" /> वुहान, हुवेई और मुंबई!

वुहान, हुवेई और मुंबई!

कोरोना पर अंकुश लगाना हो तो मुंबई को पूरी तरह से ‘लॉक डाउन’ मतलब बंद करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उसी दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मुंबई की ५० प्रतिशत दुकानें बंद रहेंगी। कुछ क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर दूसरे दिन दुकानों को बंद रखने का निश्चय किया गया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भीड़ कम हो और वायरस का संक्रमण न बढ़े। जितना कठिन उपाय किया जाएगा और उसका पालन किया जाएगा उसी की तुलना में कोरोना वायरस को रोका जा सकता है। इसके लिए चीन के वुहान शहर का उदाहरण सबको अपनी आंखों के सामने रखना चाहिए। वुहान शहर को पूरी तरह से ‘लॉक डाउन’ कर दिया गया। वहां की सार्वजनिक यातायात व्यवस्था बंद कर दी गई। बस, रेलवे और मेट्रो सब कुछ बंद कर दिया गया। लोग घरों से बाहर न निकलें इसके लिए कड़ी योजनाएं बनाई गर्इं। परिणाम ये हुआ कि वुहान शहर में लगातार दूसरे दिन मतलब मंगलवार और बुधवार को कोरोना का सिर्फ एक ही मरीज जांच में ‘पॉजिटिव’ पाया गया। चीन सरकार की कड़ी कहें या निर्मम नीति के कारण कोरोना पॉजिटिव का कहर बड़ी तेजी से कम हुआ है। चीन के सिर्फ एक वुहान शहर में कोरोना वायरस ने चार हजार लोगों की जान ले ली। अब ‘कोरोना’ चीन से जाता दिख रहा है। चीन का शासन थोड़ा तानाशाही तरह का है। हम फालतू लोकतंत्रवादी हैं। इस फालतूपन का जो परिणाम हमें भोगना पड़ता है वो हम इस समय भोग रहे हैं। प्रधानमंत्री एक तरफ आह्वान करते हैं कि दिल्ली में कोई भीड़ न करे और एक-दूसरे से न मिले लेकिन उसी समय वे देश की संसद को राजनीतिक कारणों से चालू रखते हैं। हजारों सांसद, उतने ही अधिकारी और कर्मचारी वहां एक साथ रहते हैं। एक तरफ सरकारी काम-काज धीमा या बंद करना और दूसरी तरफ संसद का काम चालू रखना। ये किसी लोकतंत्र की महान परंपरा का जतन बिल्कुल नहीं है। मध्य प्रदेश में सरकार गिराने का जो खेल शुरू है उसे ‘सहारा’ देने के लिए संसद का अधिवेशन शुरू रखा गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में कमलनाथ सरकार को बहुमत सिद्ध करना है लेकिन ‘कोरोना’ के कारण अधिवेशन वैâसे लें? कमलनाथ वादियों ने इस प्रकार का राजनीतिक स्वास्थ्य परक सवाल किया है। ऐसे में अगर संसद का अधिवेशन ‘कोरोना’ के कारण समाप्त किया गया तो कमलनाथ की नीति को बल मिलेगा। इसलिए दिल्ली में कोरोना को लेकर भले ही कितनी भी आपातकालीन स्थिति तैयार हो इसके बावजूद संसद को चालू रखना राजनीतिक दृष्टि से आवश्यक है, ऐसा ‘दिल्ली के गलियारों में’ बोला जा रहा है। सच-झूठ वे ही जानें। लेकिन दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर में कठोर उपाय योजना लागू करनी होगी। हमारे यहां ‘क्वारंटाइन’ के लिए चिन्हित लोग भाग जा रहे हैं। सीधे यात्रा कर रहे हैं। वायरस का संक्रमण हो, ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। इससे संकट गहराएगा और हाहाकार मचेगा। चीन के वुहान और हुवेई में २३ जनवरी से ही ‘लॉक डाउन’ है। अब परिस्थिति सुधरने के बाद सरकार ने वहां के उद्योग-व्यवसाय को शुरू करने की अनुमति दे दी है। जिस ‘वुहान’ में कोरोना ने सबसे ज्यादा उत्पात मचाया, वहां गत दो दिनों में सिर्फ एक पॉजिटिव केस का मिलना एक आशादायक खबर है। वुहान और हुवेई को आंशिक रूप से लॉक डाउन किया गया होता तो ये परिणाम नहीं दिखता। इसके पहले फरवरी महीने में हुवेई प्रांत में कोरोना वायरस का उत्पात अपने चरम पर पहुंच गया था और उस समय एक दिन में ही हजारों लोग जांच में पॉजिटिव पाए गए थे। अब ये आंकड़ा सरक कर नीचे यानी ‘एक’ पर पहुंच गया है। वुहान की जनसंख्या मुंबई-दिल्ली जितनी अर्थात लगभग डेढ़ करोड़ है। २३ जनवरी से वहां के लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लोगों ने इस ‘क्वारंटाइन’ का दर्द सहा, ये भी राष्ट्रवाद ही है। सिर्फ ‘जय हिंद’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे लगाकर ही राष्ट्रवाद नहीं जागता। सरकारी आदेश का पालन और इस प्रकार की महामारी न बढ़ने पाए इसके लिए सहयोग देना भी महान राष्ट्रवाद है। महाराष्ट्र में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या ४९ पहुंच गई है। १४ से ये आंकड़ा ४९ तक पहुंचा। लोग स्वअनुशासित नहीं होना चाहते। खांसने और सड़कों पर थूकने से कोरोना वायरस पैâलता है लेकिन हम सुनने को राजी नहीं। सड़कों पर थूकना जारी है और आखिरकार कानूनी रूप से कार्रवाई करने की नौबत आन पड़ी। ऐसी परिस्थिति में अगर संकट गहराता है तो सिर्फ सरकार को वैâसे जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा? चीन में रोज २५ हजार लोग बाहर से आते हैं। चीन के अलग-अलग प्रांतों और शहरों में जो लोग बाहर से आते हैं उन पर किसी भी प्रकार की दया न दिखाते हुए उन्हें ‘क्वारंटाइन’ भेज दिया जाता है और उनके ‘क्वारंटाइन’ से कोई भागता नहीं। चीन में कोरोना की ‘मार’ कम हुई है लेकिन कोरोना दोबारा हमला कर सकता है, ऐसा वहां के डॉक्टर कह रहे हैं और इस संदर्भ में लोग चौकन्ने हैं। वुहान शहर कोरोना वायरस का ‘गढ़’ था। वो गढ़ ढह चुका है। हालांकि इसके लिए वहां की सरकार ने दो महीनों तक गढ़ को ‘लॉक डाउन’ किया और लोगों ने बहुत तकलीफों का सामना किया। लोगों ने सड़कों पर थूकना बंद कर दिया तब भी कोरोना वायरस के मामले कम होने लगेंगे।