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लॉकडाउन में रिश्वतखोरी पर लगा ब्रेक!

कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते लॉकडाउन को लागू किया गया। इस लॉकडाउन का असर रिश्वतखोरी पर भी पड़ा है। लॉकडाउन के दौरान सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की कम उपस्थिति के कारण 2019 की तुलना में 2020 के पहले 6 महीनों में रिश्वतखोरी के मामले में गिरावट आई है। अधिकारियों के मुताबिक इस दौरान शिकायतों और रिश्वतखोरों को पकड़ने के लिए जाल बिछाने की संख्या कम हो गई है।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए 22 मार्च से देश में लॉकडाउन किया गया है। कार्यालय में सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति मात्र 10 प्रतिशत कर दी गई। आपातकालीन सेवाओं के अलावा अन्य कार्यों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। पिछले वर्ष जून, 2019 में राज्य में रिश्वतखोरों को पकड़ने के लिए 389 जाल बिछाए गए। जिसमें 519 रिश्वत लेनेवालों को गिरफ्तार किया गया, वहीं इस वर्ष जनवरी से 10 जून तक 245 जाल बिछाए गए। जिसमें 342 रिश्वतखोरों को गिरफ्तार किया गया, इनमें से अधिकतर मामले लॉकडाउन के पहले यानी जनवरी, फरवरी एवं मार्च महीने में देखने को मिले। अप्रैल में केवल 7 जाल बिछाए गए, वहीं मई महीने में रिश्वतखोरों को पकड़ने के लिए 30 जाल बिछाए गए थे। अप्रैल में सिर्फ 9 आरोपी एवं मई महीने में 43 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले मुंबई में देखने को मिले, इसी वजह से पिछले 6 महीने में यहां सिर्फ 10 जाल बिछाए गए।

वर्ष 2019   जाल बिछाए       गिरफ्तार
जनवरी           71    97
फरवरी         87   120
मार्च             78   96
अप्रैल          58    77
मई             76     106
जून (10)     19      23

वर्ष   2020    जाल बिछाए    गिरफ्तार
जनवरी          68       96
फरवरी          72      96
मार्च           58      86
अप्रैल         07    09
मई             30    43
जून (10)     10    12