लूट की लोकल हुई डबल फास्ट

मुंबईकरों की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में लूट के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। उपनगरीय ट्रेनों में सफर के दौरान वर्ष २०१७ की तुलना में वर्ष २०१८ में दोगुना से भी ज्यादा यात्री लूट या छिनैती के शिकार हुए हैं अर्थात लूट की लोकल की रफ्तार डबल फास्ट हो गई।

बता दें कि मुंबई की उपनगरीय लोकल ट्रेनों में रोजाना ८० लाख से ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को आरटीआई के तहत बताया गया है कि विगत ६ वर्षों में मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में सफर के दौरान ३,१६८ रेल यात्री लूट के शिकार हुए हैं। वर्ष २०१३ से साल २०१८ के बीच लुटेरों ने यात्रियों से लगभग ७ करोड़ (६,९६,४७ ७६७) रुपए की संपत्ति लूटी है। रेलवे पुलिस एसीपी सुनील भामरे द्वारा आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष २०१३ में संपत्ति या नकदी की चोरी के कुल ५१३ मामले विभिन्न रेलवे पुलिस थाने में दर्ज हुए थे, जिनकी कुल कीमत१,४७,१७,९०४ रुपए थी। रेलवे पुलिस इनमें से सिर्फ ३३८ मामलों को ही सुलझा सकी थी। ६०,२१,४१८ रुपए की संपत्ति बरामद की थी। वर्ष २०१४ में संपत्ति या नकदी की चोरी के मामले बढ़कर ५७३ हो गए, जिनकी कुल कीमत १,६६,०१४७४ रुपए थी। इनमें से सिर्फ ३४४ मामलों को ही सुलझाया गया और ६७,००,८१० रुपए की संपत्ति को ही बरामद किया जा सका। वर्ष २०१५ में संपत्ति या नकदी की चोरी के कुल ५३१ मामले दर्ज हुए थे, जिनकी कुल कीमत १,४६,८८,२५१ रुपए थी, इनमें से सिर्फ ३२९ मामलों को ही सुलझाया गया और ६१,१९,६८५ रुपए की संपत्ति बरामद की गई। वर्ष २०१६ में लूट के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई। कुल ६१ मामले ही दर्ज किए गए, जिनकी कुल कीमत १३,९०,१४९ रुपए आंकी गई थी, इनमें से सिर्फ ५० मामलों को सुलझाकर रेलवे पुलिस ने ७,७१,९८० रुपए की संपत्ति बरामद कर ली थी लेकिन वर्ष २०१७ में चोरी के मामले एक बार फिर बढ़कर ४९६ हो गए, इनमें से सिर्फ ४५७ मामलों को ही सुलझाया जा सका। वर्ष २०१७ की तुलना में वर्ष २०१८ में लूट की लोकल डबल फास्ट रफ्तार से दौड़ी। इस दौरान लूट के मामले बढ़कर ९९४ हो गए। कुल १,३७,४५,९७९ रुपए की संपत्ति या नगदी लूटी गई। इनमें से ९३२ मामलों को रेलवे पुलिस ने सुलझा लिया। पुलिस ने १,०६,२०,३३३ रुपए की संपत्ति बरामद करने का दावा किया है। विगत ६ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो लूट की घटनाएं जहां दोगुना से ज्यादा बढ़ी हैं, वहीं रेलवे पुलिस को लूटी गई संपत्ति का आधा ही वापस मिल सका है।