रु. १० हजार लाओ तंदुरुस्त हो जाओ बीमा पॉलिसी का बड़ा झोल

अपने निधन के बाद बच्चों एवं परिवार का भविष्य सुरक्षित रखने के मकसद से लोग जीवन बीमा करवाते हैं। बीमा पॉलिसी के लिए बीमा कंपनी, बीमाधारकों से कुछ राशि लेती है, जो कि बीमाधारक को किस्तों में या फिर एकमुश्त जमा करनी होती है। पॉलिसी खरीदने की इच्छा रखनेवाले इच्छुक बीमार उपभोक्ताओं की बीमा कंपनी अपने यहां पंजीकृत डॉक्टरों से जांच करवाती है तथा अपने डॉक्टरों द्वारा दी गई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आवेदन रद्द करने या फिर अतिरिक्त शुल्क लेकर पॉलिसी जारी करने का निर्णय लेती है लेकिन एलआईसी में पंजीकृत कुछ डॉक्टर चंद रुपए के लालच में बीमा पॉलिसी के इच्छुक अति गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र देकर एलआईसी को चूना लगाने में मदद करते हैं। गोरखधंधे में शामिल ऐसे ही एक डॉक्टर और उसके सहयोगी को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की यूनिट-८ ने गिरफ्तार किया है, जो कि ८ से १० हजार रुपए लेकर गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को स्वस्थ (तंदुरुस्त) होने का प्रमाणपत्र देते थे।
बता दें कि बीमा के लिए फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्र का गोरखधंधा करनेवाले डॉक्टर के बारे में यूनिट-८ के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अरुण पोखरकर को जानकारी मिली थी। पोखरकर के मार्गदर्शन तथा पीआई महेश तोगदवाड के नेतृत्व में पीएसआई लक्ष्मण वडरे, हिंदुराव चिंचोलिकर की टीम ने सांताक्रुज-पूर्व के दत्तमंदिर रोड स्थित दत्तात्रय नर्सिंग होम में छापेमारी की। छापेमारी में टीम ने डॉक्टर राकेश कुमार दुग्गल और उसके सहयोगी किशोर सकपाल को फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों पर मुहर लगाते समय रंगेहाथों दबोच लिया। पुलिस को नर्सिंग होम के कंप्यूटर में बीमा पॉलिसी धारक ११ बीमारों का विवरण मिला साथ ही बीमा कंपनी में पंजीकृत १४ डॉक्टरों की जानकारी और मुहर भी मिली। यूनिट ८ की टीम आरोपियों के कंप्यूटर में उपलब्ध जानकारी की मदद से आगे की जांच में जुटी है।