रात उसी रेस्टोरेंट में जेसिका को एक सिरफिरे ने गोली मार दी थी क्योंकि बार का टाइम खत्म होने के कारण जेसिका ने उक्त सिरफिरे को शराब परोसने से मना कर दिया था। आनन-फानन में जेसिका को नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में ले जाया गया, वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। बाद में गोली मारनेवाले आरोपी की पहचान सिद्धार्थ वशिष्ठ उर्फ मनु शर्मा के रूप में हुई थी, जो कि हरियाणा के कद्दावर कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा का बेटा है। नतीजतन जेसिका लाल मर्डर केस में पीड़ित परिवार के लिए इंसाफ की राह आसान नहीं थी, ये तो पहले ही तय हो गया था।
मनु शर्मा की टाटा सफारी को दिल्ली पुलिस ने यूपी के नोएडा से बरामद किया था। ६ मई,१९९९ को मनु ने चंडीगढ़ की एक अदालत के सामने सरेंडर किया था। पुलिस ने ३ अगस्त, १९९९ को कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दायर किया। ७ साल तक मुकदमा चला। इस दौरान गवाहों को धमकाकर या लालच देकर तोड़ लिया गया। ७ साल तक चले मुकदमे के बाद फरवरी, २००६ में निचली अदालत ने सभी आरोपियों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
आरोपियों के बरी होने के बाद भी जेसिका का परिवार निराश नहीं हुआ। उसकी बहन ने नए सिरे से इस केस में जान फूंकने की कोशिश की। यह मामला मीडिया में उछला। उसके बाद तो जेसिका लाल मर्डर केस में इंसाफ के लिए दिल्ली क्या पूरा देश एक साथ आ गया और इस केस को दोबारा खोलना पड़ा। फास्टट्रैक कोर्ट में केस की सुनवाई हुई। खंडपीठ ने अपने २५० पृष्ठ के फैसले में कहा है कि मनु शर्मा ने अपनी सफारी कार की चोरी होने की प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराई। जो उसके दोषी होने के संदेह को और पुख्ता करता है। न्यायालय ने रमानी को इस हत्याकांड का चश्मदीद गवाह माना था, उन्हीं की गवाही के आधार पर कोर्ट ने १८ दिसंबर, २००६ को मनु शर्मा, विकास यादव और अमरदीप सिंह गिल उर्फ टोनी को दोषी करार दिया जबकि आलोक खन्ना, विकास गिल, हरविंदर सिंह चोपड़ा, राजा चोपड़ा, श्याम सुंदर शर्मा और योगराज सिंह को बरी कर दिया। २० दिसंबर, २००६ को कोर्ट ने मनु शर्मा को उम्र वैâद की सजा सुनाई और ५० हजार रुपए का जुर्माना लगाया, वहीं सह अभियुक्त अमरदीप सिंह गिल और विकास यादव को चार साल की जेल की सजा और तीन हजार का जुर्माना की सजा मिली। उच्च न्यायालय के पैâसले के खिलाफ मनु शर्मा ने २ फरवरी, २००७ को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन १९ अप्रैल, २०१० को सर्वोच्च न्यायालय ने मनु शर्मा की उम्र वैâद की सजा को बरकरार रखा। जेसिका लाल मर्डर केस से प्रभावित होकर फिल्म ‘नो वन किल्ड जेसिका’ और ‘हल्ला बोल’ नामक दो फिल्में हैं। वैसे तो राजनीतिक रसूख की वजह से मनु शर्मा समय-समय पर जेल से बाहर आता रहा है लेकिन स्थाई रिहाई के लिए वह लंबे अर्से से फड़फड़ा रहा है।