" /> लौटे मजदूर बोले  धन्यवाद उद्धव जी!

लौटे मजदूर बोले  धन्यवाद उद्धव जी!

पस्त और बेहाल हजारों मजदूर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों से लौटे हैं। मजदूरों की जुबान पर खराब हालात में भी महाराष्ट्र सरकार के बर्ताव को लेकर तारीफ है तो गुरबत में किराया वसूलने को लेकर गुस्सा भी। उनका कहना है कि पास में दमड़ी न होने पर महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने जेब से पांच लाख रुपए देकर उनका किराया भरा तो कई जगह मुंबई पुलिस ने लाउडस्पीकर से एलान कर उन्हें बटोर कर स्टेशन पहुंचाया। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा देश के गृहमंत्री व केंद्र सरकार से मजदूरों को वापस भेजने को लेकर की गई बातचीत व प्रयास की भी वो सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे व महाराष्ट्र सरकार के ही प्रयास थे कि सबसे पहले वापसी वहां से शुरू हुई, जबकि गुजरात में फंसे उनके मजदूर साथी अब भी लाठियां खा रहे हैं और जो निकल भी गए वो मध्यप्रदेश की सीमा से दोबारा वापस भेजे जा रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि केंद्र के आदेश के बाद सबसे ज्यादा तत्परता तो महाराष्ट्र सरकार ने दिखाई है, जिसने रवानगी के तुरंत इंतजाम कर दिए।

किराए को लेकर पक्ष-विपक्ष से लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे युद्ध के बीच घर लौटे मजदूरों का कहना है कि केंद्र व राज्य की लड़ाई अपनी जगह पर लेकिन इतना सत्य है कि वे पूरा ही नहीं, बल्कि कुछ ज्यादा ही किराया चुकाकर लौटे हैं।
घर वापसी कर रहे मजदूरों की शिकायत खुद अपने राज्य से भी है, जिसने इन्हें कई जगहों पर बेसहारा होकर भटकने को मजबूर कर दिया। हालात ये हैं कि उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे झांसी जिले में दो दिनों में हजारों की तादाद में बाहर से लौट रहे मजदूर फंसे हुए हैं। अचानक पहुंचे उन मजदूरों को झांसी में रोक लिया गया और आगे नहीं जाने दिया गया। बिना इंतजाम के रोके गए इन लोगों को २४ घंटे तक खाने और पानी के लिए भटकना पड़ा। जहां बड़ी तादाद में मजदूरों को झांसी की भोजला मंडी में रखा गया, वहीं उनसे भी ज्यादा लोग अलग-अलग जगहों पर फंसे रहे। इनमें से ज्यादातर मजदूर बसों द्वारा गुजरात से पहुंचे हैं।

गौरतलब है कि बीते पांच दिनों से देश के विभिन्न राज्यों के मजदूर जो लॉकडाउन के चलते मुंबई, नासिक, भिवंडी, गुजरात के सूरत, बड़ौदा, अमदाबाद जैसे शहरों में फंस गए हैं, उन्हें वापस घर भेजा जा रहा है। इनमे से सबसे ज्यादा मजदूर उत्तर प्रदेश के हैं। बिहार और यूपी के कामगार बड़ी तादाद में मुंबई में काम करते हैं। इन सबको अब घर वापस भेजा जा रहा है। इन मजदूरों का कहना है कि मुंबई में उन्हें खाना-पानी तो मिल रहा था, पर लॉकडाउन के चलते अब कमाई के साधन बंद हो गए हैं। विपत्ति के इस समय में ये सब जल्द-से-जल्द अपने घर पहुंचना चाहते थे। उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि अब तक विभिन्न शहरों में फंसे ५५,००० मजदूर बीते पांच दिनों में वापस लाए जा चुके हैं और जल्दी ही एक लाख और लोगों को वापस लाया जाएगा।

इससे पहले बीते हफ्ते उत्तर प्रदेश सरकार ने बसें लगाकर हरियाणा में फंसे १२,००० से ज्यादा मजदूरों को वापस बुलाया है। बाहरी मजदूरों के अलावा प्रदेश सरकार विभिन्न शैक्षणिक केंद्रों में फंसे छात्रों को भी वापस घर भेज रही है। कोटा से ८००० छात्रों को वापस बुलाने के बाद प्रयागराज से भी छात्रों को उनके घर भेजा गया है। उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों में बड़ी तादाद में हरियाणा से मजदूरों को वापस लाया गया है। इसके अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फंसे लगभग २५ हजार छात्रों को घर भेजने की तैयारी योगी सरकार ने की है। दरअसल, ग्रेटर नोएडा में ५ और नोएडा में २ यूनिवर्सिटी, लगभग ५० कॉलेजों के साथ इन दोनों शहरों में बड़ी संख्या में छात्र हॉस्टलों, प्राइवेट हॉस्टल और किराए के कमरों में रहते है। लॉकडाउन के पहले ही विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने शिक्षण कार्य बंद करके अपने से संबद्ध हॉस्टलों से हजारों छात्रों को उनके घर भेज दिया था। परंतु किराए के घरों में रहनेवाले छात्र पैसा खत्म होने और खाने-पीने की बड़ी दिक्कत से परेशान होकर अपने परिवार के पास जाना चाहते हैं। नोएडा प्रशासन के अनुमान के अनुसार लगभग २५ हजार ऐसे छात्र नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हैं। अब योगी सरकार बसें लगाकर इन छात्रों को घर पहुंचाएगी।

खाली होते खजाने का सहारा सिर्फ शराब
उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के कई राज्यों में शराब की दुकानों को खोलने की हर तरफ आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया से लेकर अखबारों व चैनलों में शराब की दुकानों पर भीड़ दिखाकर इसे गलत कदम करार दिया जा रहा है। हालांकि इसके पीछे राज्य सरकारों की मजबूरी कहीं ज्यादा है। दरअसल, जीएसटी आने के बाद राजस्व के नाम पर प्रदेश सरकारों के पास पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट के अलावा शराब ही खजाना भरने का एकमात्र सहारा रह गया है। लॉकडाउन के बीच डीजल-पेट्रोल की बिक्री बुरी तरह घटी है। ऐसे में कम-से-कम उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले सूबे के पास शराब की बिक्री खोलने के अलावा कोई और चारा भी नहीं बचा था।
अप्रैल माह की यूपी सरकार की वित्त विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्व प्राप्ति में वर्ष २०२०-२१ के लिए १,६६,०२१ करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित है। अप्रैल महीने में २०१२.६६ करोड़ रुपए की ही आय प्राप्त हुई है। ये निर्धारित वार्षिक लक्ष्य का मात्र १.२ प्रतिशत है। इसी प्रकार टैक्स के रूप में राजस्व के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष २०२०-२१ के लिए निर्धारित वार्षिक लक्ष्य १९,१७८.९३ करोड़ रुपए के सापेक्ष महज २८२.१२ करोड़ रुपए की ही प्राप्ति हुई है, जो वार्षिक लक्ष्य १.५ प्रतिशत है ।

अप्रैल महीने का यूपी का कलेक्शन देखें तो जीएसटी का लक्ष्य ४९३०.२८ है और प्राप्ति कुल १४४८.६३ (२९.४ प्रतिशत) हुई है। वैट का लक्ष्य २,४०० करोड़ था और प्राप्ति ४०१.२० यानी कुल १६.७ प्रतिशत प्राप्ति हुई है। आबकारी विभाग ने अप्रैल माह का शराब बिक्री का लक्ष्य ३५६०.१३ करोड़ रुपए का तय किया था, जबकि प्राप्ति ४१.९६ करोड़ हुई है, जो १.२ प्रतिशत ही है। रजिस्ट्री आदि के जरिए स्टाम्प निबंधन विभाग ने १६८६.९४ लक्ष्य तय किया था, जबकि प्राप्ति १५.६० यानी ०.९ प्रतिशत हुई है।

हालांकि लॉकडाउन के बाद शराब की बिक्री खुलने के पहले ही दिन उत्तर प्रदेश में कमाई के मामले में होली-दीवाली का रिकॉर्ड टूट गया है। अकेले सोमवार को प्रदेश के विभिन्न शहरों में करीब ३०० करोड़ रुपए से ज्यादा की शराब बिकी है। लॉकडाउन में ४३ दिन बंद रहने के बाद दुकानों के खुलने पर राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा ६.५ करोड़ रुपए की शराब बिकी है। वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, गोरखपुर, प्रयागराज जिलों में सामान्य दिनों के मुकाबले दो गुना ज्यादा तक शराब बिकी है। शराब की दुकानों के खुलते ही उमड़ी भीड़ और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ते देख प्रदेश सरकार ने कई तरह के प्रतिबंध मंगलवार से लगा दिए हैं। कई जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए पुलिस के बड़े अधिकारियों को खुद उतरना पड़ा है। उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ज्यादातर पुलिस को शराब की दुकानों पर भीड़ को नियंत्रित करने में लगाना पड़ा है। नए नियमों के मुताबिक आबकारी विभाग ने शराब खरीदने की सीमा तय कर दी है। शराब की दुकानों पर अनावश्यक भीड़ को रोकने के लिए दुकानदारों को टोकन सिस्टम लागू करने को भी कहा गया है। शराब की होम डिलीवरी की इजाजत नहीं दी गई है।