लघुमालिनी बसंत खाएं डेंगू बुखार भगाएं

 

मेरी उम्र १७ वर्ष, लंबाई ५ फीट व वजन ४४ किलो है। शाम होते-होते मेरे पैरों के तलवे व पैरों में असहनीय पीड़ा होती है। मैं बेहद थक जाती हूं और कुछ भी काम करने की शक्ति मुझमें नहीं रह जाती। कृपया दवा बताएं?
– परमजीत कौर, सायन कोलीवाड़ा
पत्र के वर्णन से लग रहा है कि आपकी हाइट कम होने की वजह से शायद आप ऊंची एड़ी के सैंडल पहनती होंगी। प्राय: कॉलेज छात्राओं में हाई हिल फुटवियर पहनना आम बात है। ऊंची एड़ी के फुटवियर पहनने से घुटने के पास स्थित मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ता है। यह दबाव लगातार पड़ने से मांसपेशियों व हड्डियों पर जोर पड़ता है जिससे वहां पर सूजन जैसी स्थिति हो जाती है। सुंदरता की दृष्टि से पेंसिल हिल व प्लेटफॉर्म हिल दोनों ही मोहक लगती हैं। परंतु यह रोग उत्पादक कारणों में से एक है इसलिए इसका उपयोग न करें। रोज गरम पानी कर टब या बाल्टी में डालकर अपने पैरों को गर्म पानी से १० या १५ मिनट तक सेकें। लाक्षादि गुगुलु व पुर्ननवादि गुगुलु की दो-दो गोलियां दिन में दो बार लें। शतावरी चूर्ण एक-एक चम्मच दो बार लें। नवायस लौह की दो-दो गोलियां दो बार लें। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में फास्ट फूड, वड़ा-पाव, चायनीज भेल, चायनीज फूड, बर्गर पिज्जा, प्रâेंकी आदि खाने का काफी प्रचलन है। इसके कारण शरीर को उपयोगी आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। शरीर का पोषण नहीं हो पाता है। अत: शरीर को चुस्त रखने के लिए ज्यादा-से-ज्यादा हरी सब्जियां, फल, दूध, घी आदि को भोजन में समाविष्ट करना व नियमित सेवन करना चाहिए। अंकुरित धान्य, खजूर आदि का भोजन में समावेश करें।

मुझे पूरे शरीर में खुजली होती है। खुजलाने के बाद वहां की चमड़ी लाल हो जाती और जलन बढ़ जाती है। छोटी-छोटी फुंसी होकर दरोरा पड़ जाता है। शरीर में पित्त बढ़ जाता है। कृपया देशी उपचार बताएं। बहुत सारी एलर्जी की गोलियां और टैबलेट्स खा-खाकर मैं थक गया हूं। जड़तोड़ उपचार कर मुझे मुक्त कराओ।
– मानस व्यास, जोगेश्वरी
हल्के गर्म पानी से नित्य नहाएं। साबुन या अन्य केमिकल सोप का उपयोग न करें। चने की दाल का आटा या मसूर के दाल के आटे का उपयोग साबुन के बदले करें। इस आटे को दूध या पानी में मिलाकर पेस्ट की तरह बनाकर त्वचा पर रगड़कर शरीर साफ करें। नाखून छोटे रखें। अन्यथा खुजली करते समय आप अपने नाखूनों से ही स्वत: को खरोंच सकते हैं। सूती कपड़े पहनें। विशेषत: अंडरगारमेंट सूती ही पहनें। खाने में मांसाहार, चायनीज फूड, फास्ट फूड, जंक फूड, अंडा, पिज्जा, केक, काजू, सींगदाना, पनीर, मशरूम, दही आदि बंद कर दें। सादा व शाकाहारी खाना खाएं तो बेहतर रहेगा। कामदुधारस व सूतशेखर रस की दो-दो गोलियां दिन में ३ बार लें। हरिद्राखंड योग एक-एक चम्मच दो बार लें। रात को सोते समय त्रिफला चूर्ण एक चम्मच लें। त्रिफला बहुउपयोगी दवा है। पेट साफ रहना चाहिए। शरीर पर कपूर मिश्रित शुद्ध नारियल का तेल लगाएं। प्रत्येक तीन मास के अंतराल पर सिंगल डोज की कृमि नष्ट करनेवाली दवा लें। पित्त की तकलीफ ज्यादा हो तो आप अविपत्तिकर चूर्ण एक-एक चम्मच दो बार लें। साथ ही साथ मूनिम्बादि क्वाथ तीन-तीन चम्मच दो बार लें। शरीर शुद्धि के लिए पंचकर्म उपयोगी है। वमन और विरेचन करवाकर शरीर को शुद्ध कराएं। शोधन चिकित्सा के बाद व्याधि बार-बार नहीं होती।

मैं ३२ वर्षीय युवक हूं। सेल्समैन का काम करता हूं। कामकाज व यात्रा के दौरान मूत्र विसर्जन या मल त्याग करने के लिए सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करता हूं। अपने यहां के सार्वजनिक शौचालय बहुत ही गंदे रहते हैं। मुझे गुदा प्रदेश व जांघ में खुजली होती है। कभी-कभी फुंसियां भी निकल आती हैं। मुझे लग रहा है कि मुझे सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करने से गुप्त रोग हो गया है। मैं काफी परेशान व चिंतित हूं।
– रौनक गुप्ता, सानपाड़ा
बिल्कुल नहीं। गुप्त रोग अर्थात सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज एवं उसका संक्रमण असुरक्षित शारीरिक संभोग व शारीरिक संपर्क में आने से पैâलता है या तो त्वचा के संपर्क में आने से या फिर शरीर से निकलनेवाले स्राव के संपर्क में आने से। शरीर के गुप्त प्रदेश में रोग होने का मतलब ये नहीं कि वो गुप्त रोग है। जानकारी के अभाव व गलतफहमी के कारण लोग इसे गुप्त रोग समझते हैं। गलत भ्रांतियों के कारण लोग सार्वजनिक शौचालय के उपयोग को गुप्त रोग का जनक मान लेते हैं, जो कि गलत है। हां, यह बात सच है कि साफ-सफाई व उचित निरीक्षण न होने के कारण सार्वजनिक शौचालयों की हालत खराब है। इसी के चलते बहुतांश लोग खुली जगह में जाकर मल-मूत्र का त्याग करते हैं जो कि और ज्यादा हानिकारक है। आपके कामकाज के चलते आप दिन भर घूमते हैं। बगल (कांख), जांघ, अंडकोष प्रदेश, गुप्त प्रदेश के आसपास पसीना, गंदगी व स्वच्छता के अभाव में फंगल इंफेक्शन होता है, जिसके कारण खुजली व फुंसियां होती हैं। यह एक साध्य बीमारी है। इन जगहों पर नीम तेल दिन में एक बार लगाएं। अंडरगारमेंट सूती कपड़े के व ढीले-ढाले हों। आरोग्यवर्धनी वटी तथा गंधक रसायन की दो-दो गोली तीन बार गरम पानी से लें। मंजिष्ठादि क्वाथ ६-६ चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद लें। इमली, दही व खट्टी चीजों का त्याग करें और गीले कपड़े न पहनें।

मेरे पिताजी की उम्र ६५ वर्ष की है। उन्हें ब्लड प्रेशर व पारकिंसन की बीमारी है। एक महीने पहले उन्हें डेंगू हुआ था। छह दिनों तक वे अस्पताल में एडमिट थे। परंतु अब वे बहुत कमजोर हो गए हैं। चेहरे की ताजगी कम हो गई है। अब बुखार नहीं है परंतु अब उनकी खाने-पीने की रुचि कम होने के साथ ही चलना-फिरना कम हो गया है। बीपी व पारकिंसन की दवा शुरू है। कोई देसी दवा बताएं ताकि उनकी कमजोरी दूर होकर वे तरोताजा हो जाएं।
– कुंजबिहारी, जोगेश्वरी
बुखार के बाद शरीर में कमजोरी प्राय: देखने को मिलती है। बढ़ती उम्र, वार्धक्य में यह ज्यादा महसूस की जाती है। कई बार वार्धक्य, अकेलापन, रिटायर्ड लाइफ आदि के कारण मनोबल कम होने पर शारीरिक थकान के साथ ही मानसिक थकान ज्यादा ही बढ़ जाती है। आप पिताजी की बीपी व पार्विंâसन की दवा नियमित वैद्यकीय निरीक्षण के अंतर्गत दें। ज्वर पश्चात कमजोरी को दूर करने के लिए आहार-विहार में बदलाव करें। द्रव आहार बार-बार दिन में ५ से ६ बार दें। खाना थोड़ा-थोड़ा कर बार-बार तीन से चार बार दें। लघुमालिनी बसंत की दो-दो गोली, गुडुची घन की एक-एक गोली दिन में दो बार गर्म पानी के साथ दें। रसायन चूर्ण एक-एक चम्मच दो बार गर्म पानी से लें। अमृतारिष्ट ६-६ चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद लें। खाने में फल व हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं। नियमित एक गिलास गाय का दूध पीएं। अकेलापन कम करने व मनोबल बढ़ाने और साथ ही साथ सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए आध्यात्मिक जीवन शैली अपनाएं तथा गर्म पानी ही पीएं।