" /> विरार-अलीबाग कॉरिडोर में यूटिलिटी कॉरिडोर

विरार-अलीबाग कॉरिडोर में यूटिलिटी कॉरिडोर

`यूटिलिटी कॉरिडोर’ से गुजरेगी बिजली, तेल, गैस कंपनियों की लाइन!
१२८ किमी लंबी विरार-अलीबाग कॉरिडोर परियोजना एमएमआरडीए की बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में से एक है। एमएमआरडीए की अधिकतर परियोजनाओं की लागत खर्च राज्य सरकार स्वयं उठा रही है। सरकार पर परियोजनाओं के बोझ का खर्च कम पड़े इसलिए एमएमआरडीए ने बीकेसी की जमीन को लीज पर दिया है। इससे मिलनेवाले पैसों को मेट्रो परियोजनाओं में लगाने जैसे उचित कदम उठाए गए हैं। एक बार फिर एमएमआरडीए ने विरार-अलीबाग कॉरिडोर की मदद से सरकारी तिजोरी भरने की योजना बनाई है। १९,००० करोड़ रुपए की प्रस्तावित लागत से बनने जा रहे ८ लेन वाले इस कॉरिडोर के दोनों बगल में एमएमआरडीए की योजना यूटिलिटी कॉरिडोर का निर्माण कर राजस्व कमाई की है। इसलिए कॉरिडोर से सटकर दोनों दिशाओं में ७.५ मीटर का ‘यूटिलिटी कॉरिडोर’ बनाया जाएगा। इस यूटिलिटी कॉरिडोर पर बिजली, पेट्रोल, गैस जैसी कंपनियां अपनी लाइन ले जा सकती हैं। इसकी एवज में कंपनियां एमएमआरडीए को एक निर्धारित राशि देंगी। इस तरकीब से परियोजना में लगाई गई धनराशि को प्राप्त करने में एमएमआरडीए को मदद होगी।

अलीबाग कॉरिडोर एमएमआरडीए की बहुप्रतीक्षित योजनाओं में से एक है। १९,००० करोड़ रुपए की प्रस्तावित लागत से बनाने जा रहे ८ लेनवाले इस कॉरिडोर के दोनों बगल में एमएमआरडीए की योजना यूटिलिटी कॉरिडोर तैयार कर राजस्व की कमाई करने की है। इसलिए कॉरिडोर के दोनों अंतिम दिशा की ओर बगल में ७.५ मीटर का `यूटिलिटी कॉरिडोर’ बनाया जाएगा। इस यूटिलिटी कॉरिडोर पर बिजली, पेट्रोल, गैस जैसी कंपनियां अपनी लाइन ले जा सकती हैं। इसके एवज में कंपनियां एमएमआरडीए को एक निर्धारित राशि देंगी। इस तरकीब से परियोजना में लगाई गई धनराशि को पूर्णप्राप्त करने में एमएमआरडीए को मदद मिलेगी। यहां दिलचस्प बात यह है कि मुंबई -नागपुर सुपर कम्यूनिकेशन एक्सप्रेसवे पर भी सड़क के दोनों ओर `यूटिलिटी कॉरिडोर’ के लिए तीन मीटर की जगह रखी गई है, ताकि इससे होनेवाली आय अर्जित की जा सके।
बता दें कि एमएमआरडीए अलीबाग-विरार कॉरिडोर परियोजना के लिए नोडल एजेंसी है। परियोजना के बारे में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, `हम उन १०४ गांवों में भूमि का सीमांकन करने की प्रक्रिया में हैं, जहां से ये कॉरिडोर गुजर रहा है। इनमें से ६१ गांवों का सीमांकन पूरा हो चुका है। एक बार शेष गांवों का सीमांकन हो जाने के बाद, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
भूमि अधिग्रहण के लिए लगभग १५,६१७ करोड़ रुपए रखे गए हैं, जिसे २१ नवंबर, २०१८ को पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य द्वारा बैठक में मंजूरी दी गई थी।
जानकारी के मुताबिक इस परियोजना को चार चरणों में तैयार किया जाएगा। इस परियोजना के लिए विश्व बैंक से फंड लिया जाएगा। इसके अलावा बैंक ने एमएमआरडीए को प्रत्येक चरण के लिए ५०० मिलियन डॉलर से अधिक की लागत से चार चरणों में परियोजना के काम को करने के लिए कहा था। उसी को जून २०१८ की बैठक में मंजूरी दी गई थी।
१२८ किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सड़क में वसई के नवघर से अलीबाग के चिरनेर तक सड़क के बीच में एक मेट्रो कॉरिडोर होगा, १३ इंटरचेंज, ४८ अंडरपास और ४१ पुल होंगे।