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लोकमंच: फेसबुकिया ईआरी

कवि शैलेंद्र कुमार साधु की शिक्षा स्नातक (रसायन शास्त्र), आई.टी.आई. (फिटर) है। उनका जन्म स्थान पंडित महेंद्र मिश्र के मिश्रवलिया, जलालपुर, जिला-छपरा (सारण) बिहार है। वे ‘माया महेंद्र’ के लेखक हैं और ‘भ्रष्टाचारी रूप,’ गंवई शासन पर पुस्तक लिख रहे हैं। इंसानियत जिंदाबाद, मानवता जिंदाबाद जलालपुर के संस्थापक सदस्य के रूप में साधु गरीब बीमारों का आपसी सहयोग से इलाज करवाते हैं। वे रोटी बैंक छपरा के सक्रिय सदस्य हैं, जो गरीबों के लिए नि:शुल्क भोजन मुहैया कराती है, अखिल भारतीय सिंदुरिया विवाह मंच में भी सक्रिय हैं, जो गरीब के बच्चों की सामूहिक रूप से शादी कराती है।
बाह रे फेसबुकिया ईआरी
सब काम छोड़ी बबुआ लोग
रातो-दिन मुरी गरले हसत बारे
लागे जस मदारी! बाह रे.।
सपना अलगे देखी दुनियामें
लेअईले लईका बर्ग मार्क जुकर
मोबाईल ले सगरी बईठत मिले
कुछऊ नईखे ईहा चिंता फिकर।
मोबाईल लेके चल दिहले
पढ़ईया रखले ताखा पर
छोड़अ तु आपन देखअ
खिस बरे अईसन भाखा पर।
बड़ी मेहनत से दु लाईन
लिखी के पोस्ट करिले
लाईक शेयर कमेंट ला
सबके हम गोर परिले।
तनी मनी हाथ का चले
गलती से कर दिहले शेयर
मनवा मे खूब लड्डू फुटे
हमहु बनती मुखिया चाहे मेयर।
मरत गरीबके दु केला देई हम
साथे फोटउआ हम खिचाईले
लमहर-लमहर पोस्ट लिख के
समाजसेवा के ढोल पिटवाईले।
लाईक कमेंटके भूत सवार भईल
विरणो से रिहता बना बईठनी
आमने-सामने होते मिलन त
अंजान बनके खुबे अईठनी।
हबर-दबरमे ईआरी खाम्बा भरनी
देखईनी अपने के हई नायक
लाईक कमेंट देख मन गदगद भईल
समझेनी का अपने के सांसद विधायक।
अपने समाजवा के मसीहा बताई
सगरी सबके खुब अझुराईले
सभे सगरो शांति से रहो
‘साधुजी’आपन पहचान दिखाईले।
पुरवी के राजा
आजु हमहु एगो अदभुत
काथा सुनावत बानी
रहले आपन देशवाके संत
कईले गोरवन पापियन के अंत
सुनी आ इनकाके रउआ जानी।
बाबूजी बाबा शिवशंकर रहले
देवी श्री रहली जेकर माई
जोड़ जुल्म होत देख धरतीपे,
शताब्दी अनईसवा मे अवतार
लिहलेहो भाई।
गुण गेयान से भरल रहले
जस पानीसे भरल रहे समुंदर
बाणी भाखा हरमेश मिठा निकलल
मिसरवलियाके हनुमान रहले
बाबा महेन्दर।
लईकाईमे गोर काठी सुनर लागस
मुहवा मे माई सुरसती बिराजस।
गरजियन पर बिरिटिस हुकुमत के
चिकरत देखले
आखी के पानी भीतरे रह गईले
जान तेयाग पापियन से जुध्दवा
मे कुद गईले।
बोलल खाईल पियल सब मसकिल रहे
बहुत होत रहे अतेयाचार
ईहे देख बाबा नोटवा छापे लगले
पापियन शासन पर कर दिहले परहार।
तेजवा इनकर देख ओकनी के
निन्ह ना आवे बेचैन खुबे भईले
राजशाही के घमंडमे चूर ईरहले
पता लागावेला सीआईडी
जटासंकर गोपीचनके भेजऽवले।
गोपी बिरिटिस के जासूस रहले
बनीके आईल रहले बाबाके नोकर
बहुत दिन तक दु:ख सुखवा मे
साथ निभईले
हम सभनी भाई समाजमें हितैसी भईले
मालुम चलल बाद ई रहे
गोरवनके जासुसी लोफर।
भाई नियन तु रहलऽई कवन कईलऽ खेल
तहरा के हम आपन
समझनी आ
तु हमके करा दिहलऽ जेल।
जेलवा रहते बाबा अपूर्व रामायण
लिखले रहले पुरबी जनमदाता
आजादी में गान्धी सुबास आ
राम शुक्ला के साथ निभवले
कहईले भारत भाग्य बिधाता।
पुरा देश दुनिया मे घूमनी
सगरी राउर चरचा सुन खुशी से
ओतप्रोत भईनी।
महिमा अपरंपार बा राउर रहनी
देशवा के शान
गर्व से सीना चउरा करी’साधु’
करेले राउर खुबे गुणगान ।।