विश्वकप की खेती बारिश से बर्बाद

टीम जो भी जीते, जो भी हारे, उसमें जिसका भी सिक्का चले या जो ऐन मौके पर अपनी टीम के लिए सफल या असफल साबित हो एक बात है मगर इस बार विश्वकप क्रिकेट में जो सबसे बड़ा विलन है या किसी टीम के लिए सहायक है तो वो है बारिश। बारिश टीम की स्थितियां तय कर रही है। बिना खेले अंक दिलवा रही है यानी मजा तो मजा आयोजन का पूरा समीकरण ही बिगाड़ रही है। ये विश्वकप इतिहास में पहली बार है कि आयोजकों ने बारिश का ध्यान न रखते हुए टूर्नामेंट कराया और अब तक तीन बड़े मैच रद्द हो चुके हैं तथा आज का न्यूजीलैंड बनाम हिंदुस्थान के मैच में भी बारिश का साया मंडरा रहा है। यदि ये भी रद्द हो जाता है और आनेवाले कुछ मैच और रद्द कर दिए जाते हैं तो विश्वकप का अर्थ क्या रह जाएगा? फिर तो किसी टीम को उसके पुराने इतिहास में खेले गए मैचों के आधार पर पाइंट दे दो और विश्वकप ट्रॉफी उसे थमा दो।
कितनी बड़ी जालसाजी है इंग्लैंड आयोजकों की कि वे जानते थे बारिश के दिन है और मैच रद्द होंगे मगर एक भी रिजर्व डे नहीं रखा गया। शायद इसका वे तर्क दें कि आयोजन लंबा खिंच सकता है मगर उन्होंने ये नहीं जाना कि कितनों के कितने पैसे फंस जा रहे और उन्हें मिल रहा नतीजा में सिफर। ये अंग्रेजों की कोई सोची-समझी साजिश तो नहीं है? लगता तो यही है और अब जबकि बारिश से रद्द होते जा रहे मैचों को देखकर सवाल खड़े होने लगे हैं तो अंग्रेजों को जवाब देना ही पड़ेगा।
आईसीसी वर्र्ल्ड कप का जब १६वां मैच भी बारिश के चलते रद्द हो गया तब ये सवाल उठ खड़े हुए कि क्या वजह थी कि आयोजकों ने रिजर्व डे नहीं रखा? जबकि ऐसा लगभग हर बड़े टूर्नामेंट में होता है। खासतौर पर तब जब इंग्लैंड में सीजन ही बारिश का हो और ये संभावनाएं दृढ़ हों कि बारिश खलल डालेगी ही।
आज के मैच से पूर्व जब ब्रिस्टल में बारिश के चलते श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच टॉस तक नहीं हो सका और मैच रद्द कर दिया गया तो मैच रद्द होने के बाद श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमों ने आईसीसी को इशारों ही इशारों में खरी-खोटी सुनाई। बांग्लादेश के कोच स्टीव रोड्स ने मैच बारिश की भेंट चढ़ने के बाद वर्ल्ड कप के कार्यक्रम में रिजर्व दिनों को शामिल करने की मांग की। रोड्स ने तो प्रेस कॉन्प्रâेस में ही कह दिया कि, ‘हम चांद पर आदमी को भेज सकते हैं तो फिर वर्ल्ड कप में रिजर्व डे क्यों नहीं हो सकता जबकि असल में ये लंबा टूर्नामेंट है। उन्होंने बिल्कुल सही कहा। पता नहीं आयोजक के कानों पर जूं रेंगती है या नहीं? इधर श्रीलंका के कप्तान दिमुथ करुणारत्ने भी इस मैच के रद्द होने से निराश दिखे। श्रीलंका की टीम के ४ मैचों में ४ अंक हो गए हैं, जिसमें से दो अंक मैच रद्द होने की वजह से आए हैं। श्रीलंकाई टीम अंक तालिका में ५वें नंबर पर पहुंच गई है। इस पर करुणारत्ने ने कहा कि हमें प्रâी के प्वाइंट नहीं चाहिए। इस वर्ल्ड कप में तीसरी बार ऐसा मौका आया है और आनेवाले मैच भी इसी खतरे के साए में हैं जब बारिश के चलते मैच रद्द किए गए हैं या किए जाएंगे। वर्ल्ड कप के इतिहास में तो रिकॉर्ड बन ही गया जब तीन मैच बारिश के कारण रद्द कर दिए गए हों। पाकिस्तान और श्रीलंका, वेस्टइंडीज और साउथ अप्रâीका और अब श्रीलंका और बांग्लादेश के मैच बारिश के चलते रद्द हुए हैं।
ये तो टीम और आयोजकों के बीच की बात हुई मगर दर्शकों, क्रिकेट प्रेमियों का क्या? देश विदेश से टिकिट कटा कर पैसा खर्च कर जो पहुंचे हैं वो बिना बात के ठगे ही जा रहे हैं। यदि आयोजक उनके लिए ही सही रिजर्व डे कराके मैच होने देते तो विश्वकप का मजा भी बरकरार रहता और उनका पैसा भी उपयोग में आता। विश्वकप का ये दुर्भाग्य है कि इस बार के आयोजन में कोई उत्साह नहीं दिख रहा। न कोई रोमांच बन पा रहा है। एक तरफ बारिश मैचों को धो रही है तो दूसरी तरफ करोड़ों रुपए की कमाई भी पानी में बह रही है यानी विश्वकप की खेती को बारिश पूरी तरह से बर्बाद कर रही है और जो इसके किसान यानी आयोजक हैं, वे कान में रूई घुसा के चुपचाप बैठे तमाशा देख रहे हैं।