लूट के माल से डकैत बना व्यापारी, 15 साल बाद आया पुलिस की गिरफ्त में

सुरत में 15 साल पहले हुई डकैती और हत्या मामले में शामिल एक आरोपी उस समय पुलिस की सिकन्जे से साफ बच गया था। उसने अपना नाम, हुलिया, परिवार और ठिकाना बदल दिया और लूट के पैसों से व्यापारी बन गया। लेकिन उसके पापों ने उसका पीछा नहीं छोडा। उसी के साथी को ढूंढते हुए पुलिस उस तक पहुंच गई।
बता दें कि 19 जनवरी, 2004 को गुजरात के सुरत जिला स्थित उमरा पुलिस थाने की हद में डकैतों ने एक मकान पर दिन दहाडे धावा बोला था। गैस कंपनी के कर्मचारी बनकर आए डकैतों ने घर में मौजूद लोगों पर धारदार हथियारों से हमला किया था तथा जमकर लूटपाट की थी। इस हमले में घायल एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस मामले में उमरा पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिनमें से एक आरोपी को कोर्ट ने फांसी की जबकि 4 अन्य को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इनमें उम्र कैद की सजा भुगत रहा कैदी महेश बाबुराव भोसले 26 अप्रैल, 2018 को पैरोल पर जेल से रिहा हुआ था लेकिन पैरोल की मियाद खत्म होने के बाद वह जेल वापस नहीं लौटा। इस बारे में देश भर के पुलिस थानों को सूचना दी गई थी। मुंबई पुलिस क्राईम ब्रांच के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अरुण पोखरकर के मार्गदर्शन व पीआई महेश तोगरवाड के नेतृत्व में एपीआई विट्ठल चौगुले, पीएसआई लक्ष्मण वडरे, हिन्दुराव चिन्चोलिकर और अमित देवकर की टीम ने को पता चला की भोसले के खिलाफ मुंबई में भी कुछ मामले दर्ज हैं। इसके बाद उन मामलों मे शामिल भोसले के साथियों को पुलिस ने ढूंढना शुरू किया। तो पता चला कि भोसले अपने एक पुराने साथी के संपर्क में था जो कि सुरत में हुई वारदात के बाद मुंबई से लापता हो गया था तथा वह फिलहाल पुणे में रह रहा था।यूनिट 8 की टीम ने विक्रम उर्फ विकी पटेल नामक उक्त शख्स को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ की तो ऐसी कहानी सामने आई जिसकी यूनिट 8 के अधिकारियों ने कल्पना भी नहीं की थी। दरअसल वर्ष 2004में सुरत में हुई उस हत्या और डकैती मामले में पटेल भी शामिल था। पटेल मुंबई के विलेपार्ले इलाके का निवासी था। मुंबई में उसकी बीवी उसका इंतजार करती रही लेकिन वारदात के बाद पटेल ने बीवी से कभी संपर्क ही नहीं किया। उसने अपना नाम और हुलिया बदल लिया तथा वह पुणे के बिबवेवाड़ी स्थित चिंतामणि नगर में जाकर बस गया। लूट के पैसों से उसने मोबाइल कंपनी की गैलरी खोल ली थी।