रोड से ज्यादा पटरियों पर रक्त

सड़क और रेल मार्ग, परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जानेवाले २ सर्वाधिक सुलभ और प्रमुख साधन हैं। किसी भी शहर या गांव के विकास में सड़कों एवं रेलवे का बहुत बड़ा योगदान होता है लेकिन उस विकास की कीमत वहां रहनेवाले लोगों को चुकानी पड़ती है। जैसा कि मुंबई के मामले में देखने को मिला है। सरकारी वेबसाइट ैैै.ेप्द्प्.ुदन्.ग्ह के अनुसार पिछले ५ वर्षों में १५,८५४ लोगों की मौत लोकल ट्रेनों में सफर के दौरान विभिन्न रेल हादसों में हुई है, तो वहीं मुंबई ट्रैफिक पुलिस द्वारा आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को दी गई जानकारी के अनुसार रोड पर हुए हादसों में २,७३६ लोगों ने अपनी जान गंवाई है। बात जख्मियों की करें तो इसी कालावधि में रेलवे में सफर के दौरान १६,५७९ लोग घायल हुए हैं जबकि सड़कों पर १८,०२९ लोग घायल हुए हैं। अर्थात रोड पर कुल २०,७६५ लोगों की तुलना में पटरियों पर ३२,४३३ लोगों का रक्त बहा है।

हादसाग्रस्त हुए ५०हजार मुंबईकर
मुंबई में पिछले ५ वर्षों में रेल और सड़क हादसों में ५० हजार से ज्यादा मुंबईकर सड़क एवं उपनगरीय ट्रेनों में सफर के दौरान हादसों का शिकार हुए हैं, जिनमें रेल हादसों में १५,८५४ तथा सड़क हादसों में २,७३६ लोग अकाल काल का ग्रास बने हैं। ये सभी लोग अपनी ही गलतियों का शिकार बने थे। मसलन सड़क पर चलते समय, सड़क पार करते समय लापरवाही, हेलमेट या सीट बेल्ट के बगैर तथा तेज रफ्तार से वाहन चलाना, ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन रोड पर हुए हादसों की मुख्य वजह रहा है। जबकि चलती ट्रेन के पायदान पर खड़े होकर सफर करना, दरवाजे के बाहर लटकना, चलती ट्रेन में चढ़ना-उतरना तथा पटरी पार करना रेल हादसों की प्रमुख वजह रहा।

आंकड़े बताते हैं असालियत
सरकारी वेबसाइटwww.shodh.gov.in के अनुसार मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में सफर के दौरान वर्ष २०१४ में ३,४२९, २०१५ में ३,२०८, २०१६ में ३,२०८, २०१७ में ३,०१६ तथा २०१८ में २,९९३ यात्रियों ने अपनी जान गंवाई है, जिनमें १६,०४५ पुरुष तथा १,७९९ महिलाएं शामिल थीं। इसी कालावधि में १६,५७९ यात्री रेल हादसों में जख्मी भी हुए थे। दूसरी ओर शकील अहमद शेख को मुंबई ट्रैफिक पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार १ जनवरी, २०१४ से ३१ दिसंबर, २०१८ के बीच २,७३६ लोगों की जान सड़क हादसों में गई और १८,०२९ लोग घायल हुए। मरनेवालों में २,२८४ पुरुष जबकि ४५२ महिलाएं शामिल रहीं, वहीं घायलों में १४,१५० पुरुषों तथा ३,८७९ महिलाओं का समावेश है। सड़क हादसों में सर्वाधिक ६११ लोगों की मौत वर्ष २०१५ में हुई थी। जबकि २०१४ में ५९८, २०१६ में ५६२, २०१७ में ४९० और २०१८ में ४७५ लोगों की मौत सड़कों पर हादसों में हुई थी।