" /> शंखवटी खाएं पेट दर्द भगाएं

शंखवटी खाएं पेट दर्द भगाएं

मेरा वजन मात्र ४८ किलो है। भोजन करने के तुरंत बाद मुझे लेट्रीन जाने की इच्छा होती है। पाचन सही ढंग से नहीं होता। जो भी खाता-पीता हूं वो शरीर से निकल जाता है। इसी तकलीफ के चलते मैं शादी-ब्याह, होटलों आदि में जाने से डरता हूं। बस यात्रा के दौरान मैं भूखा ही रहता हूं। बहुत दवाइयां खा चुका पर कोई फायदा नहीं हो रहा है? -नरेश, धारावी, मुंबई
संजीवनी वटी व पंचामृतपर्पटी दोनों दवाइयां दो-दो रत्ती दिन में तीन बार गर्म पानी से लें। साथ ही कुटजारिष्ट ६-६ चम्मच दो बार समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद दिन में दो बार लें। शौच त्याग करते समय यदि पेट में दर्द, मरोड़ आदि लक्षण हों तो शंखवटी दो-दो गोली दो बार लें। नियमित रूप से खाने में छाछ व दही का सेवन करें। परंतु रात के खाने में दही न खाएं। आयुर्वेद के मुताबिक रात में दही खाना नुकसानदायक है परंतु छाछ लिया जा सकता है। पाचनशक्ति बढ़ाने व शरीर को बल देने के लिए बिल्वादि अवलेह दो-दो चम्मच सुबह-शाम लें। साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखें। नाखून काटकर रखें। नाखूनों में तरह-तरह के जीवाणु छिपे रहते हैं जो कि भोजन करते समय शरीर के अंदर चले जाते हैं। यदि पीने का पानी स्वच्छ न हो तो भी ये समस्या होती है। अत: पानी उबालकर पीएं। अत: मन के भय, अशांत चित्त आदि को दूर करने के लिए पूजा, व्यायाम, योग, प्राणायाम करें व सोच को सकारात्मक रखें। सलाद आदि वस्तुएं जैसे कि ककड़ी, टमाटर, मूली, गाजर, बीट, कच्चा प्याज आदि को अच्छी तरह से धोकर खाएं। इनमें लगी अस्वच्छता कई बार अमेबिक संक्रमण उत्पन्न कर देती है।
मुझे पिछले दो-तीन महीने से खांसी आ रही है। मुझे ८ वर्ष पहले टीबी हुई थी। लेकिन मैंने ६ महीने का कोर्स किया था। मुझे डर था इसलिए छाती का एक्स-रे निकाला, उसमें ‘ब्राकांइटिस’ बताया है। इसकी भी दवाई चेस्ट फिजीशियन को दिखाकर ली परंतु खांसी में आराम नहीं है। जब दोबारा चेकअप करवाया तो डॉक्टर ने बताया कि सायकोलॉजिकल है? -प्रेम कुमार, ठाणे
त्रिभुवनकीर्ति रस की दो-दो गोली, लक्ष्मीविलास रस नारदीय दो-दो गोली दिन में ३ बार गर्म पानी के साथ लें। सितोप्लादि चूर्ण एक चम्मच, यष्टीमधु चूर्ण एक चम्मच तथा हल्दी चूर्ण आधा चम्मच मिलाकर शहद के साथ दिन में दो बार लें। भारंग्यादि क्वाथ ४-४ चम्मच दो बार पानी मिलाकर लें। दोनों नाक के नथुनों में अणु तेल की दो-दो बूंद लगाएं। गर्म पानी का भाप दिन में कम-से-कम एक बार अवश्य लें। गर्म पानी का कुल्ला करने के साथ ही पीने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। धूल मिट्टी, धुआं, फाइन डस्ट आदि से बचें। एसी व पंखे की हवा सीधे आपको न लगे इसका खयाल रखें। ठंडी वस्तुएं, कोल्ड ड्रिंक, दही, लस्सी, ठंडी बीयर और खट्टी चीजों का सेवन और स्मोकिंग तुरंत बंद कर दें। स्मोकिंग के कारण खांसी बढ़ जाती है। हल्का-फुल्का व्यायाम करें। अनुलोम-विलोम काफी उपयोगी है। कोई भी ब्रीथिंग एक्सरसाइज करें। जानबूझकर खांसी कर जोर-जबरदस्ती बलगम या कफ निकालने की कोशिश न करें।
मेरी उम्र ५२ वर्ष है। मैं स्वस्थ हूं। मेरी ईसीजी, ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट नॉर्मल आई है लेकिन कोलेस्ट्रॉल २४० आया है। डॉक्टर ने इसे बॉर्डर लाइन हाई बताया है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने व स्वस्थ रहने का नुस्खा बताएं।
-रामदयाल, कांदिवली
रक्त में कोलेस्ट्रॉल की सामान्य मात्रा १८० से २५० मिली ग्राम प्रति १०० मिली लीटर होती है। परंतु २०० से ऊपर व २५० के अंदर की रीडिंग सामान्य होते हुए भी बॉर्डर लाइन हाई समझा जाता है एवं इसे नियंत्रित करने की सलाह दी जाती है। आप भी अपनी २४० की रीडिंग को हाई ही समझें व तुरंत इसे नियंत्रित करने का प्रयास करें। कोलेस्ट्रॉल के कारण हार्ट अटैक, हृदय के कई प्रकार के रोग, डायबिटीज तथा वृक्क रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ इसका असर मस्तिष्क पर भी पड़ता है। कोलेस्ट्रॉल का अर्थ है रक्त में रक्तगत स्नेह की मात्रा कितनी है। इसे पूरी तरह से आहार पर नियंत्रण व व्यायाम की सहायता से कम किया जा सकता है। केवल व्यायाम, प्राणायाम व योगाभ्यास से ३० से ४० प्रतिशत तक कोलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है। बैड कोलेस्ट्रॉल से शरीर में चर्बी जमा हो जाती है। चर्बी का जमा होना शरीर के लिए नुकसानदेह है। गुड कोलेस्ट्रॉल शरीर में चर्बी को साफ व कम करने में मदद करता है। कांचनार गुगुलु, आरोग्यवर्धनी वटी, मेदोहर बिंडगादि लौह की दो-दो गोलियां दिन में ३ बार लें। सुबह उठने के साथ एक गिलास गर्म पानी पीएं। गाय का घी व दूध लेते रहें, उससे चर्बी नहीं बढ़ती। रोज समय निकालकर २० से २५ मिनट व्यायाम करें।
मुझे अन्नानास (पाइनापल) बेहद पसंद है। इस फल का मैं नियमित रूप से सेवन करता हूं। इस फल का औषधीय गुण व शरीर के लिए क्या फायदा है?
-जे.एन. प्रजापति, सायन
पाइनापल की गणना उष्ण कटिबंध देशों के पांच श्रेष्ठ फलों में की जाती है। इस फल का मूल स्थान अमेरिका है। यह फल फिरंगियों द्वारा हिंदुस्थान लाया गया था। इस फल को अब हर भारतीय परिवार ने अपनाकर लोकप्रिय बना दिया है। हिंदुस्थान में केरल, तमिलनाडु व कर्नाटक के कई हिस्सों में इसकी खेती की जाती है। ये फल रोचक, पाचन कार्य में मदद करनेवाला व गर्भाशय अवयव के लिए उत्तम है। पका हुआ फल स्वादिष्ट, खट्टा-मीठा, पित्तनाशक व मूत्रल है। मूत्र की मात्रा को बढ़ाकर मूत्र संस्थान को स्वस्थ रखता है। इस फल का आयुर्वेद शास्त्र में उल्लेख नहीं है। बार-बार सर्दी से परेशान व जोड़ों के दर्दवाले रोगियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।