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लॉक डाउन में ट्रेन न चलने से परे को 716 करोड़ का नुकसान

कोरोना वाइरस के कारण दुनियाभर में जारी लॉकडाउन से काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसमें रेलवे भी पीछे नहीं है। लॉकडाउन में ट्रेनों का परिचालन बंद होने से पश्चिम रेलवे को अब तक लगभग 716 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसमें लंबी दूरी और मुंबई लोकल दोनों के नुकसान का आंकड़ा शामिल है। इसके अलावा रद्द हुई ट्रेनों के टिकट राशि रिफंड करना है। पश्चिम रेलवे को क़रीब 237 करोड़ रुपए रिफंड करने हैं। अकेले मुंबई डिविजन से लगभग 115 करोड़ रुपए का रिफंड किया जाएगा। पश्चिम रेलवे पर अब तक 37.18 लाख यात्रियों के टिकट रद्द हुए हैं।

चल रही हैं पार्सल ट्रेनें

एक तरफ जहां श्रमिक एक्सप्रेस को छोड़कर अन्य सामान्य ट्रेनें नहीं चल रही हैं, वहीं पार्सल ट्रेनें चलाकर पश्चिम रेलवे द्वारा नुकसान के भरपाई की कवायद हो रही है। एक अधिकारी ने बताया कि लंबी दूरी ट्रेनें नहीं चलने से हुए नुकसान की तुलना में पार्सल ट्रेनों की कमाई बेहद कम है लेकिन कोशिश जारी है। 22 मार्च से 4 मई, 2020 तक लॉकडाउन की अवधि के दौरान पश्चिम रेलवे पर मालगाड़ियों के 3,017 रेकों का उपयोग 6.60 मिलियन टन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए किया गया है। 6,214 मालगाड़ियों को अन्य रेलवे के साथ जोड़ा गया, जिनमें 3,130 ट्रेनें सौंपी गईं और 3,084 ट्रेनों को अलग-अलग इंटरचेंज पॉइंट पर ले जाया गया।

रवाना हुई 8 पार्सल ट्रेनें
अत्यावश्यक वस्तुओं के समुचित परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम रेलवे से देश के विभिन्न हिस्सों को कुल 8 पार्सल विशेष ट्रेनें 5 मई को रवाना हुईं। इनमें दूध पाउडर, तरल दूध, चिकित्सा आपूर्ति और अन्य सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं जैसी आवश्यक सामग्री की मांगों का सामना करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में पार्सल वैन / रेलवे दूध टैंकरों (आरएमटी) के 160 मिलेनियम पार्सल रेक भेजे गए हैं। 23 मार्च से 4 मई, 2020 तक, लगभग 25,000 टन वजन वाली वस्तुओं को वेस्टर्न रेलवे द्वारा अपनी विभिन्न पार्सल विशेष गाड़ियों के माध्यम से ले जाया गया है, जिनमें कृषि उत्पाद, दवाइयां, मछली, दूध आदि शामिल हैं। इस परिवहन के माध्यम से होने वाली कमाई लगभग 7.48 करोड़ रुपए रही है। इसके अंतर्गत पश्चिम रेलवे द्वारा 21 दूध विशेष रेलगाड़ियां चलाई गईं, जिनमें 15000 टन से अधिक भार और वैगनों के 100% उपयोग के साथ लगभग 2.62 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसी तरह, आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए 133 कोविड -19 विशेष पार्सल ट्रेनें भी चलाई गईं, जिनके लिए अर्जित राजस्व 4.09 करोड़ रुपए रहा। इसके अलावा, लगभग 78 लाख रु. की आय के लिए 100% उपयोग के साथ 4 इंडेंटेड रेक भी चलाए गए।