लाइफ लेती लाइफलाइन, ८ दिनों में ८१ की गई जान

मुंबईकरों की लाइफलाइन कही जानेवाली लोकल ट्रेनें इन दिनों मुंबईकरों के खून की प्यासी बन गई हैं। मुंबई को हमेशा गतिशील बनाए रखने वाली लोकल ट्रेन ने पिछले एक सप्ताह में करीब ७ दर्जन लोगों की बलि ले डाली है। रेल पुलिस द्वारा जारी अ‍ेंकड़ों के अनुसार पिछले ८ दिनों में मुंबई में रेल यात्रा के दौरान ८१ रेल यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, वहीं ६८ रेल यात्री जख्मी भी हुए हैं। २२ अक्टूबर, २०१८ से २७ अक्टूबर, २०१८ के बीच हुए इन हादसों में ७९ पुरुष तथा २ महिलाओं की जानें गई हैं। मृतकों में ३५ की शिनाख्त का रेल पुलिस अभी भी प्रयास कर रही है।
मुंबई में उपनगरीय रेल मार्ग पर सफर के दौरान औसतन १० लोग प्रतिदिन अपनी जान गंवाते हैं। मुंबई उपनगरीय रेल मार्ग के अंतर्गत आनेवाले १७ पुलिस थानों में पिछले ८ दिनों में ८१ रेल यात्रियों की मौत हुई है। इनमें कुर्ला, कल्याण और ठाणे रेलवे के किलिंग जोन के रूप में सामने आए हैं। इन्हीं रेलवे पुलिस थानों में सर्वाधिक रेल यात्री अपनी जान गंवाते हैं।
जीआरपी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार २२ अक्टूबर, २०१८ से २७ अक्टूबर, २०१८ के बीच सीएसटी में ३, दादर में ५, कुर्ला में ११, ठाणे में १२, डोंबिवली में ५, कल्याण में ८, कर्जत में २, वडाला में ३, वाशी में ४, पनवेल में १, चर्चगेट में २, मुंबई सेंट्रल में ३, बांद्रा में २, अंधेरी में ४, बोरीवली में ७, वसई में ४ तथा पालघर में २ यात्रियों की मौत हुई है। इनमें ज्यादातर रेल यात्री अपनी ही गलती के कारण रेल हादसों के शिकार हुए हैं। रेल पटरी पार करने, चलती लोकल ट्रेन में चढ़ने-उतरने या लोकल ट्रेन की गेट पर सफर करने के दौरान खंभों से टकराने या संतुलन बिगड़ने के कारण सर्वाधिक रेल यात्रियों की जानें गई हैं।