" /> ले दुर्गा का रूप

ले दुर्गा का रूप

जिसने ऐसा काम किया है
उसका नाम मिटा जाओ।
ले दुर्गा का रूप हे बेटी
फिर धरती पर आ जाओ।।
धधक रही मन की ये ज्वाला,
कैसे न्याय दिलाएं बोलो,
गिरते तेरे अश्रुधार को,
कितना धीर बधाएं बोलो,
घृणित कार्य करनेवालों को
चुन-चुन धूल चटा जाओ।
ले दुर्गा का रूप हे बेटी
फिर धरती पर आ जाओ।।
मूंक बना तेरा रक्षक,
तुझको फिर आना होगा,
खोज-खोज कर हैवानों को,
तुमको आज मिटाना होगा,
तेरी पीड़ा से आहत हूं
वादा एक निभा जाओ।
ले दुर्गा का रूप हे बेटी
फिर धरती पर आ जाओ।।
कैसा बर्बर बन गया समाज,
जघन्य पाप वो कर डाला,
स्मरण मात्र से हम सबका,
विदीर्ण हृदय ही कर डाला,
धर दिव्य शक्ति हे शक्ति दायिनी
चंडी रूप दिखा जाओ।
ले दुर्गा का रूप हे बेटी
फिर धरती पर आ जाओ।।
सुनकर तेरी मर्म चीख,
क्यों कान नहीं फटे मेरे,
अरमानों के दिव्य पंख,
क्यों अब तक नहीं कटे मेरे,
जिस अग्नी में जली मरी तुम
ऐसी आग लगा जाओ।
ले दुर्गा का रूप हे बेटी
फिर धरती पर आ जाओ।।
सारा तंत्र मौन दर्शक बन,
देख रहा तेरा नर्तन,
अन्यायी पापी का देवी,
कर डालो आकर मर्दन,
‘लाल’ त्रिशूल उठा बेटी
अब सारे कर्ज चुका जाओ।
ले दुर्गा का रूप हे बेटी
फिर धरती पर आ जाओ।।
-लालबहादुर चौरसिया ‘लाल’, गोपालगंज, आजमगढ़, यूपी