विरोधियों को आत्मचिंतन की जरूरत

नरेंद्र मोदी फिर प्रधानमंत्री बन रहे हैं। वो भी विशाल बहुमत और पर्वत समान ऊंची लोकप्रियता की लहर पर आरूढ़ होकर वे प्रधानमंत्री बन रहे हैं। यही आज राष्ट्र की जरूरत थी। जनता संकट का मुकाबला हमेशा करती रहती है। विगत ६ महीनों से कश्मीर की सीमा अशांत है यह सच है। लेकिन बालाकोट पर मोदी ने हवाई हमला करवाया। यूनो की सुरक्षा परिषद में काफी कोशिशों के बाद मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने को मजबूर कर आतंकवाद पर एक बहुत बड़ी जीत हासिल की। जिसके चलते पाकिस्तान की गर्दन के इर्द-गिर्द फांस खुद-ब-खुद कसती चली गई। देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून और व्यवस्था चरमरा जाए, ऐसा काम विरोधियों की ओर से जारी था। प्रकृति का कोप तथा तेल के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों में होनेवाले उतार-चढ़ाव के कारण महंगाई बढ़ रही थी। विरोधी इसी का फायदा उठा रहे थे। ऐसे राष्ट्रीय संकट के मौके पर मोदी को देश की जनता ने अभूतपूर्व सफलता देकर सत्ता में बैठाया और देश को अराजकता की खाई में जाने से बचा लिया। इसमें नियती का ही हाथ है यह स्पष्ट दिखाई देता है। मोदी फिर से सत्ता में आए तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा, ऐसा प्रचार जिन लोगों ने किया उन्हें ये ध्यान रखना होगा कि बगल के देश में सत्ता में आने के लिए जिस तरह सेना द्वारा उलट-फेर किया जाता है, रक्तपात और हिंसाचार किया जाता है, ऐसा कुछ भी न करते हुए लोकतांत्रिक मार्ग से ही मोदी सत्ता में आए हैं। मोदी ने अपनी जीत का श्रेय देश की जनता को दिया है। यह हिंदुस्थान की विजय है, ऐसी बात उन्होंने कही है। पेड़ जब फल और फूलों से लद जाता है तो उसकी टहनियां झुक जाती हैं। यही नम्रता जीत के बाद मोदी में दिखाई दी है लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में आगे मोदी को अधिक सख्त होने की जरूरत है। देश के विरोधी दलों को इससे डरने की जरूरत नहीं। विरोधियों को भी अपना काम जारी रखना चाहिए। लोकतंत्र प्रक्रिया में वो जरूरी है। विरोधी कम-से-कम सभ्यता और विनम्रता दर्शाएंगे तो देश में सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होगा। मूलत: जो खुद को विरोधी दल समझते हैं उनकी आवाज संसद तथा बाहर इतनी क्षीण हो गई है कि अगले सालभर तक आत्मचिंतन के लिए उन्हें चारधाम यात्रा के लिए निकलना होगा। मक्का-मदीना, वेटिकन सिटी का दर्शन कर आना होगा क्योंकि इस धक्के से उबरना उनके लिए कठिन है और मन शांति के लिए हिमालय में जाना ये उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा होगा। मोदी एक दिन के लिए केदारनाथ गए और विरोधियों ने उन पर छींटाकशी करना शुरू कर दिया। लेकिन मोदी को ईश्वर का आशीर्वाद मिला और अब भस्म लगाकर हिमालय में जाने की नौबत विरोधियों पर आई है। हम पर यह स्थिति क्यों आई, जनता ने हमारे मुद्दों को नकारते हुए पराभव का मुक्का क्यों मारा, हमारी बोलती क्यों बंद की, ऐसी कई बातों का विचार अब विरोधियों को करना होगा। इसके लिए भरपूर समय जनता ने उन्हें दिया है। मोदी को लगातार दूसरी बार जनता ने प्रचंड बहुमत से चुना। इसका मतलब यही है कि मोदी सरकार के ५ वर्षों के कामकाज पर जनता ने मुहर लगा दी है। देश की जनता का यह जनादेश है। इसे खुले दिल से स्वीकारना ही दिलदारी है। लोकतंत्र और चुनाव में हार-जीत होती रहती है। लेकिन लगातार दो बार हमारी बुरी तरह पराजय क्यों हुई, इस पर विरोधियों को आत्मचिंतन करने की जरूरत है। मोदी को देश का शासन चलाना है। विरोधी उसमें बाधा न डालें, इसी में उनका हित है।