" /> रेलवे परिसर और ट्रेनों में १६५ महिलाओं से रेप!, तीन वर्षों में ५४२ लोगों की हत्या

रेलवे परिसर और ट्रेनों में १६५ महिलाओं से रेप!, तीन वर्षों में ५४२ लोगों की हत्या

देश में क्या महिलाओं के लिए कोई स्थान सुरक्षित नहीं? सुनसान सड़कों की तो बात छोड़िए भीड़भाड़वाली ट्रेनों और रेलवे परिसर में रेप की वारदातों की संख्या शर्मसार करनेवाली है। महज २ सालों में ट्रेनों और रेलवे परिसर में रेप के १६५ मामले सामने आए हैं। सूचना के अधिकार के तहत ट्रेनों और रेलवे परिसर में हुए अपराध के आंकड़े चौंकानेवाले हैं। महज तीन साल में ४,७१८ मामले लूट के सामने आए तो ५४२ लोगों की हत्या कर दी गई।
आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ की ओर से दायर आवेदन के जवाब में बताया गया है कि २०१७-२०१९ के बीच रेप की १३६ वारदातों को रेलवे परिसर में अंजाम दिया गया, जबकि २९ महिलाओं के संग घिनौना अपराध चलती ट्रेन में हुआ। २०१७ में सामने आए ५१ केसों के मुकाबले २०१९ में कुछ कम ४४ मामले सामने आए, जबकि २०१८ में ७० महिलाओं के संग इस तरह की वारदात रेलवे परिसर में हुई। पिछले साल सामने आए ४४ केसों में ३६ रेलवे परिसर में हुए तो ८ के संग वारदात ट्रेनों के अंदर हुई। २०१८ में आए ७० केसों में ५९ रेलवे परिसर में हुए तो ११ ट्रेनों के अंदर। २०१७ में ५१ महिलाओं संग यह अपराध हुआ, जिसमें ४१ को रेलवे परिसर में शिकार बनाया गया और १० महिलाओं संग चलती ट्रेनों में अपराध हुआ। इसी अवधि में रेप के अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध के १,६७२ केस दर्ज हुए। इनमें से ८०२ रेलवे परिसर में हुए तो ८७० महिलाओं के खिलाफ चलती ट्रेन में अपराध के मामले आए।

रेलवे ने उठाए सुरक्षा के कदम
रेलवे ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए हैं। पिछले महीने एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री ने राज्य सभा में बताया था कि चिह्नित रूट्स और सेक्शन में २,२०० ट्रेनों में आरपीएफ सुरक्षा दे रही है, जबकि २,२०० ट्रेनों में जीआरपी सुरक्षा मुहैया करा रही है। सिक्योरिटी हेल्पलाइन १८२ जारी किया गया है।

३ वर्षों में ७७१ अपहरण
तीन साल में ७७१ केस अपहरण के दर्ज हुए, जबकि ४,७१८ मामले लूट के हुए। २१३ केस हत्या की कोशिश के हुए हैं तो ५४२ लोगों की हत्या कर दी गई। रेलवे में कानून व्यवस्था राज्य सरकारों का मामला है। ट्रेन परिसरों के साथ चलती ट्रेनों में अपराध को रोकना, मामले दर्ज करना, जांच और कानून व्यवस्था कायम करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।