लोन नहीं भरा तो आयकरवाले वसूलेंगे!

देश में बैंकों की हालत खराब है क्योंकि बहुत से लोगों ने बैंकों से लोन तो ले लिए पर उसे भरा नहीं। उन्होंने खुद को दिवालिया (डिफाल्टर) घोषित कर दिया। ऐसे में पेंच यह है कि बहुत सी संपत्ति वे बैंक को बताते नहीं जिससे उसे बेचकर लोन की वसूली की जा सके। जबकि ऐसे कई संपत्ति का जिक्र आयकर रिटर्न में होता है। अब आयकर विभाग बैंक को बताएगा कि देखो इसके पास इतनी संपत्ति है ताकि लोन की वसूली आसान हो जा सके। ऐहसे में कहा जा सकता है कि अगर आपने लोन नहीं भरा तो उसे आयकरवाले वसूलेंगे।
लोन हड़पा तो पड़ेगा आईटी का लाफा!
अगर किसी ने जानबूझकर बैंकों का लोन हड़पा तो अब उसे आईटी (इनकम टैक्स) का लाफा खाने को तैयार रहना पड़ेगा। दरअसल, आईटी ने कर्जदारों के सारे बैंक खातों और संपत्तियों की सूची बैंकों से साझा करने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे जानबूझकर कर्ज न चुकाना किसी शख्स को महंगा पड़ सकता है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर विभाग को कर्ज न चुकाने वाले ऐसे डिफॉल्टरों की संपत्तियों और खातों का ब्योरा बैंकों से साझा करने को कहा है। दरअसल, कर्ज न चुकानेवालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकारी बैंकों ने इस बारे में सीबीडीटी से आग्रह किया था। इस कदम का मकसद ऐसे कर्जदारों के खिलाफ घेरा कसना और उनसे जनता के पैसे की वसूली करना है। सीबीडीटी के नए आदेश के अनुसार, कर विभाग किसी आयकरदाता के आयकर रिटर्न (आईटीआर) से यह ब्योरा निकालेगा।
आयकर विभाग के लिए नीतियां बनानेवाले सीबीडीटी ने हाल ही में अपने सभी फील्ड कार्यालयों को इस बारे में निर्देश दिया। सीबीडीटी ने कहा है कि उसे सरकारी बैंकों की ओर से कर्ज न चुकाकर बच रहे कर्जदारों की ऐसी संपत्तियों और बैंक खातों की सूचना देने के आग्रह मिले हैं। लिहाजा बैंकों से ऐसे डिफॉल्टरों की अचल संपत्तियों का ब्योरा मांगा है, जिससे वसूली आगे बढ़ाई जा सके। सीबीडीटी का मानना है कि कर्ज नहीं चुकानेवाले की संपत्तियों का ब्योरा सरकारी बैंकों को साझा किया जाना चाहिए ताकि वे उनसे कर्ज की वसूली कर सकें। बैंकों का फंसा कर्ज कुल बांटे गए लोन का १० फीसदी है।
ऐसे कर्जदारों के बैंक खातों, गारंटरों और गिरवी रखी संपत्तियों का ब्योरा साझा किया जाए। सूचना साझा करने से पहले ऐसे कर्ज चूककर्ताओं के बकाया टैक्स का भी ध्यान रखा जाएगा। कर्ज न चुकानेवाले की चल या अचल संपत्ति की बिक्री से प्राप्त रकम के इस्तेमाल से पहले बैंक आयकर अधिकारी से एनओसी लेंगे।