लो चली मैं, मुंबई का किनारा छोड़ के मछलियों का पलायन शुरू

मौसम में बदलाव का असर सभी पर पड़ रहा है और अब इसका असर समुद्र पर भी पड़ने लगा है। इसी के चलते इन दिनों समुद्र में खलबली मची हुई है। मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों ओडोनस नाइजर नामक मछली ने समुद्री मछलियों के बीच खलबली मचा रखी है, जिसके चलते मछलियां मुंबई का किनारा छोड़कर कहीं और भाग रही हैं। ओडोनस नाइजर मछली अपनी कद-काठी में भले ही ६ से ८ सेंटीमीटर ही है लेकिन ये मछली अपने कद और काठी से बड़ी मछलियों को घात पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। दिखने में मछली काली, दांत छोटे और नुकीले हैं जो जाल में फंसी अन्य समुद्री मछलियों के पैर, पूंछ, मुंह और शरीरों को नुकसान पहुंचा रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ओडोनस नाइजर के डर से मछलियों ने पलायन शुरू कर दिया है।
समुद्री मछलियों पर शोध करनेवाले वैज्ञानिकों का कहना है कि १९७७ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ओडोनस नाइजर नामक यह मछली पहले समुद्री सतह से ७० से १२५ मीटर गहरे पानी में मिलती थी लेकिन मौसम में बदलाव के कारण अब यह मछली मालवण और रत्नागिरी में समुद्री सतह से ऊपर २५ से ४० मीटर पर मिल रही है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि सार्डिन नामक मछली यहां नहीं मिलती थी लेकिन यह मछली भी यहां मिलने लगी है। १० साल पहले फिश वैज्ञानिक डॉ. विवेकानंदन ने इस पर रिसर्च किया तो पता चला कि समुद्र के नीचे का तापमान बढ़ रहा है, जिसकी वजह से सार्डिन मछलियां यहां दिखाने लगी हैं। उन्होंने भविष्यवाणी भी की थी कि जल्द ही यह मछली बांग्लादेश के समुद्री इलाके में मिलेगी और कुछ महीने के बाद सार्डिन मछलियां वहां के समुद्र में मिलने लगीं। फिलहाल विवेकानंदन `वे ऑफ बंगाल’ परियोजना के सलाहकार हैं। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरी एजुकेशन के पूर्व फिश वैज्ञानिक एस.के. चक्रवर्ती ने बताया कि समुद्र की लहरों का पैटर्न बदला है, जिसके कारण ओडोनस नाइजर नामक मछली अपनी समुद्री सतह से ऊपर आ गई है, जो अन्य मछलियों को नुकसान पहुंचा रही है। हमारे ईस्ट कोस्ट में जो मछलियां मिलती थीं वे पलायन नहीं कर रही हैं बल्कि यहां वहां तितर-बितर हो गई हैं। चक्रवर्ती के मुताबिक हमारे ७२० किलोमीटर के कोस्ट में पहले सालाना ६ लाख टन मछली मिलती थी जो अब ३ से ४ लाख टन है। इसकी वजह मछलियों के बच्चे देने से पहले ही मछुआरों द्वारा शिकार कर लेना है। पापलेट, सुरमई, घोल जैसी मछलियां जिनकी ज्यादा डिमांड है, वे समुद्र में कम हो गई हैं।