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लोकल ट्रेनों की बढ़ी संख्या लेकिन फायदा नहीं

राज्य सरकार ने महाराष्ट्र में लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ा दिया है फिर भी पश्चिम रेलवे द्वारा सोमवार से लोकल ट्रेनों की 40 सर्विस और बढ़ाई गई हैं। पश्चिम रेलवे पर अब रोजाना 202 सर्विस चलेंगी। इस तरह मुंबई में मध्य रेलवे की सर्विस जोड़ने पर रोजाना कुल 402 सर्विस चलनेवाली हैं। रेलवे से मिले आंकड़ों के अनुसार अब प्रतिदिन यात्रियों की संख्या 1 लाख से पार हो चुकी है।
केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगी अनुमति!
मुंबई लोकल में फिलहाल राज्य के अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े स्टाफ को ही यात्रा की अनुमति मिली हुई है। इसमें मंत्रालय, स्थानीय निकाय, पुलिसकर्मी, राज्य सरकार और बीएमसी अस्पतालों के स्टाफ को यात्रा की अनुमति मिली हुई है। सोमवार को रेलवे और राज्य सरकार के बीच एक बैठक हुई, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों को भी लोकल में यात्रा की अनुमति की मांग की गई, इससे पहले बैंकिंग कर्मचारी, शेयर बाजार में काम करनेवाले कर्मचारी, मोबाइल कंपनियों से जुड़े कर्मचारी, निजी बिजली कंपनियों, कोर्ट के कर्मचारी, बीपीटी, स्टॉक एक्सचेंज इनको अनुमति नहीं मिलने पर बवाल हुआ था।
जारी रहेगी परेशानी
राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन बढ़ाने के बाद दिए गए दिशा-निर्देश में अब तक रिक्शा-टैक्सी की स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है। नए निर्देश में 2 किमी के दायरे में रहने का जिक्र हो रहा है, ऐसे में टैक्सी या रिक्शा की स्थिति में फिलहाल कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा था जबकि दो दिन पहले ही परिवहन व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों को दूर करनेवाली टास्क फोर्स की बैठक हुई थी। बैठक में रिक्शा और टैक्सी को बिना शर्त अनुमति देने की मांग की गई थी। फिलहाल ये सर्विस केवल अस्पताल, एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन तक सीमित है।
बसों पर बढ़ता बोझ
ट्रेनों में सीमित संख्या में यात्रियों को अनुमति देने और रिक्शा-टैक्सी पर शर्तें लागू करने के कारण बेस्ट की बसों में लोड बढ़ता जा रहा है। इन बसों में प्रतिदिन यात्रियों की संख्या जल्द ही दस लाख का आंकड़ा छूनेवाली है। बेस्ट प्रशासन द्वारा सर्विस की संख्या भी बढ़ाई जा रही है लेकिन दूसरी परेशानी ये भी है कि बेस्ट के क़रीब 550 कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से काफी रिकवर भी हुए हैं लेकिन इनके संपर्क में आया स्टाफ भी क्वारंटीन है। ऐसे में ज्यादा संख्या बढ़ने का मतलब है मौजूदा स्टाफ पर लोड बढ़ना। नियमानुसार केवल 50 प्रतिशत क्षमता के साथ बसें चलानी हैं लेकिन सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में इन नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है।