शहरी जंगल करेंगे मंगल!

मुंबई को प्रदूषण मुक्त बनाने और बारिश के पानी को समुद्र में मिलने से रोककर उसे जमीन के भीतर रिसकर जाने देने के लिए मनपा ने मुंबई में जंगल बनाने का निर्णय लिया है। मनपा के इस कदम से शहर के बीच में बने ये जंगल मुंबई में मंगल करेंगे। मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी द्वारा जून में इस विषय पर निर्णय लिया गया था, जिसके बाद अब इस परियोजना को गति दी जा रही है। मनपा ने अब जंगल बनाने के लिए मुंबई में प्लॉट की तलाश शुरू कर दी है।
५ प्लॉट पर जल्द होगा कार्य
शहर की बड़ी-बड़ी इमारतों के बीच जंगल बनाने के लिए मनपा ने ५०० प्लॉट ढूंढ़ निकाले हैं। इनमें मुलुंड (प।) के प्रताप सिंह मनोरंजन मैदान पर मनपा जंगल बनाएगी। यह मैदान १३,३५८ वर्ग मीटर का है। इसकी ३० प्रतिशत भूमि का उपयोग जंगल बनाने में किया जाएगा। दूसरा जंगल चांदीवली के प्लॉट पर बनाया जाएगा। इसके अलावा वडाला के ५५,००० वर्ग मीटर के भक्ति पार्क का प्रयोग जंगल बनाने में किया जाएगा। कांदिवली के ६,००० वर्ग मीटर के नवलकर उद्यान की ५० प्रतिशत भूमि का प्रयोग मनपा जंगल बनाने में करेगी। इसी के साथ मालाड स्थित २५,००० वर्ग मीटर के अप्पापाड़ा की ६० प्रतिशत भूमि पर जंगल बनाने का कार्य किया जाएगा। इन पांच प्लॉट पर मनपा अतिशीघ्र जंगल बनाने का कार्य शुरू करेगी।
मुंबई में मनेंगे १०० जंगल
बढ़ती आबादी के साथ मुंबई में निजी वाहनों की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ रही है, जिसके कारण मुंबई में प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ती जा रही है। इसलिए मनपा ने मुंबई में १०० जंगल बनाने का निर्णय लिया है। मनपा के सभी वॉर्ड अधिकारी ये जंगल बनाने के लिए जगह की तलाश करने में जुट गए हैं।
बारिश का पानी बचेगा
मुंबई में होनेवाली बरसात का पानी जल-जमाव रोकने के लिए स्टॉर्म वाटर ड्रेन्स के माध्यम से समुद्र में बहा दिया जाता है, जिसके कारण बारिश के पानी का मुंबईकर पूरी तरह उपयोग नहीं कर पाते। मुंबई के जंगल बनने के बाद पानी मिट्टी के भीतर रिसना शुरू हो जाएगा जिससे जमीन में जल का स्तर ऊपर उठेगा और पानी समुद्र में व्यर्थ बहने से बच पाएगा।
पक्षियों को मिलेगा आसरा
मनपा द्वारा बनाए जानेवाले इन जंगलों में पक्षियों को रहने के लिए जगह मिलेगी। मनपा सघन पेड़ युक्त जंगल में लोगों के घूमने के लिए फुटपाथ भी बनाएगी। मनपा आयुक्त प्रवीण परदेशी ने बताया कि इन जंगलों में जंगली जानवर नहीं होंगे। लोगों को शुद्ध हवा देने और बारिश के पानी को रोकने के मकसद से इन जंगलों को बनाया जाएगा। जंगल में पेड़ों की संख्या अधिक होने के कारण पक्षियों को भी आसरा मिलेगा।