वजन और औकात

वजन का औकात से सीधा संबंध है। जिसकी जितनी बड़ी औकात होगी, उसका उतना ही वजन होगा ऐसी आम धारणा है। प्रभावशाली आदमी वजनदार होता है। कुछ लोगों की बात में वजन होता है और उनकी बात कोई नहीं टालता। सरकारी कार्यालयों में जब तक फाइलों पर वजन न रखा जाए, तब तक वे आगे नहीं सरकतीं ऐसी परंपरा है। यहां वजन से तात्पर्य रुपए से है अर्थात रुपए में भी वजन होता है। फिलहाल रुपए काफी वजनदार हो गया है, उसका वजन डॉलर के मुकाबले सत्तर किलो तक पहुंच गया है लेकिन आश्चर्य की बात है कि वजन बढ़ने के साथ रुपए की औकात कम होती जा रही है। यह एक अपवाद है। सन् दो हजार चौदह में जब ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन हुआ था तब रुपए का वजन ५७ किलो था और जादूगर प्रधानमंत्री के आने पर वह और स्लिम होगा, ऐसी मान्यता थी क्योंकि नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री फिटनेस और सफाई के बड़े पक्षधर थे लेकिन रुपया प्रधानमंत्री के रहते ही सत्तर किलो का हो गया और उसकी औकात दो कौड़ी की हो गई। अब बेडौल रुपए को कोई नहीं पूछ रहा। रुपया सुबक रहा है। बेडौल रुपया अब किसी भी तरह सुपरफिट और सुपरहिट अमेरिकी डॉलर का मुकाबला नहीं कर पा रहा है। डॉलर उसे तरह तरह की कलाबाजियां खिला रहा है। यह प्रबल आशंका है कि कहीं रुपया सौ किलो का न हो जाए। अगर रुपया सौ किलो का हो गया तो उसके घुटने जवाब दे जाएंगे और वह धड़ाम से गिर पड़ेगा। अभी रुपया अपने ही वजन से लड़खड़ा रहा है तो उसे बैसाखियों का सहारा दिया जा सकता है लेकिन अगर एक बार वह गिर पड़ा तब तो उसे टिकटी पर बांधकर दाहगृह ले जाने के सिवा कोई मार्ग नहीं बचेगा।