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वो ७ देवियां, जिन्हें पीएम ने दिया अपना सोशल स्पेस

पीएम नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देशभर की ७ महिलाओं को सम्मान देते हुए उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट को इस्तेमाल करने का अवसर दिया। इनमें कोई शिल्पकार है तो किसान, कोई जल संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं तो कोई गरीबों को मुफ्त में खाना खिला रही हैं। आइए जानते हैं इन महिलाओं के संघर्ष और उनकी सफलता की कहानी, उन्हीं की जुबानी जो उन्होंने पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल पर शेयर की है। इनमें से कुछ महिलाएं वे भी हैं जिन्हें आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित किया है।
अपनी मां से प्रेरित होकर स्नेहा मोहनदौस ने फुडबैंक इंडिया नाम से पहल शुरू की है। गरीबों की भूख मिटाने के लिए वे हिंदुस्थान के बाहर के कई स्वयंसेवकों के साथ भी काम करती हैं। उन्होंने मोदी के ट्विटर अकाउंड पर लिखा कि हमारी २० से ज्यादा शाखाएं हैं और अपने काम से कई लोगों पर असर डाला है। हमनें सामूहिक रूप से भोजन पकाना, खाना पकाने का मैराथन और स्तनपान जागरुकता अभियान की पहल भी की। मालविका अय्यर १३ साल की उम्र में एक बम धमाके का शिकार बनीं जिसमें उनके हाथ उड़ गए और पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल पर लिखा कि छोड़ देना कभी कोई विकल्प नहीं होता। अपनी सीमाओं को भूलकर विश्वास और उम्मीद के साथ दुनिया का सामना कीजिए। अय्यर एक प्रेरक वक्ता, दिव्यांग कार्यकर्ता और मॉडल हैं। जल संरक्षक कल्पना रमेश ने कहती हैं कि योद्धा बनिए लेकिन थोड़े अलग तरह का। जल योद्धा बनिए। उन्होंने कहा कि छोटे प्रयास बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं…पानी को जिम्मेदारीपूर्वक खर्च कर, वर्षाजल संचयन, झीलों को बचाकर, इस्तेमाल पानी का दोबारा उपयोग और जागरूकता पैâलाकर योगदान किया जा सकता है। यूपी के कानपुर जिले की राजमिस्त्री कलावती देवी शौचालयों के निर्माण के लिए धन जुटाती हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप कुछ हासिल करना चाहते हैं तो पीछे मत देखिए और लोगों की कड़वी बातों की अनदेखी कीजिए। उन्होंने कहा कि मैं जिस जगह रहती थी वहां हर तरफ गंदगी थी लेकिन एक पक्का विश्वास था कि स्वच्छता के जरिए हम स्थिति को बदल सकते हैं। मैंने लोगों को इसके लिए तैयार करने का पैâसला किया। शौचालयों के निर्माण के लिये धन इकट्ठा किया। ग्रामीण महाराष्ट्र के बंजारा समुदाय की हस्तकला को बढ़ावा देनेवाली विजया पवार ने पीएम मोदी के ट्विटर हैंडल पर लिखा कि मैं पिछले दो दशक से इस पर काम कर रही हूं और इसमें हजारों अन्य महिलाएं मेरी सहायता करती हैं। बिहार के मुंगेर जिले की रहनेवाली वीना देवी कहती हैं कि जहां चाह, वहां राह है। उन्होंने मशरूम की खेती की योजना के लिए जगह की कमी को अपने आड़े नहीं आने दिया और अपने पलंग के नीचे मशरूम उगाया। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति से सबकुछ हासिल किया जा सकता है। मुझे असली पहचान पलंग के नीचे एक किलो मशरूम उगाकर मिली। इसने मुझे न सिर्फ आत्मनिर्भर बनाया बल्कि मेरा विश्वास बढ़ाकर मुझे नया जीवन दिया।