लौह पाद का शनि  करता धन की हानि

गुरुजी, मेरी कुंडली में दोष क्या है कृपया मार्गदर्शन करें?
-श्याम शर्मा
(जन्म २० नवंबर १९६९ समय रात्रि ३: २० पाली, राजस्थान)
श्यामजी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं मीन राशि में हुआ है। लग्नेश एवं कर्मेश बुध अस्त हो करके पराक्रम भाव में सूर्य के साथ बैठकर बुधादित्य योग बना रहा है। बुधादित्य योग के कारण आप हर कार्य में निपुण पराक्रमी एवं पुरुषार्थी लेकिन बुध ग्रह अस्त होने के कारण आप को पूर्णतया फल प्राप्त नहीं हो पा रहा है। पराक्रमेश मंगल उच्च राशि का है, जो आपको पुरुषार्थी एवं हर कार्य को पूर्ण करने की क्षमता प्रदान करता है लेकिन मंगल अपने नीच राशि से लाभ भाव एवं व्यय भाव को देखता है। इस योग के कारण परिश्रम का पूर्ण फल प्राप्त न कर पाना अथवा समय-समय पर कर्जदार भी होने का संकेत दे रहा है। इसका मूल कारण है कि आपकी कुंडली में `महापद्मनामक कालसर्प’ योग बन रहा है। इस योग की वैदिक विधि से पूजन कराने से आपके जीवन में विकास का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। जीवन की अन्य गहराइयों को जाने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना आवश्यक है।
गुरुजी, मेरी पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है कोई उपाय बताएं ?
-अनिल यादव
(जन्म ७ अप्रैल २००७ दिन २: १० बजे मालाड, मुंबई)
अनिलजी, आपका जन्म कर्क लग्न एवं वृश्चिक राशि में हुआ इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। आपकी कुंडली में सप्तमेश अष्टमेश होकर के शनि बैठे हुए हैं। आपकी कुंडली में पंचमेश एवं कर्मेश मंगल अष्टम स्थान में राहु के साथ में बैठकर के अंगारक योग एवं कर `कर्कोटक नाम का कालसर्प योग’ बना दिया है। इस कारण आपको बार-बार दुर्घटना का भी भय बना रहता है तथा स्वास्थ्य के प्रति चिंता भी बनी रहती है। वाणी पर नियंत्रण की नहीं रख पाते हैं। वाणी पर नियंत्रण न रखने के कारण बनता हुआ काम भी आपका बिगड़ जाता है। परिश्रम बहुत करते हैं लेकिन फल की प्राप्ति कम होती है शिक्षा के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए अंगारक योग कर्कोटक नाम के नाम के योग की पूजा आवश्यकता ह।ै वैदिक विधि से पूजन कराने पर शिक्षा का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। जीवन के अन्य गहराइ को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
प्रॉपर्टी का काम करता हूं। काम ठीक से नहीं चल रहा है। कोई उपाय बताएं ?
-जनार्दन
(जन्म११मार्च-१९६४ दिन१.२० बजे पाली, राजस्थान)
जनार्दनजी, आपका जन्म मिथुन लग्न मकर राशि में हुआ है। आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि की साढ़ेसाती लाभकारी भी होती है लेकिन वर्तमान समय में आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती लौह पाद में है। ज्योतिष शास्त्र में यह बताया है कि लौह पाद का शनि धन की हानि एवं व्यग्रता देता है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। लग्न में ही उच्च राशि का राहु एवं सप्तम स्थान पर उच्च राशि का केतु बैठकर आप के कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग बना दिया है। इस योग के दुष्प्रभाव से आपको अपने व्यक्तित्व के निर्माण के लिए एवं व्यापार के विकास के लिए काफी संघर्षपूर्ण बना रहता है। इसका प्रभाव गृहस्थ जीवन पर भी पड़ता है। परिवार के सदस्यों से भी नुकसान मिलता है। मानसिक परेशानी पीछा नहीं छोड़ती है। आपकी कुंडली में उपस्थित अनंतनामक कालसर्प योग की शांति जीवन में कम से कम पांच बार होना आवश्यक माना जाता है। परेशानी को दूर करने के लिए वर्तमान में उक्त पूजन कराते हैं तो व्यापार का मार्ग प्रशस्त हो सकता हैं। जीवन के अन्य गहराइयों को जानने के लिए सम्पूर्णजीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती है। उपाय बताएं ?
-पूनम विश्वकर्मा
(जन्म १६ सितंबर १९९२ दिन में ४:५० रायगढ़ छत्तीसगढ़)
पूनमजी, आपका जन्म मकर लग्न में एवं मेष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली में लग्न में ही शनि स्वगृही हो करके बैठा है अत: आप स्वाभिमानी प्रकृति के हैं तथा अन्याय के प्रति आपको क्रोध आना चाहिए। आपका जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ है। भरणी नक्षत्र में ही राहु ग्रह का जन्म माना जाता है। अत: आप समय-समय पर कनफ्यूज भी हो जाती होंगी। सही निर्णय नहीं ले पाती होंगी। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया इस समय चंद्रमा की महादशा चल रही है। चंद्रमा सप्तम भाव का स्वामी है जो कि आपके कार्य को अनुकूलता नहीं प्रदान करता है। आपके भाग्य भाव का स्वामी बुध वह भी अस्त हो करके भाग्य भाव में ही बैठा है। बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए पन्ना रत्न धारण करें। जीवन के अन्य गहराई को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं। धीरे-धीरे समय अनुकूल हो जाएगा ।
मेरे माता-पिता शादी के लिए दबाव दे रहे हैं, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। क्या करूं?
-प्रमोद तिवारी
(जन्म १७ फरवरी १९९१ दिन १०:१५ बजे बिहार)
प्रमोदजी, आपका जन्म मेष लग्न एवं मीन राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। पंचम भाव का स्वामी सूर्य लाभ भाव में सप्तमेश शुक्र के साथ में बैठा है और पिता स्थान का स्वामी शनि स्वगृही होकर के दशम भाव में बैठा है। इस प्रकार के ग्रहों के योग के कारण आप माता-पिता के आदेशों का पालन करते हुए कार्य करेंगे तो आपके जीवन के विकास के मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। आप विवाह करें धीरे-धीरे विकास का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। विकास में आनेवाली अड़चनें दूर करने के लिए कालसर्प योग की पूजा जरूर कराएं और जीवन की और अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।