" /> लॉक डाउन में खत्म हुआ अज्ञातवास : 30 साल बाद पहुंचा गांव

लॉक डाउन में खत्म हुआ अज्ञातवास : 30 साल बाद पहुंचा गांव

नाराज होकर 1990 में छोड़ा था घर
30 सालों में माता, पिता, पत्नी का हुआ स्वर्गवास
लॉकडाउन के कारण देशभर में मजदूर अपने घर और गांव पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें से कई मजदूर सालों बाद अपने घर लौट रहे हैं। इन्हीं मजदूरों में से एक हैं महंगी प्रसाद, जिन्होंने 30 साल पहले गुस्से में परिवार से रिश्ता तोड़कर अपना घर छोड़ दिया था लेकिन तालाबंदी के चलते उन्होंने घर जाने का फैसला किया लेकिन जब वे घर पहुंचे तो वहां सब कुछ बदल चुका था। उनकी माता, पिता और पत्नी की मृत्यु हो गई थी। घर में सिर्फ उनकी एक बेटी मौजूद थी। घर पहुंचने के बाद, महंगी प्रसाद लड़की के पास बैठकर बहुत रोए।

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कैथवलिया गांव के महंगी प्रसाद किसी कारणवश नाराज होकर 1990 में अपने घर से निकल गए थे। उस समय वो 40 साल के थे और शादीशुदा थे। माता-पिता, पत्नी और तीन बेटियों को छोड़कर महंगी प्रसाद मुंबई चले आए। यहां छोटे-बड़े कई तरह के काम कर उन्होंने अपना गुजर-बसर किया। परिवार से उनकी नाराजगी इतनी बड़ी थी कि उन्होंने 30 सालों में एक बार भी कभी अपने परिवारवालों से संपर्क तक नहीं किया। हालांकि, परिवार के लोगों ने उसकी तलाश की, लेकिन जब उनका कोई समाचार नहीं मिला तो घरवालों को लगा कि उनकी मृत्यु हो गई होगी। महंगी प्रसाद के घर से चले जाने के बाद, उनके पिता ने घर की सारी जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने महंगी प्रसाद की तीनों बेटियों की शादी की। कुछ दिनों बाद, महंगी प्रसाद के माता-पिता का निधन हो गया। तालाबंदी के कारण महंगी प्रसाद के भूखे रहने का समय आ गया। अंत में परिस्थिति से तंग आकर महंगी प्रसाद ने घर यानी गांव जाने का फैसला किया। 3,500 रुपए का भुगतान करते हुए वो एक सब्जी की गाड़ी में बैठकर गोरखपुर पहुंचे और वहां से पैदल चलना शुरू किया। इन 30 सालों में गांव में बहुत कुछ बदल गया था। गांव के एक व्यक्ति ने जब उन्हें देखा तो पहचान गया। वो व्यक्ति महंगी प्रसाद को गांव ले आया। महंगी प्रसाद कहते हैं कि आज मैं बहुत दुखी हूं क्योंकि मैं एक बेटे और एक पति के अपने कर्तव्य को पूरा नहीं कर सका।