लोकल में यात्रियों की सुरक्षा राम भरोसे, ६ साल में स्नेचरों ने उड़ाई सवा ८ करोड़ की चेन 

 

लोकल ट्रेनों को मुंबई की लाइफ लाइन कहा जाता है लेकिन इन्हीं लोकल ट्रेनों में एक वर्ग ऐसा भी सफर करता है, जिसका मकसद रेल यात्रियों के कीमती सामानों पर हाथ साफ़ करना ही होता है। चेन स्नैचरों का यह वर्ग पिछले ६ वर्षों में लोकल ट्रेनों में यात्रियों के सवा आठ करोड़ से ज्यादा के कीमती गहने आदि चुरा चुका है अर्थात औसतन ४०,००० रुपए की चपत प्रतिदिन रेल यात्रियों को चेन स्नैचर लगाते हैं। ऐसा खुलासा आरटीआई के तहत हुआ है।

बता दें कि पिछले ६ वर्षों में मुंबई की लोकल ट्रेनों में ८ करोड़ २८ लाख २४ हजार ३९९ रुपए की चेन स्नैचिंग की शिकायतें मुंबई के विभिन्न रेल पुलिस थानों में दर्ज हुए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट शकील अहमद शेख को आरटीआई के तहत रेलवे पुलिस ने बताया है कि १ जनवरी २०१३ से लेकर दिसंबर २०१८ तक कुल  २०८४ चैन स्नैचिंग की वारदात हुई। इसमें से रेलवे पुलिस महज ३ करोड़ ३२ लाख ३९ हजार ९२१ रुपये की संपत्ति ही बरामद कर पाई है, जो कि कुल संपत्ति का महज ४० फिसदी ही है। रेलवे पुलिस विभाग के सरकारी सूचना अधिकारी एवं सहायक पुलिस आयुक्त ने आरटीआई के जवाब बताया है कि वर्ष २०१३ में चैन स्नेचिंग की कुल ६२ वारदातें हुई, जिनमें कुल २०,३७,८८५ रुपए  की संपत्ति चोरी हुई लेकिन इनमे सिर्फ  जीआरपी ने सिर्फ १७ मामले ही रेलवे पुलिस सुलझाने में सफल हुई और पुलिस महज ६,९३,२५० रुपए की संपत्ति वापस ढूंढने में सफल हुई थी। वर्ष २०१४ में चैन स्नेचिंग की ७३ वारदातों में २३,६७,७८९ रुपए की संपत्ति चोरी हुई लेकिन जीआरपी सिर्फ 31 मामले ही सुलझा सकी और ९,५३,६०७  रकम की संपत्ति बरामद की। वर्ष २०१५ में चेन स्नैचिंग की वारदातेन लगभग ४ गुना बढ़कर २४४ तक पहुँच गई, जिनमे ८६,९२,५७६  की संपत्ति चोरी हुई। इनमे 77  मामले जीआरपी ने सुलझा भी लिए लेकिन चोरी हुई संपत्ति में से सिर्फ २२,६४,०४३ रुपए की संपत्ति ही वापस मिली। वर्ष २०१६ में चेन स्नैचिंग के ३०९ मामले दर्ज हुए, जिसमें कुल १,२०,५३,३३३ रुपए की संपत्ति चोरी हुई  लेकिन जीआरपी आधे मामले भी हल नहीं कर पाई।  इस दौरान जीआरपी ने सिर्फ 123 मामलों को ही हल कर सकीय और सिर्फ ३३,७१,९०८ रुपए की संपत्ति वापस बरामद कर सकी। वर्ष २०१८ में चेन स्नेचिंग कीकुल ३४१ वारदातें हुई, जिसमें कुल  १४२९२६३१ रुपए की संपत्ति चोरी हुई। इस दौरान जीआरपी एक बार फिर फिसड्डी साबित हुई। जीआरपी सिर्फ १२८ मामले सुलझा कर ४३,३३,२५९ रुपए की संपत्ति बरामद कर सकी। वर्ष २०१८ में कुल ३१४ चेन स्नेचिंग की वारदातें हुई,जिसमें कुल १,४९,२७,२२२ रुपए की संपत्ति चोरी हुई। उल्लेखनीय यह रहा की जीआरपी ने ८० फीसदी मामलों को तो सुलझा लिया लेकिन संपत्ति सिर्फ ३०,३२,३४३ रुपए की ही बरामद कर सकी। बात लूट की करें तो वर्ष २०१३ में कुल २७३ मामले दर्ज हुए थे, जिसमें कुल १,०८,८३,९८२ रुपए के किमती सामान चोरी हुई। जिनमें जीआरपी ने सिर्फ १४४ मामले ही हल कर सकी और ४०,६५,७०६ रुपए की संपत्ति दोबारा हासिल कर सकी। वर्ष २०१४ में लूट की २५४ वारदातें सामने आई,जिसमें कुल १,०३,४६,९८८ रुपए की संपत्ति चोरी हुई। इस दौरान जीआरपी ने 133  मामले सुलझा लिए और ३,७२,८१९ रुपए की संपत्ति बरामद की। वर्ष २१५ में कुल १६० वारदाटन में ७२,१९,१३५ रुपए के कीमती सामान चोरी हुए और जीआरपी 86 मामलो को ही सुलझा सकीय तथा ३१,१५,०३६ रुपए की संपत्ति वापस हासिल कर सकी। हैरानी की बात यह है कि वर्ष २०१६ में लूट के सिर्फ 8 मामले दर्ज हुए, जिनमे ४,३६,००० रुपए की संपत्ति चोरी हुई थी। इस दरम्यान रेल पुलिस ने ६ मामले सुलझा लिए और २,५४,००० रकम की संपत्ति भी बरामद कर ली। वर्ष २०१७ में कुल २६ मामलों में ११,३८,४२२ रुपए की संपत्ति लूटी गई, जिसमे से २२ मामलोन की गुत्थी सुलझाते हुए रेलवे पुलिस ने ८,३६,५४८ रुपए की बरामद कर ली। वहीँ वर्ष २०१८ में कुल २० मामलों में १२११६०० रुपए की संपत्ति लूटी गई, जिसमें जीआरपी ने सिर्फ मामलोन को हल कर लिया और ३,९१,१०० रुपए की संपत्ति बरामद कर ली।