" /> रूस के विपक्षी नेता को मारने की साजिश

रूस के विपक्षी नेता को मारने की साजिश

रूस के पास सबसे घातक नर्व है। यह एक जहर है जिससे दुश्मनों को बड़ी सफाई से को मारा जाता है। रूस के विपक्षी नेता एलेक्‍सी नवलेनी को यही जहर दिया गया है। उनका बर्लिन के अस्‍पताल में इलाज चल रहा है। जांच के दौरान उनके शरीर से जहरीले रसायन या पदार्थ मिलने की पुष्टि भी डॉक्‍टरों की तरफ से की गई है।
डॉक्‍टरों को शक है कि उन्‍हें मारने के लिए नर्व एजेंट दिया गया था। एलेक्‍सी फिलहाल आईसीयू में कोमा में हैं। इस बीच उन्‍हें जहर देकर मारने के कोशिश की जांच कराने की जर्मनी की अपील को रूस खारिज कर चुका है। जहां तक नर्व एजेंट की बात है तो आपको बता दें कि इससे पहले भी रूस के विरोधियों को इस तरह से मारने की कोशिश की जा चुकी है।
नर्व एजेंट दरअसल, एक बेहद खतरनाक जहरीला केमिकल होता है, जिससे हमारे शरीर का नर्वस सिस्टम काम करना बंद कर देता है और इसकी वजह से दिमाग को संकेत मिलने बंद हो जाते हैं। इसका सबसे पहला असर शरीर के अंदर मौजूद मसल्‍स पर पड़ता है और वो बेकार हो जाती हैं। नर्व एजेंट को बारीक पाउडर के रूप में या फिर गैस या लिक्विड के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि इसमें किसी तरह की गंध नहीं होती है और न ही इसका कोई ऐसा रंग होता है।
ये जल्‍द ही भाप बन जाता है। इसलिए इसका पता लगाना भी मुश्किल होता है। भाप के जरिए ये सांस की नली के रास्‍ते बड़ी तेजी से शरीर के अंदर पहुंचता है और अपना काम करना शुरू कर देता है। इसको खाने में या किसी ड्रिंक में मिला कर देने से इसका असर धीरे-धीरे होता है। इसके संपर्क में आने पर व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उसकी आंखों की पुतलियां सफेद हो जाती हैं, हाथ-पैर चलना बंद कर देते हैं और व्यक्ति कोमा में पहुंच जाता है। ज्‍यादातर मामलों में देरी होने की वजह से व्‍यक्ति की मौत भी हो जाती है। नर्व एजेंट को सामान्‍यतौर पर जी, वी और नोविचोक में बांटा गया है। इसकी शुरुआत १९३० के दशक में हुई थी जो एक गलत रिसर्च का नतीजा भी थी। बाद में जर्मन सेना को मिल गया था। १९३६ में पहली बार जर्मनी जी एजेंट तैयार किया। इसमें जी मतलब जर्मनी था। इसके बाद सरीन गैस (जीबी), जीडी और जीएफ तैयार किए गए। दूसरे विश्व युद्ध के बाद रूस, अमेरिका और ब्रिटेन ने भी नर्व एजेंट बनाना शुरू किया।