वो दौर बेहद मुश्किल था! -इमरान हाशमी

अभिनेता इमरान हाशमी फिल्म प्रोडक्शन में फिल्म ‘चिट इंडिया’ से शुरुआत करने जा रहे हैं। फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े अपने अनुभव और करियर के बारे में उन्होंने बात की पूजा सामंत से। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश…
इमरान कैसा रहा आपके लिए २०१८ का वर्ष?
मेरे लिए अच्छा रहा। हालांकि मैंने २०१८ में खास शूटिंग्स नहीं की लेकिन मेरा अधिकांश साल सिर्फ प्लानिंग करने में व्यतीत हुआ। मैंने फिल्म ‘चीट इंडिया’ के साथ खुद का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। लिहाजा मेरी अपनी फिल्मों का प्रोडक्शन और एक्टिंग में तालमेल बैठाना जरूरी था। इसीलिए मैंने ज्यादातर वक्त इसी प्लानिंग में बिताया।
फिल्म प्रोडक्शन में आने की कोई खास वजह?
सभी जीवन में प्रगति करना चाहते हैं। मैंने भी वही किया। मुझे लग रहा था अभिनय में मुझे १५ वर्ष हो चुके हैं। अब कुछ स्ट्रॉन्ग कॉन्टेंट वाली फिल्म के जरिए अगर मैं फिल्म निर्माण में आऊं तो बेहतर होगा। यही सोचकर अब मैंने ‘चिट इंडिया’ फिल्म के जरिए फिल्म निर्माण में कदम रखा है।
पहली फिल्म पहले निर्माण में आपको महेश भट्ट का कितना योगदान मिला?
मैंने महेश भट्ट से कोई मदद नहीं मांगी। मेरा मानना है कि यदि मुझसे कोई गलती हुई तो उसका जिम्मेदार मैं ही रहूंगा। गिरकर संभलना बहुत कुछ सिखा देता है। लेकिन मेरे करियर पर विशेष फिल्म्स और महेश भट्ट का बड़ा प्रभाव है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
फिल्म ‘चिट इंडिया’ की कल्पना क्या है?
इंडियन एजुकेशन सिस्टम पर इस फिल्म के जरिए करारा जवाब है। यह प्रोग्रेसिव तो है लेकिन जो एजुकेशन हमारी पीढ़ी ले रही है वो एजुकेशन इनइफेक्टिव है। शिक्षा हमने ली है पर इससे सभी को नौकरी नहीं मिलती। एजुकेशन जैसे माध्यम में करप्शन है, फर्जी डिग्री मिलती हैं। कई बार शिक्षकों को तनख्वाह नहीं मिलती। अपेक्षित सफलता न मिलने पर स्टूडेंट्स आत्महत्या करते हैं, इसी पर आधारित है यह फिल्म।
एक फिल्म क्या पूरे एजुकेशन सिस्टिम को नष्ट कर देगी?
यह एक शुरुआत है, जो सिनेमा के माध्यम से आगे बढ़ेगा। इस विषय पर किताबें होंगी लेकिन फिल्मों का माध्यम सबसे तेज और प्रभावी होता है।
आपका बेटा अयान अब कैसा है (इमरान के बेटे को २ वर्ष पहले कैंसर हुआ था!)?
थैंक गॉड! अयान अब क्लास थर्ड में पढ़ता है। पढ़ाई के साथ उसमें और कलाओं का भी इंटरेस्ट बढ़े यह मैं चाहता हूं। अयान को फुटबॉल खेलना, किक बॉक्सिंग, स्क्वेश बहुत पसंद है। हम दोनों में एक बड़ा फर्क है। जब मैं छोटा था मुझे कभी स्कूल पसंद नहीं आया लेकिन अयान को स्कूल जाना बेहद पसंद है।
अयान की ट्रीटमेंट के दौरान आप विदेश गए थे, क्या यहां फिल्में छूट गर्र्इं आपसे?
वो दौर मैं, मेरी पत्नी और अयान के लिए बेहद मुश्किल था। उन सारे अनुभवों को मैंने ‘स्लाइस ऑफ लाइफ’ बुक में लिखा है। विदेश में ट्रीटमेंट के दौरान मैं था पर जैसे ही उसकी स्थिति सुधरतीr गई। मैं मुंबई और अमरीका आता-जाता रहा।