लोकमंच : बेटी पढ़ी ना तऽ…….

आई. कॉम, बी.ए. (साहित्यालंकार), एम.ए. (भोजपुरी) तक शिक्षित बिजेंद्र कुमार तिवारी का प्रचलित नाम बिजेंदर बाबू है वे गैरतपुर गांव पोस्ट घोरहट मठिया, जिला सारण (बिहार) के मूल निवासी हैं। उनकी प्रकाशित रचनाएं बाबुल मत करो विवाह (लघु नाटिका, हिंदी), भोटबेंचवा (नाटक, भोजपुरी), गुरु किसे बनाएं, वैâसे बनाएं सुसंस्कृत परिवार, पढ़ो रामायण (कविता) भारत मां के प्यार थे (कविता), बेइमान भिखारी (यात्रा संस्मरण) हैं। इसके साथ ही कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पत्रिकाओं में उनकी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है। उनकी अन्य उपलब्धियों में कई भोजपुरी एल्बमों एवं फिल्म में गीत लेखन‌, आकाशवाणी के विभिन्न चैनलों पर काव्य पाठ व आलेख का प्रसारण, कवि सम्मेलनों एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच संचालन है

बेटी पढ़ी ना तऽ…….
मोहरा मानवा के सारधा पुराई कइसे
बेटी पढ़ी ना तो पढ़ल बहू आई कईसे…
आपन पतोह ला तू करऽ फरमाइश
पढ़ल लिखल सुघर होंगे रखेलू तू ख्वाहिश
कहऽ, पढ़ी ना तऽ घर के चलाई कइसे
बेटी पढ़ी ना तऽ पढ़ल बहू आई कइसे……..

पढ़ल लिखल बेटी होली घर के उजाला
गउआं के शान परिवार गिनल जाला
आपन घरवा के मान उ बढ़ाई केइसे
बेटी पढ़ी ना तऽ पढ़ल बहू आई कइसे……….

बेटिए बनेली बहू कहीं समुझाई
पढ़िहें ना ई त परिवार के चलाई
तोहरा घरवा के स्वर्ग बनाई कइसे
बेटी पढ़ी ना तऽ पढ़ल बहू आई कइसे….

इहे होली सीता सावित्री जस नारी
आदिशक्ति अवरु, सुकन्या सुनारी
तोहरा घर के सितारा चमकाई कइसे
बेटी पढ़ी ना तऽ पढ़ल बहू आई कइसे…

पुलिस दरोगा बनस एस.पी. कलक्टर
राष्ट्र निर्माता बनस मास्टर हेडमास्टर
एह देशवा के सापना सजाई कइसे
बेटी पढ़ी ना तऽ पढ़ल बहू आई कइसे……

कहेले बिजेंदर सभे बेटी के पढ़ाई
घर के चिराग हई इनके जगार्इं
नाही जगिहें त देश जगमगाई कइसे
बेटी पढ़ी ना तऽ पढ़ल बहू आई कइसे……

रखिह जोगा के संसार
जिनगि के बगिया से प्रेम के पपिहरा,
पिहुकी के कहेला पुकार ए राजा, रखिह जोगा के संस्कार..

माई अउरी बाबूजी के, पूजिह चरनिया,
हरदम मनिह तू इनके बचनिया,
अपना से बड़का के शीश झुकईह
छोटकन से करीह तू प्यार, ए राजा,
रखिह जोगा के संस्कार…..

खेत खरिहानवा, दोचारी गौशाला,
पुरुखा के रीतिया के तु ही रखवाला
धरिह जोगा के ई धरोहर ए बाबू,
इहे बांटे अरजी हामार,
ए राजा ,
रखिह जोगा के संस्कार…..

रामायण गीता के ज्ञान ना भूलईह
अपना धरती मईया से नेहिया लगईहऽ
करम के महता समझब त बाबू
सुखी रही पूरा परिवार, ए राजा,
रखिह जोगा के संस्कार….
हिंदू आ मुस्लिम में, भेद ना लगईह,
सिख आ ईसाई संगे, प्रेमवा बढ़ईह,
मंदिर आ मस्जिद दूनू बाड़ें देवता
कहेला समईया पूकार, ए राजा,
रखिह जोगा के संस्कार…

तिरंगा अपना देशवा
उपर बल बा केसरिया बीचे सादा सच्चाई बा,
नीचे के हरियरका भईया धरती के अंगड़ाई बा।
एकरा संगे आपन पूरा हिंदुस्तान बाटे,
ई तिरंगा आपन देशवा के शान बाटे।।

भगत, सुभाष, चंद्रशेखर जईसन लोगवा,
एकरे ला कईल जप तप ध्यान जोगवा।
गांधी, नेहरू का दिल के अरमान बाटे,
ई तिरंगा आपन देशवा के शान बाटे।।

हिंदू मुसलमान सभे दिहले कुरबानी,
तब जाके खिलल सुनीं आपन ई निशानी।
एहमें गुथल सब बीरवन के गान बाटे,
ई तिरंगा आपन देशवा के शान बाटे।।

बीचवा के चक्र एकरा मन के लूभावे,
चउबिस गो तिल्ली बात एकही बतावे।
हरदम चलत रहीं एकर ई बयान बाटे,
ई तिरंगा आपन देशवा के शान बाटे।।

ह ई शांति के प्रतीक शक्ति बा अपरिमित,
दुनिया गावे एकर गीत, सगरो पावे इहो जीत।
एकरा आगे झुकल पूरा ई जहान बाटे,
ई तिरंगा आपन देशवा के शान बाटे।।

खिलल रहे ई आकाश, मिले शक्ति के प्रकाश
बिजेंदर करस विश्वास, जग में रही बनके खास।
एह से जूड़ल सब लोगवन के मान बाटे,
ई तिरंगा आपन देशवा के शान बाटे।।