" /> लॉकडाउन की आड़ में हो रहा है अवैध निर्माण : खतरे में मुंब्रा बाईपास

लॉकडाउन की आड़ में हो रहा है अवैध निर्माण : खतरे में मुंब्रा बाईपास

वन विभाग के कर्मचारियों पर जानलेवा हमला

कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन घोषित किया गया है। गृह निर्माण कार्य पूर्णतया बंद हैं। लॉक डाउन का फायदा उठाकर झोपड़पट्टी माफिया पारसिक नगर की पहाड़ियों पर अवैध झोपड़ों का निर्माण करने में जुटे हुए हैं। अवैध रूप से निर्मित झोपड़ों पर कार्रवाई करने गए वन विभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।
पारसिक नगर की पहाड़िया बनी भूमाफियाओं का अड्डा
मुंब्रा तथा कलवा परिसर रेड जोन घोषित है। नागरिक कड़ी बंदिशों का सामना कर रहे हैं। पुलिस तथा मनपा प्रशासन कोरोना को कंट्रोल करने में दिन-रात जुटा हुआ है, इसी का फायदा झोपड़पट्टी दादाओं तथा भूमाफियाओं ने उठाया और मुंब्रा-कलवा के बीचों-बीच पारसिक नगर स्थित पहाड़ियों पर करीब-करीब कब्जा जमा लिया है। पिछले दो महीने से दर्जनों की संख्या में झोपड़ों का निर्माण कर दिया गया।
खतरे में पर्यावरण औऱ मुंब्रा बाईपास
दूर-दूर तक फैली पारसिक नगर पहाड़ियों पर जिस तरह से अतिक्रमण किया जा रहा है, उससे पर्यावरण तथा मुंब्रा बाईपास को खतरा पैदा हो गया है। पहाड़ी के निचले हिस्सों में झोपड़े बनाने के लिए प्राकृतिक नालों को बंद कर दिया गया है। मुंब्रा स्थित मुंब्रा देवी पहाड़ी के आस-पास प्राकृतिक नालों को बंद कर बड़ी संख्या में झोपड़ों का निर्माण कर लिया गया है, इसकी वजह से मुंब्रा बाईपास के पास स्थित पहाड़ियों के टूटने या भूस्खलन होने का खतरा पैदा हो गया है। मुंबई आईआईटी द्वारा पारसिक पहाड़ियों पर हुए अतिक्रमण का अध्ययन कर कार्रवाई करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, पर यह काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
वन कर्मचारियों पर हमला
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई सामाजिक संगठनों ने अवैध झोपड़ों के निर्माण की शिकायत वन विभाग से की थी। वन विभाग का अतिक्रमण दस्ता कार्रवाई करने हेतु गुरुवार को मौके पर पहुंचा तो उस पर हमला कर दिया गया। इस हमले में वनपाल समीर ईनामदार, अर्जुन निचिते तथा सुरक्षारक्षक सचिन म्हात्रे जहां गंभीर रूप से घायल हो गए, वहीं अन्य कर्मचारियों को मामूली चोटें आई हैं। कलवा पुलिस ने इस संबंध में बापू पवार सहित आधा दर्जन आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।