" /> लॉकडाउन में बंद कारखानों से अनुमानित बिजली बिल की वसूली : कारखानेदारों में भारी नाराजगी व असमंजस

लॉकडाउन में बंद कारखानों से अनुमानित बिजली बिल की वसूली : कारखानेदारों में भारी नाराजगी व असमंजस

कोरोना वायरस के प्रादुर्भाव को रोकने व इस पर नियंत्रण के लिए लागू की गई लॉकडाउन की अवधि में विगत दो माह से मीरा-भाइंदर शहर के लघु उद्योग और कारखाने पूर्णतः बंद हैं। इसके बावजूद उन्हें हजारों रुपए के अनुमानित बिजली बिल भेजे गए हैं और इस आशय के संदेश भी मोबाइल फोन पर भेजे जा रहे हैं, जिससे इन लघु औद्योगिक कारखानेदारों में भारी नाराजगी व असमंजस का माहौल है। विशेषतः सभी के काम-धंधे बंद होने के कारण बिजली बिल कैसे भरें? यह सवाल किए जा रहे हैं।
राज्य में कोरोना मरीजों की निरंतर बढ़ती संख्या को देखते हुए विगत ढाई माह से पूर्णतः संचारबंदी व तालाबंदी नियम लागू किया गया है। इस वजह से मीरा-भाइंदर शहर के हजारों लघु औद्योगिक कारखाने बंद हैं। इस अवधि में बिजली की एक भी यूनिट इस्तेमाल नहीं की गई है, इसके बावजूद अनुमानित बिल के रूप में बिजली कंपनी द्वारा उन्हें हजारों रुपए के बिल अदा करने के लिए भेजे गए हैं। बिजली कंपनियों को इस पूरे प्रकरण की जानकारी होते हुए भी कारखानेदारों को जान-बूझकर बिजली बिल भेजे गए हैं, ऐसे आरोप लघु उद्योजकों द्वारा लगाए जा रहे हैं।
◆ लॉकडाउन की वजह से सभी कारखाने बंद हैं। स्थिति ऐसी है कि लॉकडाउन समाप्त भी कर दिया जाए तो यहां के कारखानों में काम करने के लिए मजदूर भी उपलब्ध नहीं हैं। सभी मजदूर इस त्रासदी में अपने-अपने मूलगांव लौट गए हैं। आगामी पांच-छह माह तक उनके लौटने की भी संभावना नही है, ऐसे में लघु औद्योगिक कारखानेदारों के सामने उदर निर्वाह की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऊपर से बंद कारखानों के बिजली बिल भेजकर बिजली कंपनियों ने कारखानेदारों के जख्म पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया है। इस पर सरकार को शीघ्र संज्ञान लेने की आवश्यकता है – सुबोध मिश्रा (स्थानीय स्टील बफिंग कारखानेदार)
◆ इस प्रकार से बिजली बिल भेजना योग्य नहीं है। बिजली कंपनियों को इस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। ऐसी मांग हम करते हैं – रोहिदास पाटील (सभागृह नेता, मीरा-भाइंदर मनपा)
◆ जब तक लॉकडाउन पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता। कारखाने पुनः सुचारु रूप से पहले की तरह शुरू नहीं हो जाते, तब तक बिजली कंपनियों द्वारा इस तरह से अनुमानित बिल भेजना अनुचित है। विश्व आपदा की इस घड़ी में बिजली कंपनियों को भी लघु उद्योग धारकों के साथ खड़ा होने और उन्हें सहयोग करने की आवश्यकता है – राजू यशवंत भोईर (शिवसेना नगरसेवक व पूर्व विरोधी पक्ष नेता, मीरा-भाइंदर मनपा)
◆ वाणिज्यिक संस्थानों को सिर्फ १०% बिल ही अदा करना है…
लघु उद्योग धारकों व कारखानेदारों को भेजे गए अनुमानित बिजली बिल के संदर्भ में अडानी इलेक्ट्रिसिटी के प्रवक्ता का कहना है कि कोविड-१९ के प्रादुर्भाव के कारण २६ मार्च को महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमीशन ने प्रत्यक्ष मीटर रीडिंग लेने से मना कर अनुमानित बिल भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वाणिज्यिक उपभोक्ताओं द्वारा इस पर आपत्ति लिए जाने के बाद एमईआरसी ने ९ मई को दूसरा निर्देश जारी किया है, जिसके अनुसार वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को अनुमानित बिजली बिल का सिर्फ १०% रकम ही अदा करनी होगी। इसके अलावा अडानी इलेक्ट्रिसिटी ने उपभोक्ताओं को “सेल्फ मीटर रीडिंग” की सुविधा भी प्रदान की है।