" /> शराबी वाहनचालकों की जांच कोरोना की आंच, नशे की वजह से होती हैं दुर्घटनाएं

शराबी वाहनचालकों की जांच कोरोना की आंच, नशे की वजह से होती हैं दुर्घटनाएं

शराब पीकर वाहन चलाना, खुद की और दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालना, जैसे अनेक तरह के संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम वर्षों से किया जा रहा है। इसके बावजूद शराब पीकर वाहन चलानेवालों की संख्या कम नहीं हो रही है। पुलिस जांच-पड़ताल में प्रतिदिन करीब एक दर्जन से ज्यादा वाहन चालक पकड़े जाते हैं। ब्रीथ एनलाइजर के माध्यम से शराबी वाहन चालकों की पहचान की जाती है। कोरोना वायरस पैâलने की डर से ब्रीथ एनलाइजर का उपयोग न करने का निर्णय यातायात पुलिस ने लिया है।
उल्लेखनीय है कि नशे की वजह से सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। शराबी वाहन चालकों पर अंकुश लगाने के लिए यातायात पुलिस मुंह सूंघने की बजाय ब्रीथ एनलाइजर नामक यंत्र का उपयोग करती है। यंत्र को वाहन चालकों के मुंह के पास ले जाकर उनसे गहरी श्वांस छोड़ने के लिए कहा जाता है। उनकी श्वांसों से पता चल जाता है कि संबंधित वाहन चालक शराब पी है या नहीं। इस जांच प्रक्रिया में चूंकि ब्रीथ एनलाइजर को वाहन चालकों के मुंह के पास ले जाना पड़ता है, इसलिए कोरोना वायरस के संभावित खतरे को देखते हुए यातायात पुलिस ने ब्रीथ एनलाइजर का उपयोग न करने का निर्णय लिया है। कुछ वर्ष पूर्व जब पुलिस के पास ब्रीथ एनलाइजर उपलब्ध नहीं था, उस समय पुलिस वाहन चालकों का मुंह सूंघने का काम करती थी पर कोरोना वायरस से बचने के लिए पुलिस इस समय खुद मास्क प्रूफ हो गई है और यातायात नियमों का उल्लंघन करनेवाले वाहनचालकों के बीच निश्चित दूरी बनाकर ही चालान का निपटान कर रही है। एक यातायात पुलिस अधिकारी का कहना है कि कोरोना के चलते ब्रीथ एनलाइजर का उपयोग भले ही न किया जा रहा हो पर इसका मतलब यह नहीं है कि शराब पीकर वाहन चलानेवाला वाहनचालक पकड़ा नहीं जाएगा। शराबी वाहन चालक के हाव-भाव और बातचीत करने के तौर तरीकों से पता चल जाता है कि वह शराब का सेवन किया है या नहीं। विवाद खड़ा करने की सूरत में उसका न केवल मेडिकल टेस्ट कराया जा सकता है बल्कि भारी जुर्माने के साथ उसे जेल भी भेजा जा सकता है।