लूम की लाचारी, आमदनी अठन्नी खर्चा रुपय्या

एशिया की सबसे बड़ी पावर लूम नगरी भिवंडी पिछले कई दशक से मंदी की मार से बेहाल है। आलम यह है कि कपड़ा तैयार करने में जितना खर्च आ रहा है, उससे भी कम कीमत में कपड़ा बिक रहा है। अंडर कास्ट कपड़ा बिकने के कारण आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैय्या हो गया है। लूम व्यापारी कपड़ा तैयार करने में लग रहे हाई प्रोडक्शन चार्ज को वस्त्रोद्योग में छाई मंदी का जिम्मेदार मान रहे हैं जिसके कारण उद्योग लाचारी में है।
मालूम हो कि भिवंडी में इन दिनों ६ लाख के आस-पास पावर लूम चलते हैं, इसी पर यहां की सारे उद्योग-धंधे आश्रित हैं। पावर लूम में लगनेवाले यार्न के भाव में रोजाना होनेवाले उतार-चढ़ाव, बिजली का लगातार ज्यादा आता बिल, मजदूरों की बढ़ी मजदूरी ने इन दिनों कपड़ा बनाने के लिए लगनेवाले कास्ट को बढ़ा दिया है। पावर लूम व्यवसाई हलीम खान का कहना है कि अंडर कास्ट कपड़े के साथ कम दरों में दूसरे देश से होनेवाले कपड़े के निर्यात के कारण कपड़ा उद्योग चौपट होता जा रहा है। उनका कहना है कि कपड़ा तैयार करने में यदि ३५ रुपए मीटर कास्ट पड़ता है तो यह कपड़ा ३० रुपए मीटर बिक रहा है जबकि यही कपड़ा चायना भारतीय बाजार में और सस्ते में बेच रहा। उन्होंने बताया कि हिंदुस्थान व चायना के कपड़ा मार्केट पर बांग्लादेश का कपड़ा और भी सस्ता मिलने के कारण भारी पड़ता जा रहा है हलीम खान सहित भिवंडी के तमाम लूम व्यापारियों का यही कहना है। लोगों का मानना है कि बांग्लादेश सरकार कपड़ा सस्ते में तैयार कर बेचने के लिए तमाम छूट दे रही है जबकि भारत सरकार की उपेक्षा के कारण कपड़े का कास्ट बढ़ रहा है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि यही स्थिति रही तो आनेवाले समय में भिवंडी में कपड़े को तैयार करने का काम छोड़कर सिर्फ बाहर से कपड़ा मंगाकर ट्रेडिंग करेंगे।