" /> रेल किराए पर नहीं बनी, बात कैसे जाएंगे मजदूर मुलुक?

रेल किराए पर नहीं बनी, बात कैसे जाएंगे मजदूर मुलुक?

राज्य सरकार और रेलवे के बीच स्पष्ट नहीं हुआ मामला
मजदूरों को गांव भेजने के मामले में सोमवार को राज्य सरकार और रेल अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कोई ठोस बात सामने नहीं आई है। सूत्रों की माने तो रेलवे ने स्पष्ट किया है कि अभी तक हमारे पास किसी तरह का आदेश नहीं आया है। ऐसे में अगर राज्य सरकार चाहती है कि रेलवे ट्रेन चलाए, तो उसे टिकट खरीदने होंगे। वहीं राज्य सरकार कह रही है कि रेलवे को इस आपदा में पैसे लेने की बजाए लोगों को फ्री में गांव पहुंचाना चाहिए। बैठक में यह भी तय किया गया कि बीएमसी के डॉक्टरों को जगह-जगह मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए बैठाया जाएगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोगों के लिए ट्रेन का सफर फ्री करने का अनुरोध किया था। इसके बाद सोमवार सुबह बीजेपी के नेता मणिशंकर अययर ने ट्विट करते हुए यह जानकारी दी कि सभी मजदूरों को फ्री में घर भेजा जाएगा। इसके लिए रेल किराए का 85 प्रतिशत केंद्र सरकार और 15 प्रतिशत राज्य सरकार भरेगी। सोमवार को मजदूरों को गांव भेजने को लेकर रेलवे अधिकारियों और राज्य के मंत्रियों के बीच वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग में एक बैठक हुई। इसमें राज्य सरकार ने लोगों को फ्री में ले जाने की बता की। वहीं केंद्र सरकार के अंतर्गत चलनेवाली रेल के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से हाथ झटकते हुए साफ कहा कि अभी तक हमें रेलवे बोर्ड से कोई आदेश नहीं आया है, ऐसे में अगर अभी ट्रेन चलानी होगी तो राज्य सरकार को टिकट खरीदने होंगे। अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि हम लोगों को उनके गांव भेजना चाहते हैं। पर उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सरकार कह रही है कि जिन लोगों को भेजा जा रहा है, उनका कोविड टेस्ट करने के बाद ही भेजा जाए। अभी तक देश भर में स्क्रीनिंग करते हुए ही लोगों को भेजा जा रहा है। मुंबई से लाखों लोग जाना चाहते हैं, ऐसे में इतने लोगों का कोविड टेस्ट कराना तो असंभव जैसा ही है।