" /> वेटिंग टिकट जारी कर रेलवे कमा रही है रोजाना करोडों रुपए

वेटिंग टिकट जारी कर रेलवे कमा रही है रोजाना करोडों रुपए

नहीं मिल रहा यात्रियों को रिफंड

कोरोना के संकट काल में स्पेशल ट्रेनों में वेटिंग टिकट देकर रेलवे रोजाना करीब दो करोड़ रुपए जमा कर रही है। रेलवे यह पैसे आनेवाले 15 दिनों में यात्रियों को रिफंड करने का दावा करती है लेकिन कई मामलों में तो लोगों को एक महीने बाद तक पैसे नहीं मिले हैं। इस बारे में रेलवे अधिकारी कह रहे हैं कि यह यात्रियों की सुविधा के लिए है, जबकि रेल यात्री संघ का आरोप है कि रेलवे जान-बूझकर लोगों को वेटिंग टिकट देकर टिकटों का पैसा 15 दिन तक उपयोग कर रही है।

गौरतलब है कि कोरोना के चलते भारतीय रेलवे की पैसेंजर ट्रेनों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। देशभर में फंसे मजदूरों को उनके राज्य तक पहुंचाने के लिए रेलवे ने 2 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाईं। इन स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को टिकट नहीं बेचा गया, जबकि राज्य सरकारों ने श्रमिक यात्रियों के टिकट का खर्च वहन किया। रेलवे बोर्ड 1 जून से 200 सामान्य ट्रेनें चला रही है। इन सभी ट्रेनों में बड़े पैमाने पर वेटिंग टिकट जारी किए जा रहे हैं लेकिन वेटिंग टिकट पर लोगों को जाने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में रोज यदि एक ट्रेन में 200 वेटिंग मान लें और एक टिकट का औसत 500 रुपए मान लें, तो हर ट्रेन से टिकट कैंसल होने पर एक लाख रुपए रेलवे के पास रहते हैं। इस हिसाब से 200 ट्रेनों में रोज दो करोड़ रुपए की कमाई केवल इन दिनों टिकट कैंसल से रेलवे कर रही है। इन रुपयों को रेलवे 15 दिन के भीतर लौटाने की बात करती है, जबकि हकीकत ये है कि कई बार लोगों को कई दिनों तक टिकट के पैसे नहीं मिले।

मुंबई के रहनेवाले गिरीश यादव ने बताया कि उन्होंने चार महीने पहले 18 मई को रत्नागिरी एक्सप्रेस का टिकट निकाला, जबकि वापसी में 23 मई का काशी एक्सप्रेस से चार टिकट निकाला था। कोरोना के चलते रेलवे ने इन टिकटों को रद्द कर दिया, परंतु अभी तक इन टिकटों के पैसे रिफंड नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि रेलवे को इसकी शिकायत भी की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रेल मंत्रालय के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आर.डी. वाजपेयी ने इस बारे में कहा कि जोनल रेलवे ट्रेनों की कैपेसिटी को देखते हुए वेटिंग टिकट जारी करती है। उन्होंने कहा कि इस विषय में जोनल रेलवे ज्यादा जानकारी दे सकती है। इस बारे में जब जोनल रेलवे के प्रवक्ता से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वेटिंग टिकट इसलिए दिए जाते हैं, ताकि यदि चार्ट बनाने से पहले कोई टिकट रद्द हो जाए, तो सीट खाली न जाए और यात्रियों का वेटिंग टिकट कन्फर्म हो जाए।

इस बारे में रेल यात्री संघ के सुभाष गुप्ता कहते हैं कि कोरोना काल में जब किसी भी हाल में वेटिंग पर लोगों को भेजा नहीं जा सकता, तो ऐसे में लोगों को वेटिंग और आरएसी टिकट क्यों जारी किया जा रहा है। यह लोगों की जान के साथ किया जा रहा खिलवाड़ है। मुंबई के शिवकुमार बताते हैं कि 2 जून की स्पेशल ट्रेन में मैंने अपना और अपनी पत्नी का वेटिंग टिकट खरीदा। हमारा टिकट आरएसी में आकर रुक गया। हमें एस-11 में 63 नंबर की एक सीट दी गई। ऐसे में मैं अपने दो बच्चों के साथ कैसे सफर कर सकता था। मुझे टिकट कैंसल कराना पड़ा, अब मेरे पैसे भी ज्यादा कटेंगे और मैं सफर भी नहीं कर पाऊंगा। रेल मंत्रालय को कोरोना काल में इस तरह की स्थिति से बचना चाहिए।