लैब ने मिला दी जोड़ी…

वैसे तो यह कहावत आम है कि जोड़ियां भगवान बनाकर भेजते हैं। विज्ञान के जमाने में अब इस कहावत को भी चुनौती दी जा रही है, वह भी एक लैब के माध्यम से। एक लैब में स्त्रियों और पुरुषों के जींस की जांच करके उन्हें बताया जाएगा कि उनकी जोड़ी बनने लायक है या नहीं!
शोधकर्ताओं के अनुसार डीएनए की मदद से लैब में जोड़ियां मिलाई जा रही हैं। आनेवाले ६ साल में वे एकल शख्स का जींस टेस्ट कर बताएंगे कि उसकी केमिस्ट्री किसके साथ ज्यादा जमेगी। बता दें कि आज के दौर में लोग अपने साथी चुनने के लिए घंटों ऑनलाइन डेटिंग ऐप पर बिता रहे हैं। जरूरी नहीं कि ऑनलाइन डेटिंग ऐप पर मिले साथी के साथ केमिस्ट्री जम ही जाए। ऐसा जीवनसाथी जिसके साथ आपकी जिंदगी खुशमय रहे और दोनों के बीच प्रेम संबंध व लगाव बना रहे, यह पता करना अब मुश्किल नहीं होगा। इम्पीरियल कॉलेज ऑफ लंदन और ई हार्माेनी के शोधकर्ताओं के अनुसार अब वो दिन दूर नहीं जब लोगों के जींस के जरिए यह पता चल जाएगा कि उनके जीवनसाथी के रूप में कौन सही है। शोधकर्ताओं के अनुसार इंसान के डीएनए में मौजूद जीन्स सेक्सुअल अट्रैक्शन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को विनियमित करनेवाली मेजर हिस्टोकम्पेटिबिलिटी काम्प्लेक्स (एमसीएच) नामक जींस अनजाने में ही सही लेकिन हमारे साथी चुनने के लिए प्रभाव डालती है। इससे यह साफ है कि जींस टेस्ट से यह साफ हो जाएगा कि किस पुरुष की जोड़ी किस महिला के साथ सफल रहेगी। गौरतलब है कि जीन-कोड मैच करने की प्रक्रिया को ३ से ५ वर्ष और लगेंगे। यानी २०२५ से लैब से कई जोड़ियां बनकर निकलेंगी।