लोकमंच : जेसे पैदा भयो

अवधी की मिट्टीr के सपूत पंडित किरण मिश्र ‘अयोध्यावासी’ के बारे में प्रसिद्ध विद्वान डॉ. रामजी तिवारी लिखते हैं ‘किरण जी आध्यात्मिक चेतना संपन्न, संवेदनशील नवगीतकार हैं। किंतु अवधी भाषा का समृद्ध संस्कार उन्हें आनुवंशिक मिला है।’ इसलिए वे अवधी माटी की खुशबू से सराबोर हैं। मजीरा, चंद्रबिंब, चुंबक है आदमी, कंपन करती धरती, पंक्षी भयभीत हैं और अवधी बयार के रचनाकार किरण जी का जन्म अयोध्या में हुआ था। उनका सृजनशील मन गोरखपुर यूनिवर्सिटी की नौकरी छुड़वाकर मुंबई लाया जहां वे भजन, धार्मिक गीत, फिल्म, सीरियल के लेखन में जुट गए और आज इस क्षेत्र की नामचीन हस्ती हैं, फिर भी अपनी भाषा से बराबर जुड़े हुए हैं।

जेसे पैदा भयो
नारी का मारत हौ जेसे पैदा भयो।
वही का जारत हौ जेसे पैदा भयो।।
नारी बिना नर कै प्रतिष्ठा का इहां
इज्जत लूटत हौ जेसे पैदा भयो।
जहां भ्रूण हत्या होय जहां बाल हत्या,
ऊ समाज इहां राक्षसन कै कहा जाई।
जहां होय दहेज के नाम पर हत्याकांड
ऊ समाज इहां दावानल कहा जाई।
नारी का जारत हौ जेसे पैदा भयो।
नारी का मारत हौ जेसे पैदा भयो।।
नारी-नर सब एक समान पैदा इहां
सबका समान अधिकार मिला है,
प्यार उपजै जेमा घरबार संसार बना
प्यार से ही जगत परिवार बना है।
जुलुम ढावत हौ जेसे पैदा भयो।
नारी का मारत हौ जेसे पैदा भयो।।
केतनी दामिनी मरिहैं समूह बलात्कार मां
कौनो कठोर कानून तौ बनावौ
देसवा-विदेसवा मा सुनवैâ सबका सोचि है
अपने ई देसवा के इज्जत तौ बचावौ
ओही का सतावत जेसे पैदा भयो।
नारी का मारत हौ जेसे पैदा भयो।।

कनक कै देई
लोहा सा तन बनाय राखौ
ई खुसियां टनक कर देई
जौने दिन मिलि जाई पारस
पलभर मा कनक कर देई।
केतनौ घन परै नाहीं टूटौ
केतनौ श्रम परै नाहीं रूठौ
एक दिन धरती से सीता निकसिहैं।
तोहका राजा जनक कर देई।।
जौने दिना मिलि जाई पारस
पलभर मा कनक कर देई।
लोहा सा तन…।
दुनिया तौ है भोली-भाली
जियरा मां प्रेम है होठवा पै गारी
दुनिया का आपन हुनर देखावौ
ई बैठाई पलक पर लेई।
जौने दिना मिलि जाई पारस
पलभर मा कनक कर देई।
लोहा सम तन बनाई राखौ
ई खुशियां टनक करि देई।