‘वंचित’ क्यों फूटी?

चुनाव आयोग का पता नहीं लेकिन चंद्रकांत पाटील ने विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी है। किसी भी क्षण आचार संहिता लगेगी और १५ से २० अक्टूबर के बीच चुनाव होंगे, ऐसी घोषणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने की है। सरकार में चंद्रकांत दादा दूसरे क्रमांक के कद्दावर नेता हैं और उनके समर्थक उन्हें ‘भावी मुख्यमंत्री’ के रूप में देखते हैं इसलिए पाटील जो कहते हैं उस पर विश्वास करना चाहिए। चुनाव तो होंगे ही और विधानसभा भंग करके नई विधानसभा का आना भी संविधान का एक अंग है। इसलिए पाटील द्वारा घोषित की गई तारीखें ‘गुप्त’ नहीं हैं। लेकिन सीटों का बंटवारा, आघाड़ी, बातचीत, पक्षांतर और इससे संबंधित मेंढकों की कलाबाजी रहस्यमय और गोपनीय है। हमें आश्चर्य होता है प्रकाश आंबेडकर और मियां ओवैसी की दोस्ती में पड़ी दरार का। लोकसभा चुनाव के दौरान मियां ओवैसी और प्रकाश आंबेडकर ‘एक जान हैं हम’ की तरह गलबहियां डाले घूमते थे। एक सभा में तो ओवैसी ने प्रकाश राव को अपनी बांहों में उठा लिया था। उनकी वंचित बहुजन आघाड़ी उस समय तेजी में थी। हालांकि इसी वंचित बहुजन आघाड़ी में अब फूट पड़ गई है। एमआईएम के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष सांसद इम्तियाज जलील ने गत सप्ताह वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ गठबंधन नहीं करने की घोषणा की। प्रकाश आंबेडकर ये कह रहे थे कि जब तक एमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी नहीं कहते तब तक हमारा गठबंधन कायम है। अब खुद ओवैसी मियां ने जलील की बातों को दोहराया है। ओवैसी ने कहा है कि जलील प्रदेशाध्यक्ष हैं और महाराष्ट्र के संदर्भ में उन्हें निर्णय लेने का अधिकार है तथा उनका निर्णय ही अंतिम निर्णय होगा। एक प्रकार से वंचित और एमआईएम गठबंधन के टूटने पर उन्होंने मुहर लगा दी है। अब प्रकाश आंबेडकर कौन-सा कदम उठाते हैं ये देखना होगा। प्रकाश आंबेडकर बुद्धिमान जरूर हैं लेकिन उनके हेकट स्वभाव के कारण ये आघाड़ी ज्यादा दिन नहीं टिकेगी, ऐसे कयास लगाए जा रहे थे। ये कयास इतनी जल्दी सच साबित होंगे, ऐसा नहीं लगा था। लोकसभा चुनाव में ‘वंचित’ ने कांग्रेस-राष्ट्रवादी को जोरदार झटका दिया लेकिन विधानसभा चुनाव के पहले एमआईएम और आंबेडकर के वंचित में बिगाड़ हो गई। एमआईएम के प्रदेशाध्यक्ष इम्तियाज जलील ने कहा, ‘आरएसएस वाले आंबेडकर के कान भर रहे हैं इसलिए आंबेडकर ने एमआईएम को लटकाए रखा है।’ अगर जलील का कहना सच होगा तो सवाल ये है कि इस बार प्रकाश आंबेडकर किसकी ‘बजाएंगे’। कांग्रेस-राष्ट्रवादी आघाड़ी ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में प्रकाश आंबेडकर भाजपा-शिवसेना की मदद कर रहे हैं। ये आरोप खोखला था। ‘वंचित’ ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बहुत वोट बटोरे लेकिन मुस्लिम समाज के एकमुश्त वोट वंचित की ओर नहीं मुड़े। उनमें से अधिकांश वोट कांग्रेस-राष्ट्रवादी को मिले। उसी दौरान युति को भी वोट मिले। इससे ये भ्रम मिट गया कि दलितों और मुसलमानों के ‘एकमुश्त’ वोटों पर राजनीति की जा सकती है। महाराष्ट्र में एक जातीय या एक धर्मीय राजनीति नहीं की जा सकती। वंचित आघाड़ी ने ‘बहुजन’ शब्द पर जोर भले ही दिया हो लेकिन उसे बहुजनों का कितना साथ मिलेगा? राज्य का हर दल बहुजनों के नाम पर रोटी सेंकता है। शिवसेना जैसा दल स्थापना से ही बहुजनों के सामान्य कार्यकर्ताओं को बल देता आ रहा है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, महात्मा फुले और छत्रपति शाहू जैसे महान लोगों ने जो ‘बहुजनों’ की आवाज बुलंद की इसके पीछे कोई जातिगत विचार नहीं था। मायावती की पार्टी में भी ‘बहुजन’ है। उनकी पार्टी डॉ. आंबेडकर के विचारों को लेकर जितनी उत्तर हिंदुस्थान में बढ़ी और सत्ताधारी बनी, उतनी बहुजनों की राजनीति महाराष्ट्र में न मायावती को रास आई और न ही प्रकाश आंबेडकर को और न ही रिपब्लिकन गुटों को। रिपब्लिकन के कई गुटों ने एक साथ आना तो छोड़िए, एक-दूसरे की टांग खींचने में ही उन्होंने अपनी धन्यता मान ली। वंचितों का दुख हमेशा किसी एक पर आश्रित रह गया इसीलिए प्रकाश आंबेडकर का ‘स्वबल पर एकला चलो रे’ का नारा महत्वपूर्ण लगता है। वे कांग्रेस के सामने नहीं गए और उन्होंने राष्ट्रवादी को छोड़कर कांग्रेस को ही १४४ सीटों की ‘ऑफर’ दे डाली। ये आत्मविश्वास कहां से आता है, यह रहस्य ही है। लोकसभा चुनाव के दौरान वंचित बहुजन आघाड़ी और एमआईएम के गठबंधन की जोरदार चर्चा हुई। हालांकि अब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के पहले ‘वंचित’ में फूट क्यों पड़ी इस पर चर्चा हो रही है। कांग्रेस को लोकसभा में विरोधी पक्ष नेता पद के लायक भी सीटें नहीं मिल पार्इं। अब महाराष्ट्र विधानसभा में भी अलग क्या होगा? मुख्यमंत्री फडणवीस ने विरोधी पक्ष नेता कौन होगा यह चुनाव के पहले ही घोषित कर दिया है। ‘इस बार विरोधी पक्ष नेता वंचित बहुजन आघाड़ी का ही होगा’ ऐसा फटका मुख्यमंत्री ने मारा है। चंद्रकांत पाटील ने चुनाव की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने विरोधी पक्ष नेता की घोषणा की। जब तक बाजार में गर्मी है तब तक इस उठा-पटक का आनंद लेते रहेंगे।