लहराएगा भगवा का परचम, पालघर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र

१९ फरवरी २००८ को अस्तित्व में आई पालघर लोकसभा सीट को पहले डहाणू लोकसभा सीट के रूप में जाना जाता था। मुंबई से मात्र ८७ किलोमीटर दूर बसा महाराष्ट्र का ३६वां जिला पालघर को सरकार ने ठाणे जिला से निकालकर अलग जिला घोषित किया। २,०६३ वर्ग मील में पैâला पालघर जिला में ८ तालुका हैं, जिनमें वसई, वाड़ा, जव्हार, मोखड़ा, पालघर, डहाणू, तलासरी और विक्रमगढ़ का समावेश है। कोकण डिविजन में आनेवाले पालघर की कुल आबादी तकरीबन २८ लाख ९८ हजार ९८९ है, जिनमें ५४ फीसदी लोग शहरों में और ४६ फीसदी लोग गांवों में रहते हैं। जमीन से जुड़ा हर आदमी यहां लोकसभा सीट का पैâसला करता है। यह भी सच है कि इस सीट को पहले कांग्रेस के गढ़ के रूप में जाना जाता था लेकिन अब यहां कांग्रेस न के बराबर है। इस सीट पर एक बार सीपीएम और कालांतर में भाजपा अपना कब्जा जमा चुकी है।

डहाणू लोकसभा सीट का इतिहास
पालघर लोकसभा बनने से पहले जब यह ठाणे की डहाणू लोकसभा सीट थी, तब १९६७ में जव्हार आदिवासी घराने के राजा यशवंत राव मुकुनै कांग्रेस से २ बार जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। १९७७ में पहली बार सीपीआई (एम) के शिवदेव कोम ने इस सीट पर कब्जा जमाया। १९८० के चुनाव में दामोदर शिंंगड़ा ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया। इनकी जीत का सिलसिला लगातार ४ बार रहा। १९९६ में पहली बार भाजपा ने डहाणू लोकसभा की इस सीट से अपना सांसद लोकसभा भेजा, इसमें विशेष रूप से वनवासी कल्याण आश्रम, अन्य शिक्षा, सेवा कार्य के कारण भाजपा ने एडवोकेट चिंतामणि वनगा को जिताकर लोकसभा में भेजा। २००९ में इस सीट पर फिर बदलाव हुआ और इस सीट से बहुजन विकास अघाड़ी के बलिराम जाधव विजयी हुए। बलिराम जाधव से एडवोकेट वनगा १२,३६० वोटों से हार गए थे। उसके बाद २०१४ में एड. चिंतामणि वनगा २ लाख ३९,५२० वोट से जीत कर आए। २०१८ में जब एड. चिंतामणि वनगा की अचानक मौत हो गई, तब इस सीट पर २०१८ में उप चुनाव हुआ और पहली बार इस सीट पर शिवसेना का अपना उम्मीदवार खड़ा हुआ जो कि मात्र २९,५७२ वोटों से भाजपा के उम्मीदवार से पीछे रहा। भाजपा से राजेंद्र गावित सांसद बने थे।

शिवसेना को रोक पाना असंभव  
हाल ही में भाजपा से सांसद रहे राजेंद्र गावित हिंदूहृदयसम्राट श्री शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे को आदर्श मानकर व शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे की कार्य प्रणाली से प्रभावित होकर शिवसेना में शामिल हुए हैं, जिसका भरपूर लाभ मिलेगा और इस सीट से शिवसेना का सांसद लोकसभा जाएगा। पालघर लोकसभा अंतर्गत आनेवाले ६ विधानसभा क्षेत्रों में से बोइसर, नालासोपारा, वसई बहुजन विकास अघाड़ी के पास हैं जबकि डहाणू और विक्रमगढ़ भाजपा के पास और पालघर सीट शिवसेना के पास है। अब यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि इस सीट पर बहुजन विकास आघाड़ी और शिवसेना-भाजपा युति के बीच ही टक्कर है। कांग्रेस ने यह सीट बहुजन विकास के लिए छोड़ी है और सीपीएम की ताकत न के बराबर है। पालघर की सीट पर शिवसेना-भाजपा युति के उम्मीदवार हैं सांसद राजेंद्र गावित और बहुजन विकास अघाड़ी ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है जबकि कांग्रेस, राकांपा, युनाइटेड जनता दल जैसी कई छोटी-बड़ी पार्टियों को मिलाकर भी बहुजन विकास आघाड़ी शिवसेना से टकराने में काफी पीछे है।