" /> लौटने लगी है मजदूरों की जिंदगानी : अब उत्तर भारतीय मजदूर नहीं जाना चाहते हैं घर

लौटने लगी है मजदूरों की जिंदगानी : अब उत्तर भारतीय मजदूर नहीं जाना चाहते हैं घर

बढ़ाकर मिल रहा है वेतन
कंपनियों में दी जा रही कैंटीन की सुविधा
सरकारी आदेशों से मिली राहत
कोरोना के कारण एक ओर जहां लाखों की संख्या में उत्तर भारतीय मजदूर राज्यों से अपने गांव जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी उत्तर भारतीय मजदूर हैं जो वापस अपने गांव नहीं जाना चाहते हैं। इसके पीछे वजह है उनकी बढ़ी हुई पगार सहित अन्य सुविधाएं। उन्हें हर माह दो से तीन हजार रुपये बढ़कर मिले हैं।
गौरतलब हो कि लॉकडाउन के बाद सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की वजह से कंपनियां मजदूरों की ज्यादा चिंता कर रही हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मजदूर काम कर रहे हैं। इसके अलावा कंपनी में कैंटीन की व्यवस्था भी मजदूरों के लिए भी मुफ्त में की गई है। मार्च महीने का पूरा वेतन उन्हें दिया गया है। इसके अलावा पीएफ का पैसा भी पगार से नहीं कटने से मजदूरों का आर्थिक फायदा होने लगा है। इसीलिए अब कई ऐसे भी उत्तर भारतीय मजदूर हैं जो गांव वापस नहीं जाना चाहते। पुणे-सोलापुर हाइवे पर ७० किलोमीटर दूर के पास कुरकुम्भ इंडस्ट्रियल जोन में काम करने वाले सिडको के मजदूर वापस घर नहीं जाना चाहते हैं। एमपी के रीवा जिले के रहने वाले ज्वाला प्रसाद केवट ने कहा कि वे मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रहने वाला है। कोरोना की वजह से लोग बहुत डर गए हैं, इधर-उधर भाग रहे हैं। हमने ऐसे जाने की प्लानिंग नहीं की। हमें यहां हर चीज की सुविधा दी जा रही है। पगार, पानी सब ठीक से मिल रहा है। यही नहीं हमें हर माह पगार के अलावा तीन हजार रुपये बढ़ाकर मिल रहे हैं। यहां हम सुरक्षित हैं। इसलिए भीड़-भाड़ में जाने का तय नहीं किया है। बिहार के गया जिले के महेंद्र ठाकुर ने कहा, ‘मैं आर्गेनिक कंपनी में काम करता हूं। १५ साल से यहां रहता हूं। कोरोना की वजह से हम घर जाना नहीं चाहते हैं। वहां जाएंगे तो फंस जाएंगे। कंपनी तो पगार दे रही है ऊपर से कुछ पगार बढ़ा कर भी दिए है। पुणे के पास चाकन और पिंपरी चिंचवाड़ औद्योगिक क्षेत्र में जाकर कुछ कंपनियों में काम करने वाले मजदूरों से व्यवस्था और पगार के बारे में बात की तो पता चला कि ११,००० कंपनियों में से तकरीबन ६००० कंपनियां फिर से शुरू हो गई हैं। उत्पादन का काम भी शुरू हो गया है।