" /> विशेष पुण्य फलदायी है श्रावण में शिव पूजा, रोगों से मुक्ति दिलाएगा दूसरा सोमवार

विशेष पुण्य फलदायी है श्रावण में शिव पूजा, रोगों से मुक्ति दिलाएगा दूसरा सोमवार

सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। कल (१३ जुलाई) सावन का दूसरा सोमवार है। दूसरा सोमवार पंचक और रेवती नक्षत्र में अष्टमी तिथि को रहेगा। सोमवार के देवता चंद्र, रेवती नक्षत्र के देवता पूषा और अष्टमी तिथि के देवता भगवान रुद्र हैं। रुद्र भी भगवान शिव का ही एक रूप हैं। अत: इस तिथि में वृषभ से सुशोभित भगवान सदाशिव का पूजन करने से सारे कष्‍ट और रोग दूर होते हैं। रेवती नक्षत्र के देवता पूषन देव का पूजन करने से वे सभी तरह के शत्रु, घटना, दुर्घटना और बीमारियों से लोगों को बचाते हैं। वह देनेवाले देवता भी हैं जो हमारे जीवन में धन, स्वास्थ और समृद्धि देते हैं।
सावन में आनेवाले सभी सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं। इस दिन भक्त घर पर या मंदिरों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और शिव जी को विभिन्न प्रकार की सामग्रियां चढ़ाते हैं। सावन सोमवार व्रत से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यताएं हैं। ये व्रत सूर्योदय से लेकर तीसरे प्रहर तक किया जाता है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करना फलदायी माना गया है।
सावन महीने में सभी भक्त शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा करते हैं। सावन के सोमवार वैसे भी भोलेनाथ को प्रिय हैं, तो ऐसे में श्रद्धालुओं के लिए इस महीने का महत्व बढ़ जाता है। मान्यता है कि शिव पूजा से पुण्यों में बढ़ोतरी होती है। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को पाप मुक्त कर देते हैं। भक्तों के पुण्यफल में बढ़ोतरी होती है तथा उन्हें कष्टों से मुक्ति मिलती है।
सावन में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित महिलाएं भी पार्वती और शिव जी की आराधना पूरे महीने करती हैं, साथ ही सोमवार का व्रत भी रखती हैं। मान्यता है जो भी कन्या सावन के महीने में सोमवार का व्रत रखती है, उसके विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
 सावन के महीने में सुबह जल्दी उठना चाहिए।
 सुबह जल्दी उठकर नित्यक्रिया करने के बाद नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर स्नान करना चाहिए।
 नहाने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना न भूलें और साथ ही जल में हल्दी और अक्षत भी डालें।
 इसके बाद शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करें।
 गंगाजल के साथ दूध, दही, शहद, घी आदि से अभिषेक किया जाता है।
 जलाभिषेक करते हुए लगातार ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
 पूजा सामग्रियों में सफेद फूल, बिल्व पत्र, मदार के फूल, शमी के पत्ते, भांग और धतूरा को जरूर शामिल करना चाहिए।
 पूजन करते समय जाप भी बेहद आवश्यक माना गया है। इसलिए लगातार महामृत्युंजय मंत्र, भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र या अन्य मंत्रों को जरूर जपें।
 भगवान शिव की पूजा माता पार्वती संग करना चाहिए।
 पूजा के अंत में शिव आरती या शिव चालीसा का पाठ जरूर करें।
शिव पूजा सामग्री
शिवजी की पूजा के समय उनके पूरे परिवार अर्थात शिवलिंग, माता पार्वती, कार्तिकेयजी, गणेशजी और उनके वाहन नंदी की संयुक्त रूप से पूजा की जानी चाहिए। याद रहे भगवान शिवजी की पूजा में गंगाजल का उपयोग जरूर करें। महादेव की पूजा में लगनेवाली सामग्री में जल, दूध, दही, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, चीनी, घी, शहद, जनेऊ, चंदन, रोली, चावल, फूल, बिल्वपत्र, दूर्वा, फल, विजिया, आक, धूतूरा, कमल-गट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, भांग, धूप, दीप का इस्तेमाल किया जाता है।

कुंवारी लड़कियों के लिए खास होता है सावन मास
भगवान शिव का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है। भोले शंकर के अनुष्ठानों भजन और पूजन के लिहाज से यह महीना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में कोई सावन के सोमवार का व्रत रखता है, तो कोई १६ सोमवार शिव में रम जाता है। कई लोग कांवड़ यात्रा पर भी जाते हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के चलते इस बार कांवड़ यात्रा पर रोक है। इस दिन स्त्रियां तथा विशेष रूप से कुंवारी लड़कियां अपने सुखी पारिवारिक जीवन की कामना करते हुए भगवान शिव का व्रत पूजन करती हैं। सावन में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक भी किया जाता है।
धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार का महत्व कुंवारी लड़कियों के लिए ज्यादा होता है।
ऐसा माना जाता है कि कुंवारी लड़कियां सावन के सोमवार का व्रत रखें तो उन्हें मनचाहा पति मिलता है। उन्‍हें भरे-पूरे परिवार सहित सुखद सांसारिक सुख का फल मिलता है। आपको बताते हैं कि महिलाएं और कुंवारी लड़कियां शिवलिंग की पूजा वैâसे करें?
सावन के सोमवार को सुबह जल्दी उठकर घर की सफाई करें क्योंकि माता पार्वती भगवान शिव को साफ-सफाई बहुत पसंद है। सफाई करने के बाद स्नान करें। स्नान के पानी में काला तिल या गंगा जल डालकर स्नान करें। स्नान के पश्चात हल्के रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग की पूजा करें। शिव मंदिर पास में न हो तो घर पर मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजा-अर्चना करें।
जल या पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद धतूरा, भांग बेलपत्र, जनेऊ चढ़ाएं। पूजा के पश्चात स्फटिक की माला लेकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। एक बात का ध्यान दें कि भगवान शिव को हल्दी तुलसी के पत्ते कभी न चढ़ाएं। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए पांच माला का जाप करें कुंवारी लड़कियां अच्छे पति की कामना के लिए पांच माला का जाप ‘ॐ नमः शिवाय मंत्र’ के साथ करें। भगवान शिव की पूजा के समय थाल में ४ या ८ हरी चूड़ियां जरूर रखें। विधि-विधान पूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। हरी चूड़ियों को माता पार्वती को चढ़ा दें। चढ़ाने के बाद उन चूड़ियों को अपने हाथों में धारण करें। इससे पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है।
मान्यता है कि भगवान शिव ने माता पार्वती की तपस्या से खुश होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तब से ही सुखी दांपत्य की कामना से सावन में हरियाली तीज मनाने की परंपरा शुरू हुई। सावन का आखिरी दिन श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन के रूप में मनाया जाता है। इससे पहले श्रावणी अर्थात जनेऊ बदलने पितरों को स्मरण करने के रूप में मनाया जाता है। साथ ही एक हेमाद्रि संकल्प नाम से एक कर्मकांड भी संपन्न करते हैं।

श्रावण में रोज करें ५ मंत्रों का जाप
सावन का महीना भोलेनाथ के भक्तों के लिए बहुत खास माना जाता है। इस महीने में भोलेनाथ का पूजन किया जाता है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। वहीं शास्त्रों के अनुसार इस महीने में भगवान शिव भक्तों की आराधना से आसानी से खुश हो जाते हैं। इसके साथ ही साथ वे उनकी सभी मनोकामनाओं को पूरा कर देते हैं। सावन के महीने में ऐसे मंत्रों के बारे में जिसके जाप से भोलेबाबा खुश हो जाते हैं।
मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌ा। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌ा।।
कहा जाता है सावन के महीने में महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से मृत्यु के भय और जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
मंत्र – करारचंद्रम वैका कायाजम कर्मगम वी
श्रवणनजम वा मनामम वैद परामहम
विहितम विहिताम वीए सर मेट मेटाट
क्षासव जे जे करुणाबधे श्री महादेव शंभो
कहते हैं सावन के महीने में इस मंत्र का जप करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
मंत्र – ॐ नमः शिवाय
सावन के महीने में इस मंत्र का जप करने से धन की प्राप्ति होती है और शत्रुओं पर विजय मिलती है।
मंत्र – ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात
सावन के महीने में इस मंत्र का जप करने से सभी समस्याएं दूर भाग जाती हैं। दरअसल, कहा जाता है यह मंत्र भगवान शिव के सभी रूपों की पूजा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा सावन में हर रोज इस मंत्र के जप से भोलेनाथ की कृपा बनने लगती है और सारे डर दूर भाग जाते हैं।