लपेट रहा है लेप्टो, अब तक ६ की मौत, बुखार है तो दो लेप्टो का डोज

मुंबईकरों के लिए इस बार का मॉनसून परेशानियों भरा रहा। बारिश के चलते कई बार शहर लगभग थम गया तो जलजमाव के कारण लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियों को बल मिल गया है। लेप्टो के चलते मॉनसून भर में ६ लोगों की मौत हो गई जबकि सैकड़ों लोगों को अस्पताल में कई दिन गुजारने पड़े। लेप्टो के मामलों को देखते हुए मनपा प्रशासन ने भी सभी निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को बुखार के लिए लेप्टो का डोज देने का दिशा निर्देश दिया है।
बता दें कि चौपाया जानवर यानी चूहा, कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैंस आदि के मलमूत्र से लेप्टो बीमारी पैâलती है। यदि उनका मलमूत्र पानी में मिल जाए और जब कोई व्यक्ति उस दूषित पानी से गुजरता है तो उसे लेप्टो होने की संभावना अधिक होती है। जून से लेकर अब तक लेप्टो के चलते ६ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है जिनमें से २ लोगों की मौत इसी १५ दिन के भीतर हुई है। अब तक लेप्टो से १२८ लोग ग्रसित हो चुके हैं। हालांकि गत वर्ष की तुलना में मौत और मामले दोनों के ही आंकड़े कम हैं। गत वर्ष मॉनसून में १७९ लेप्टो से ग्रसित हुए थे जबकि १० लोगों की मौत हुई थी।
मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मजा केसकर ने बताया कि हमने मनपा अस्पतालों और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को यह निर्देश दिया है कि यदि उनके पास बुखार की शिकायत लेकर भी कोई मरीज आता है तो उसे तुरंत लेप्टो की खुराक यानी डॉक्सीसाइक्लिन का डोज दिया जाए। रिपोर्ट का इंतजार न करें क्योंकि लेप्टो के इलाज में देरी से व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। हैरान करनेवाली बात यह है कि स्वाइन फ्लू के मामले अब भी सामने आ रहे हैं। सितंबर महीने में ही उक्त बीमारी के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई है।

डाउटफुल डेंगू
मनपा द्वारा जारी किए गए मॉनसूनी बीमारी के आंकड़ों पर गौर करें तो महज १५ दिन में डाउटफुल डेंगू के १,५३६ मामले सामने आए हैं जबकि १०४ लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। मनपा के एक डॉक्टर की मानें तो उक्त बीमार हुए व्यक्ति की बीमारी के लक्षण डेंगू जैसे होते हैं। रैपिड टेस्ट में ये लोग पॉजिटिव आते हैं और फिर इनकी गहन जांच की जाती है।