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लॉक डाउन में पश्चिम रेलवे ने चलाई 4,402 मालगाड़ियां

लॉकडाउन के दौरान देशभर में माल आपूर्ति का जिम्मा रेलवे पर था। ऐसे में पश्चिम रेलवे की ओर से चारों लॉकडाउन में 4,402 मालगाड़ियां चलाकर लोगों तक राहत पहुंचाई है। कोविड-19 के मद्देनजर घोषित लॉकडाउन अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे ने विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में दूध और अन्य आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति की है और सप्लाई निरंतर जारी है।

अत्यावश्यक सेवाओं में सबसे आगे
मालगाड़ियों में जीवनावश्यक वस्तुओं के परिवहन
को प्राथमिकता देते हुए खाद्यान्नों के अलावा तत्काल जरूरत वाली दवाएं, पीपीई, मास्क और सैनिटाइजर जैसी चिकित्सा सामग्री देशभर में छोटे आकारों के पार्सलों में भेजी जा रही है। पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी पार्सल विशेष ट्रेनों के अलावा 22 मार्च से 22 मई, 2020 तक अपनी 4,402 माल गाड़ियों के माध्यम से भी विभिन्न अत्यावश्यक वस्तुओं को परिवहन द्वारा भेजा गया है।

8 मिलियन टन मालवहन
पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंद्र भाकर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 22 मार्च से 22 मई, 2020 तक पश्चिम रेलवे द्वारा मालगाड़ियों के कुल 4,402 रेकों का इस्तेमाल 8.82 मिलियन टन आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए किया गया है। 8,740 मालवाहक ट्रेनों को अन्य क्षेत्रीय रेलों के साथ जोड़ा गया, जिनमें 4,404 ट्रेनें सौंपी गईं और 4,336 ट्रेनों को अलग-अलग इंटरचेंज पॉइंट पर ले जाया गया। इसके अलावा 257 मिलेनियम पार्सल रेक ऑफ पार्सल वैन/रेलवे मिल्क टैंकरों (आरएमटी) को आवश्यक सामग्री जैसे दूध पाउडर, तरल दूध, चिकित्सा आपूर्ति और अन्य सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की मांगों का सामना करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया। गौरतलब है कि 23 मार्च से 22 मई, 2020 के बीच 39,000 टन से अधिक वजन वाली वस्तुओं को पश्चिम रेलवे द्वारा अपनी 256 पार्सल विशेष ट्रेनों के माध्यम से ले जाया गया है, जिनमें कृषि उपज, दवाएं, मछली, दूध आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।

लगभग 12 करोड़ की कमाई
इस परिवहन से लगभग 11.90 करोड़ रु. की आमदनी हुई है, जिसके अंतर्गत 31 मिल्क स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें 22,700 टन से अधिक का भार था और वैगनों के 100% उपयोग से 3.91 करोड़ रुपए से अधिक की आय हुई। इसी प्रकार 221 कोविड -19 विशेष पार्सल ट्रेनें भी आवश्यक वस्तुओं के परिवहन के लिए चलाई गईं, जिनके लिए अर्जित राजस्व लगभग 7.2 करोड़ रुपए रहा। इनके अलावा लगभग 78 लाख रु. की आय के लिए 100% उपयोग के साथ 4 इंडेंटेड रेक भी चलाये गए। भाकर ने बताया कि 23 मई, 2020 को देश के विभिन्न हिस्सों के लिए पश्चिम रेलवे से छोड़ी गई दूध की एक रेक सहित कुल सात पार्सल स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें दादर- भुज, बांद्रा टर्मिनस-ओखा, ओखा-बांद्रा टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल-फिरोजपुर, ओखा-गुवाहाटी और राजकोट-कोयंबटूर स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। एक दूध की रेक पालनपुर से हिंद टर्मिनल के लिए रवाना हुई।

986 करोड़ का नुक़सान
मार्च, 2020 के बाद से उपनगरीय और गैर-उपनगरीय खंडों सहित संपूर्ण पश्चिम रेलवे पर कुल कमाई का लॉकडाउन के कारण अनुमानित घाटा 986.41 करोड़ रुपए रहा है। इसके बावजूद अब तक टिकटों के निरस्तीकरण के परिणामस्वरूप, पश्चिम रेलवे ने 279.54 करोड़ रुपए की रिफंड राशि वापस करना सुनिश्चित किया है। गौरतलब है कि इस रिफंड राशि में अकेले मुंबई डिवीजन ने 134.17 करोड़ रुपए का रिफंड सुनिश्चित किया है। अब तक, 42.94 लाख यात्रियों ने पूरी पश्चिम रेलवे पर अपने टिकट रद्द कर दिए हैं और तदनुसार उनकी वापसी राशि प्राप्त की है।