रु. ३ से बुझा रहे हैं रोजाना एक सूखा पीड़ित की प्यास, मुंबई के एनजीओ का संकल्प

महाराष्ट्र में सूखे का संकट अब गहराता जा रहा है। सरकार सूखा पीड़ितों तक हर मुमकिन मदद पहुंचा रही है, वहीं दूसरी ओर मुंबई की एक सामाजिक संस्था (एनजीओ) `उत्कर्ष’ द्वारा दान में मिले ३ रुपए से रोजाना एक सूखा पीड़ित की प्यास बुझ रही है। इतना ही नहीं वर्तमान में रोजाना उक्त संस्था ने ५ गांव के १२ हजार ६०० सूखाग्रस्त लोगों का प्यास बुझाने का संकल्प लिया है।
बता दें कि मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखा पीड़ितों व उनके जानवरों के लिए पानी के बिना एक-एक दिन गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में मुंबई के एनजीओ `उत्कर्ष’ ने बीड जिले के ५ गांव को गोद लिया है। `उत्कर्ष’ के अध्यक्ष डी. आर. लोंढे ने बताया कि एक व्यक्ति की प्यास बुझाने के लिए प्रत्येक दिन २० लीटर पानी की बात सरकार ने कही है। हमें एक लीटर पानी ०.१५ पैसे में मिल रहा है यानी ३ रुपए में एक आदमी की प्यास बुझाई जा सकती है। इसलिए हम चंदा इक्ट्ठा कर रहे हैं। एक गांव में प्रत्येक दिन ५० हजार लीटर पानी की आवश्यकता है। एक गांव के पीछे रोजाना ७ हजार ५०० रुपए खर्च करने पड़ते हैं। ५ गांव के लिए रोजाना लगभग ५ लाख लीटर पानी की जरूरत को हम पूरा करेंगे, जिसमें से एक लाख लीटर पानी पशुओं और प्राणियों के लिए रखा जाएगा। कुल ५ गांव में १२,६०० सूखा पीड़ितों और प्राणियों को मई महीने के अंत तक निरंतर पीने का पानी देने का हमारा उद्देश्य है।