वीआईपी कल्चर और वास्तविकता, राज्यपालों ने बदली परिपाटी

आमतौर पर राज्यपाल सूबों के प्रतीकात्मक प्रमुख की भूमिका में ही दिखते रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के राज्यपालों अपने आपको महज औपचारिकताओं की सीमा से मुक्त करते हुए सामाज के विकास और सुधार की प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में जोड़ सम्मिलित कर लिया। फिर चाहे वो राम नाईक रहे हों या प्रदेश की वर्तमान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। दोनों ही ने पहले से चले आ रहे मिथक को काफी हद तक तोड़ा है। आनंदी बेन पटेल एक सकारात्मक भूमिका के साथ प्रदेश में वी आईपी कल्चर खत्म करने, शिक्षा, बच्चों, महिलाओं की दशा में सुधार करती दिख रही हैं। गुजरात की मुख्यमंत्री और कई महत्वपूर्ण विभागों की मंत्री रहते हुए आनंदीबेन पटेल ने वहां शिक्षा और खासकर प्राथमिक शिक्षा व बाल एवं महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जो प्रयोग किए उन्हें वह यूपी में भी दोहराती हुई नजर आ रही हैं। चाहे वह प्राथमिक शिक्षा में सुधार हों या गांवों में बच्चों व प्रसूताओं के स्वास्थ्य के नजरिए से महत्वपूर्ण आंगनवाड़ी केंद्रों की दशा सुधारना हो राज्यपाल आनंदीबेन अभिनव प्रयोग करती हुई दिख रही हैं।
उत्तर प्रदेश के राज्‍यपाल का पद संभालते ही आनंदीबेन पटेल ने वीआईपी कल्‍चर को खत्‍म करने की दिशा में मजबूत कदम उठाया है। राज्‍यपाल ने अपनी सुरक्षा में लगे ५० सुरक्षाकर्मियों के दस्‍ते को कम करने का फैसला किया है। उन्‍होंने सभी सुरक्षाकर्मियों को राज्‍य सरकार को वापस भेजने के लिए कहा है। उनका कहना है कि इन सभी सुरक्षाकर्मियों को आम जनता की सेवा करनी चाहिए।
एक अन्य महत्वपूर्ण कदम के तहत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आम लोगों के लिए राजभवन के द्वार खोलने का निर्णय लिया है। राज्यपाल के इस फैसले के बाद अब आम नागरिक अपने परिवार के साथ राजभवन का भ्रमण कर सकते हैं। सप्ताह में २ दिन मंगलवार और गुरुवार शाम ४ से ६ बजे तक राजभवन आम जनता के लिए खुला रहेगा। स्कूल प्रबंधन छात्रों के साथ पहले सूचना देकर सोमवार से शनिवार सुबह ९ से शाम ५ बजे तक राजभवन देखने आ सकते हैं। राजभवन के भ्रमण पर आने वाले लोगों के लिए अपना फोटोयुक्त पहचान पत्र लाना जरूरी होगा।
राज्यपाल का सबसे अनूठा प्रयोग प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को स्थायी भवन दिलाने को लेकर है। जहां प्रदेश में ज्यादातर आंगनवाड़ी केंद्र किराए के अस्थाई घरों में चल रहे थे, वहीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इन्हें गांवों व शहरों में चल रहे प्राथमिक स्कूलों के परिसरों में लाने के निर्देश व सुझाव दिए हैं। राज्यपाल का कहना है कि ज्यादातर प्राथमिक स्कूलों के पास अपने भवन हैं, जिनमें पर्याप्त जगह होती है। इन प्राथमिक स्कूलों के परिसरों में खासी जगह होती है, जहां आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना की जा सकती है। उन्होंने अपने गुजरात के अनुभवों का लाभ उठाते हुए प्रदेश सरकार से इन आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए कारपोरेट कंपनियों के सीएसआर फंड का सहयोग लिए जाने को भी कहा है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के मद्देनजर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों को प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने शिक्षकों को गलत बात स्वीकार नहीं करने और बच्चों में मूल्यनिष्ठ शिक्षा का विकास करने की सीख भी दी। राज्यपाल का कहना है कि अच्छे कार्य करने वाले शिक्षक का सम्मान सभी स्थान पर नहीं हो पाता। यदि कहीं भी कोई शिक्षक कहीं अच्छा कार्य कर रहा है तो उसका सम्मान होना चाहिए। राज्यपाल का कहना है कि शिक्षक में संवेदना का होना आवश्यक है। शिक्षकों में संवेदना नहीं है तो कुछ नया प्रयास नहीं कर सकते। यदि प्रदेश के सभी शिक्षक एक-दूसरे का सहयोग करेंगे तो उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बनकर ही रहेगा।
राज्यपाल के मुताबिक शिक्षकों की सोच नकारात्मक हो सकती है, लेकिन बच्चे कभी गलत नहीं सोचते। उनका कहना है कि बच्चे चोरी नहीं करते, न ही प्रâी में कुछ लेना चाहते हैं।
राज्यपाल के मुताबिक जब-जब भाजपा की सरकार आती है, तब-तब ही व्यवस्था में सुधार और परिवर्तन होता है। बीते दो-तीन महीने में उन्होंने प्रदेश के कुछ जिलों का दौरा किया है। उनका कहना है कि योगी आदित्यनाथ सरकार के ढाई वर्ष के कामकाज का असर दिख रहा है। योगी सरकार ने जमीनी स्तर पर सुधार करने की कोशिश की है, जमीनी स्तर पर सुधार के परिणाम आने में थोड़ा वक्त लगता है।
दिल्ली से ज्यादा बेहाल यूपी…
जहरीली हवा के मामले में दिल्ली चर्चा में है जबकि यूपी के शहरों में भी इसका प्रकोप कम नहीं है। लगातार आ रही रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली से भी खतरनाक वायु प्रदूषण का स्तर पड़ोसी शहर गाजियाबाद व नोएडा में है। यूपी में हापुड़ में भी हवा में खतरनाक तत्वों का स्तर खासा ऊंचा पाया गया है। दिल्ली में स्कूलों में छुट्टी के बाद नोएडा के स्कूलों को भी मंगलवार तक बंद किया गया है। बुलंदशहर में भी वायु प्रदूषण के चलते स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। लखनऊ सहित प्रदेश के कई शहरों में स्माग के चलते धुंध सी छायी हई है और शाम होते ही अंधेरा छाने लगा है।
उत्तर प्रदेश के शहरों का हाल इतना बुरा है कि आबादी, अन्न उत्पादन जैसे कई मामलों में देश भर में अव्वल रहने वाला यह प्रदेश अब प्रदूषण के मामले में भी देश में टाप पर जा पहुंचा है। दिल्ली से कहीं बदतर हवा यूपी के फिरोजाबाद, बुलंदशहर, वाराणसी, गाजियाबाद और नोएडा की है। इसी तरह वायु प्रदूषण के मामले में यूपी की राजधानी लखनऊ से बराबर की टक्कर ले रहा है। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से वायु प्रदूषण को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत डीजल जनरेटर चलाने पर रोक लगाई गई है। शहरों में खासकर राजधानी में सवारी गाड़ियों को व्यस्त चौराहों से दूर रोका जा रहा है। ढाबों व होटलों में कोयला व लकड़ी जलाने पर रोक लगाई गई है। सड़कों के किनारे पेड़ों को पानी से धोया जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में खेतों में पराली जलाने वाले किसानों से जुर्माना वसूला जा रहा है और जिलाधिकारी द्वारा लगातार किसानों से ऐसा न करने की अपील जारी की जा रही है। सरकार आनेवाले समय में वायु प्रदूषण को लेकर और भी गंभीर कदम उठा सकती है।
लखनऊ में प्रदूषण लोगों के लिए कहर बना हुआ है। राजधानी के अस्पतालों में सांस के मरीजों की भीड़ दिखायी दे रही है। लखनऊ के लोहिया,केजीएमयू, सिविलअस्पताल में ओपीडी में सांस की दिक्कत की शिकायत करनेवालों की संख्या बढ़ी है। सरकारी डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ २ दिन में २५ फीसदी मरीज सांस के आए हैं जबकि ४२ मरीज सांस समस्या लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय पहुंचे हैं। उच्च स्तरीय लोहिया अस्पताल में ३६ मरीज सांस समस्या वाले पहुंचे हैं। इसके साथ ही लखनऊ के बलरामपुर,सिविल अस्पताल में मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन के पास पुख्ता एक्शन प्लान नहीं है जबकि जहरीली हवा से बीमार होने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि रोक के बाद भी सड़क निर्माण कार्य हो रहा है और गोमती नगर में कई प्रोजेक्ट में काम जारी है।